फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Bale on the head, blisters in the feet, the reach of the house

सिर पर गठरी, पांव में छाले, घर पहुचने की ठाने

Sat, 16 May 2020 04:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 04:27 PM IST
विज्ञापन
Bale on the head, blisters in the feet, the reach of the house
गाजियाबाद से झारखंड के देवघर के लिए पैदल चलकर मठ योगेंद्र गिरी पहुंचे मजदूर । - फोटो : BALLIA
बैरिया। एनएच 31 से होकर बिहार व झारखंड के अलग -अलग जनपदों के मजदूरों के जाने का सिलसिला अब भी जारी है। कुछ मजदूर पैदल ही सिर पर सामानों की गठरी लेकर चल रहे हैं। कई लोगों को तो इस तपती दोपहरी में चलते-चलते पैरो में छाले तक पड़ गए हैं। तो कुछ ट्रक, पिकअप, बस व बोलेरो में भर भर कर बिहार की तरह जा रहे हैं। यहां तक कि पिकअप में क्षमता से अधिक सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए लोग सफर कर रहे हैं। कई मजदूर तो अपनी परेशानी बताते बताते रोने तक लगते हैं। वाकई दुख और दर्द क्या होता है इन मजदूरों के माध्यम से सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है। मुम्बई से मजदूरों से भरी दो ट्रक बैरिया के रास्ते बिहार राज्य के पूर्णिया जा रही थी। अभी दोनों ट्रक मांझी जयप्रभा सेतु तक पहुंची थी कि भारी वाहनों के आवागमन पर रोक होने के कारण उन ट्रकों को पुलिस ने लौटा दिया। जिससे पुन: दोनों ट्रक बैरिया पहुंची। ट्रक के चालक नगर पंचायत के मजदूरों से पूछ रहे थे कि यहां कुछ खाने पीने की दुकानें हैं लेकिन मजदूरों ने कहा कि नगर पंचायत हॉटस्पॉट हो गया है जिससे सारी दुकानें बंद हैं। भूख प्यास से व्याकुल पुर्णिया निवासी धर्मेन्द्र सिंह, अरुण महतो, जितेंद्र पाल, अवधेश राय आदि ने कहा कि चार दिन पहले मुम्बई से हम लोग चले हैं रास्ते में बिस्किट आदि थोड़ा बहुत खाए हैं लेकिन पेट भर कहीं खाने को नहीं मिला है। मुम्बई में कंपनी बन्द हो गई और कंपनी के मैनेजर ने खोराकी देने तक से भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद घर से पैसा मंगवा कर किसी तरह किराए पर ट्रक लेकर जा रहे हैं। मांझी जयप्रभा सेतु से जब ट्रक को नहीं जाने दिया गया तो ट्रक चालक ने गोरखपुर के रास्ते पूर्णिया जाने का निर्णय लिया। इसी तरह अहमदाबाद गुजरात में कंपनी बन्द होने के बाद बिहार के मोतिहारी निवासी ताज आलम, सलीम, अरबाज ने बताया कि वह लेथ मशीन चलाने का काम करता था। कंपनी बन्द होने के बाद हम लोग दाने दाने को मोहताज हो गए। पास में किराया तक नहीं था जिससे हम लोग पैदल ही चल पड़े और 15 दिन में हम लोग बैरिया तक पहुंचे हैं। कुछ दिनों में मोतिहारी पहुंच जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed