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Ballia News: आयुष मंत्री जिले के प्रभारी, फिर भी दो माह से दवाओं का टोटा

Mon, 01 Jan 2024 11:58 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jan 2024 11:58 PM IST
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Ayush Minister is in-charge of the district, still there is shortage of medicines for two months
बलिया। केंद्र और प्रदेश सरकार प्राचीन चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। सरकार लोगों को योग से निरोग रखने के साथ ही आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति अपनाने के लिए जागरूक भी कर रही है। लेकिन जिले के आयुष विंग और आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवा का अभाव है।
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जिले के प्रभारी मंत्री आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु है। सोमवार को शहर के आयुर्वेदिक अस्पताल में घुटने के दर्द की दवा कराने पहुंचे रामायण यादव ने बताया कि यह सिर्फ नाम का अस्पताल है। चिकित्सक तो मिले लेकिन दवाएं नहीं मिली। सिर्फ गैस व बुखार का चूर्ण है। अन्य दवाएं बाहर से खरीद कर खानी पड़ेगी। अन्य आने वाले मरीजों का यही हाल रहा, वह कोसते हुए नजर आए। अस्पतालों में 50 प्रकार की जरूरी दवाओं में सिर्फ 10 से 12 प्रकार की ही दवाएं हैं।
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45 चिकित्सकों के भरोसे 68 अस्पताल
जनपद में 68 आयुर्वेदिक अस्पताल है,इसमें चार यूनानी है। जिनमें करीब 45 चिकित्सकों की तैनाती है। इनमें 43 आयुर्वेद और दो यूनानी विधि के चिकित्सक है। जबकि शहर के जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में दो चिकित्सक तैनात है। इनके जिम्मे प्रतिदिन 90 से 110 ओपीडी होती है।
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आयुर्वेदिक इलाज कराने से पूर्व चेक कर लें जेब
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने आने से पूर्व अपनी जेब को चेक कर लीजिए, क्योंकि सरकार की योजनाओं के मुताबिक इलाज तो मुफ्त ही होगा, लेकिन अस्पताल में दवाओं की कमी के कारण ज्यादातर दवाइयां बाहर से ही खरीदनी पड़ेंगी। ऐसे में अगर जेब पैसे से भरी होगी तो ही आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज संभव हैं। आयुर्वेदिक अस्पतालों में लोग इस उम्मीद में आते हैं कि उन्हें आयुर्वेदिक दवा का लाभ मिल सकेगा, लेकिन यहां कुछ गिनी-चुनी दवाओं के अतिरिक्त यहां कुछ भी नहीं मिल पाता। ये हाल जिला व ग्रामीण क्षेत्रों के आयुर्वेदिक अस्पतालों व आयुष विंग का है।


डॉक्टरों की लिखी दवा नहीं मिलती अस्पताल में
डॉक्टर मरीजों को जो दवाएं लिख रहे हैं वह दवाएं अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं है। मजबूरन मरीजों को बाहरी दुकानों से खरीद कर लानी पड़ रही है। अस्पताल में दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में कोई जांच की सुविधा भी नहीं है। अस्पताल प्रभारी का कहना है कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में पिछले दो माह से दवाओं की कमी चल रही है। 50 दवाओं में सिर्फ 10-12 दवाओं से काम चलाया जा रहा है।

शासन से की गई है दवा की मांग
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डाॅ. अनिल कुमार ने बताया कि शहर के अस्पताल के लिए 1.70 लाख व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल के लिए 1.05 लाख की दवा की मांग की सूची शासन को भेजी गई है।



मरीजों के सापेक्ष दवाओं की कमी कुछ दिनों से चल रही है। शासन में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों के लिए दवाओं की सूची बनाकर भेजी गई है। जल्द ही दवाएं उपलब्ध करवा दिया जाएगी ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। - डाॅ. अनिल कुमार, आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, बलिया
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