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सुरक्षित नहीं हैं नौनिहाल
ballia
Updated Mon, 25 Sep 2017 10:47 PM IST
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छात्रों से खचाखच भरा स्कूल वाहन ओर वाहन के ढाले पर बैठा छात्र।
- फोटो : ballia
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स्कूल संचालकों की मनमानी के आगे अभिभावक विवश हैं। स्कूल प्रबंधन द्वारा बसों और अन्य वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को ढोया जा रहा है। इससे अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि ऐसे उनके बच्चों को खड़े होकर स्कूल जाना व आना पड़ता है।
जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में बिना मान्यता और बिना मानक के हर साल विद्यालय खोले जा रहे है। यहीं नहीं वाहन भी बिना मानक के फर्राटे से संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालय संचालक एडमिशन के दौरान तरह-तरह की सुविधा देने का दावा पेश करते है, लेकिन समय के साथ सारे दावे हवा हो जाते हैं। इनमें बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को लाने ले जाने का मामला भी है। सारी कोशिशों के बाद भी संचालक अभिभावकों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
बांसडीहरोड के उद्धवदवनी निवासी परमात्मा यादव का कहना है कि विद्यालय के संचालक बच्चों से वाहन फीस लेते है, लेकिन सीट से अधिक बच्चों को वाहन से भेजा जाता है। कहा कि वाहन में जितनी सीट रहे उतने ही बच्चों को बैठाकर भेजा जाए।
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जगदीशपुर निवासी कृष्ण बिहारी ने बताया कि विद्यालय के संचालकों ने अति करके रख दिया है। ऐसे स्कूल संचालकाें के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। सहतवार के गोपाल पांडेय का टोला निवासी दिलीप पांडेय का कहना है कि स्कूल संचालकाें के विरूद्ध एकजुट होकर आवाज उठाने की समय आ गया है।
अगर प्रत्येक बच्चों का वाहन फीस ले रहे है तो प्रत्येक बच्चों को सीट पर बैठा ले जाने की भी जिम्मेदारी है। दुबहर के नगवा निवासी व अधिवक्ता बरमेश्वर यादव ने बताया कि एडमिशन के समय अगर स्कूल प्रबंधन सुविधा देने का दावा करता है तो उसे पूरा भी करना चाहिये।
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जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में बिना मान्यता और बिना मानक के हर साल विद्यालय खोले जा रहे है। यहीं नहीं वाहन भी बिना मानक के फर्राटे से संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालय संचालक एडमिशन के दौरान तरह-तरह की सुविधा देने का दावा पेश करते है, लेकिन समय के साथ सारे दावे हवा हो जाते हैं। इनमें बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को लाने ले जाने का मामला भी है। सारी कोशिशों के बाद भी संचालक अभिभावकों की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
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बांसडीहरोड के उद्धवदवनी निवासी परमात्मा यादव का कहना है कि विद्यालय के संचालक बच्चों से वाहन फीस लेते है, लेकिन सीट से अधिक बच्चों को वाहन से भेजा जाता है। कहा कि वाहन में जितनी सीट रहे उतने ही बच्चों को बैठाकर भेजा जाए।
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जगदीशपुर निवासी कृष्ण बिहारी ने बताया कि विद्यालय के संचालकों ने अति करके रख दिया है। ऐसे स्कूल संचालकाें के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। सहतवार के गोपाल पांडेय का टोला निवासी दिलीप पांडेय का कहना है कि स्कूल संचालकाें के विरूद्ध एकजुट होकर आवाज उठाने की समय आ गया है।
अगर प्रत्येक बच्चों का वाहन फीस ले रहे है तो प्रत्येक बच्चों को सीट पर बैठा ले जाने की भी जिम्मेदारी है। दुबहर के नगवा निवासी व अधिवक्ता बरमेश्वर यादव ने बताया कि एडमिशन के समय अगर स्कूल प्रबंधन सुविधा देने का दावा करता है तो उसे पूरा भी करना चाहिये।