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मजबूर हैं क्योंकि हम मजदूर हैं--------------

Mon, 18 May 2020 08:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2020 08:30 PM IST
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Arrangement of money by selling mobile, watch, then home
बैरिया। लॉकडाउन में अहमदाबाद स्थित कपड़ा मिल बंद होने के बाद मजदूरों की नौकरी छूट गई। पास बचे पैसों से भोजन का इंतजाम होता रहा लेकिन जब पैसे समाप्त हो गए तो घर लौटने का ही एकमात्र विकल्प बचा। ऐसी स्थिति में मजदूरों ने मोबाइल, घड़ी बेचकर पैसे का इंतजाम किया और पैदल ही हाजीपुर स्थित घर के लिए चल पड़े।
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बिहार के हाजीपुर निवासी दिनेश राय ने बताया कि पैसा समाप्त होने के बाद हमने और साथियों ने अपना-अपना मोबाइल बेच दिया। मजबूरी में 10 हजार का मोबाइल महज 1500 रुपये में बेचना पड़ा। कहा अहमदाबाद से हम लोग पैदल चलकर 19वें दिन बलिया पहुंचे हैं। वहीं, जयशंकर बिंद ने बताया कि जान है तो जहान है। जेब में फूटी कौड़ी नहीं थी। ऐसे में 1200 रुपये में मोबाइल और 300 रुपये में घड़ी बेचना पड़ा। हम लोग पैदल चलते रहे। रास्ते में कोई गाड़ी वाला मिलता था तो हम लोग हाथ जोड़ते थे और वह गाड़ी से कुछ दूर छोड़ देता था। रास्ते में बिस्किट, खीरा, पपीता जो मिलता था खरीद कर खाते हुए बलिया तक पहुंचे। बलिया से मांझी पुल तक के लिए पिकअप मिला। हाजीपुर निवासी अशोक सिंह ने बताया कि कंपनी बंद होने के बाद कुछ दिनों तक खाने-पीने का इंतजाम हुआ लेकिन हर रोज फैल रहे कोरोना संक्रमण से डर का माहौल था। भोजन के लिए पैसे मांगने पर कंपनी के मैनेजर पैसे देने में असमर्थता जताई। ऐसे में थक हार कर हम मजदूर किसी तरह जो भी हमारे पास था बेचकर हम लोग पैदल ही घर की ओर चल पड़े।
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मैनेजर ने कहा, घर जाओ अन्यथा भूखों मरना पड़ेगा
बैरिया। गुजरात के सूरत में सूत मिल बंद होने के बाद मजदूरों के सामने राशन की समस्या पैदा हो गई। बिहार के वैशाली निवासी रोहित कुमार, चुनमुन, दीपक, सरोज, दिनेश, जयंत आदि 24 मजदूरों ने बताया कि मिल मालिक और मैनेजर ने कहा कि घर चले जाओ अन्यथा यहां भूखों मरना पड़ेगा। इसके बाद घर से पैसा मंगवाकर गाड़ी किराए पर लेकर कुछ दूर चले। इसके बाद सरकारी बस मिल गई तो उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंचाया। बलिया से एक सरकारी बस मिली जो बैरिया चिरैया मोड़ के पास बस खराब हो गई। चालक ने मजदूरों को वहीं उतार दिया। जब हम बैरिया त्रिमुहानी पर बाबू मैनेजर सिंह के प्रतिमा के पास पहुंचे तो क्षेत्राधिकारी बैरिया अशोक कुमार सिंह ने लंच पैकेट और पानी का बोतल उपलब्ध कराया। सीओ ने बताया कि करीब साठ मजदूरों को भोजन कराने के बाद पिकअप से बिहार की सीमा तक भेजवाया गया है।
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