{"_id":"57c6eb554f1c1bb80d2cb040","slug":"badh-kichad-se-jeena-hua-dushwar","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी से मिली राहत, कीचड़ ने जिंदगी किया दुश्वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी से मिली राहत, कीचड़ ने जिंदगी किया दुश्वार
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 31 Aug 2016 08:06 PM IST
विज्ञापन
उच्च प्राथमिक विद्यालय का बाढ़ में क्षतिग्रस्त भवन।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा का जलस्तर गिरने से बाढ़ व कटान पीड़ितों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन उनकी मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। जैसे-जैसे जलस्तर खिसक रहा है, वैसे जमे पड़े कीचड़ व पानी से दुर्गंध उठना शुरू हो गया है। स्वास्थ्य विभाग केवल सड़कों पर अपना डेरा डाले हैं। गांव तक न तो कहीं छिड़काव ही शुरू हुआ और न कोई क्लोरिन की गोली ही पानी में डाली गई। इसको लेकर द्वाबा के कटान पीड़ितों में खासा नाराजगी है।
करीब एक माह से गंगा ने द्वाबा के कई गांवों में तबाही मचा रखी थी और शासन-प्रशासन केवल सहायता की बात सड़कों तक करता रहा। लेकिन पानी के अंदर फंसे गांवों तक आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने कोई सहायता नहीं मुहैया कराई। अगर इस बात की सच्चाई जाननी हो तो आप नौरंगा में पहुंचे, जहां बाढ़ के अंतिम दिनों में जिलाधिकारी ने हेलीकाप्टर से पीड़ितों के बीच भोजन व सहायता राशि पहुंचाई।
लेकिन एक दिन के बाद फिर जस की तस स्थिति बन गई। क्या नौरंगा में मात्र एक ही दिन गंगा का कहर था, हमारे तहसील के अधिकारी अपने कार्यों के प्रति कितना गंभीर है। इससे साफ प्रतीत हो जाता है। पानी गिरने के बाद सदर व बैरिया तहसील के जवहीं, हल्दी, बाबू बेल बघौज, चौबे छपरा, जग छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदय छपरा, पांडेयपुर, मुरली छपरा सहित किसी भी गांव में आज तक जिले के स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी का काफिला नहीं पहुंचा और नहीं किसी प्रकार की कोई छिड़काव ही किया गया। पीड़ितों का कहना है कि इसी तरह स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना रहा तो सैकड़ों लोग संक्रामक बीमारी की जद में आ जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
करीब एक माह से गंगा ने द्वाबा के कई गांवों में तबाही मचा रखी थी और शासन-प्रशासन केवल सहायता की बात सड़कों तक करता रहा। लेकिन पानी के अंदर फंसे गांवों तक आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने कोई सहायता नहीं मुहैया कराई। अगर इस बात की सच्चाई जाननी हो तो आप नौरंगा में पहुंचे, जहां बाढ़ के अंतिम दिनों में जिलाधिकारी ने हेलीकाप्टर से पीड़ितों के बीच भोजन व सहायता राशि पहुंचाई।
विज्ञापन
लेकिन एक दिन के बाद फिर जस की तस स्थिति बन गई। क्या नौरंगा में मात्र एक ही दिन गंगा का कहर था, हमारे तहसील के अधिकारी अपने कार्यों के प्रति कितना गंभीर है। इससे साफ प्रतीत हो जाता है। पानी गिरने के बाद सदर व बैरिया तहसील के जवहीं, हल्दी, बाबू बेल बघौज, चौबे छपरा, जग छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदय छपरा, पांडेयपुर, मुरली छपरा सहित किसी भी गांव में आज तक जिले के स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी का काफिला नहीं पहुंचा और नहीं किसी प्रकार की कोई छिड़काव ही किया गया। पीड़ितों का कहना है कि इसी तरह स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना रहा तो सैकड़ों लोग संक्रामक बीमारी की जद में आ जाएंगे।
विज्ञापन