पेपर लीक मामला: जेल से रिहाई के बाद बलिया में जगह-जगह पत्रकारों का स्वागत, डीएम-एसपी गो बैक के लगे नारे
पेपर लीक मामले में फर्जी तरीके से गिरफ्तार पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह व मनोज गुप्ता को मंगलवार को जेल से छोड़ दिया गया। आजमगढ़ से बलिया रवाना होने पर आजमगढ़ के पत्रकारों ने रास्ते में जगह-जगह उनका स्वागत किया।
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यूपी बोर्ड पेपर लीक मामले में फंसाए गए बलिया के तीनों पत्रकार जमानत मिलने के बाद मंगलवार को 28 दिन बाद जेल से रिहा हो गए। उनके स्वागत के लिए आजमगढ़, मऊ व बलिया के पत्रकार बड़ी संख्या में जेल गेट पर पहुंचे थे। पत्रकार अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह व मनोज गुप्ता के आजमगढ़ से बलिया रवाना होने पर आजमगढ़ के पत्रकारों ने रास्ते में जगह-जगह उनका स्वागत किया।
इसके बाद मऊ व बलिया में भी पत्रकारों व अन्य संगठनों ने जगह-जगह पर उनका स्वागत किया। इस दौरान जेल का फाटक टूट गया, पत्रकार साथी छूट गया..। बलिया डीएम मुर्दाबाद-मुर्दाबाद तथा बलिया डीएम गो बैक-गो बैक के नारे लगे।
मंगलवार को आजमगढ़ जेल से तीनों पत्रकारों के बाहर आते ही पत्रकारों के साथ ही तमाम संगठनों के लोगों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद मुहम्मदाबाद, मऊ, रतनपुरा में स्वागत किया गया। तत्पश्चात नदौली, पकवाइनार पर पत्रकारों ने स्वागत किया। वहां के बाद रसड़ा गांधी पार्क, नगरा, गड़वार के बाद अमर उजाला कार्यालय पर उनका स्वागत किया गया।
जेल में अपराधियों की तरह किया गया व्यवहार
तीनों पत्रकारों ने बलिया प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी खामियों को छिपाने के लिए हमेें फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेज दिया गया। तीनों पत्रकारों ने बलिया के डीएम व एसपी की भूमिका संदिग्ध बताते हुए सवाल खड़े किए। कहा कि इस दौरान बलिया, आजमगढ़ समेत पूर्वांचल व प्रदेश के पत्रकारों, व्यापारी वर्ग और आम जनता का सहयोग रहा।
जेल में 28 दिन कैसे बीते यह हमें और हमारे घर वालों को ही पता है। पत्रकारों ने कहा कि हम लोगों ने जिला प्रशासन को पेपर लीक सूचना दी और प्रशासन ने आरोपियों को पकड़ने के बजाय सूचना देने वालों को ही आरोपी बना दिया। जेल से रिहा पत्रकारों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
बताया कि जिस दिन जेल में लाया गया था, उस दिन एसओजी व पुलिस ने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। उनका व्यवहार ऐसा था जैसे हम कोई बड़े अपराधी हैं और बड़ी घटना को अंजाम देकर आए हों। उनका रवैया हमारे प्रति ठीक नहीं था। इतना ही नहीं दबाव बनाते हुए हमारे सूत्रों को भी पूछा गया जो कानूनी रूप से गलत है। जबकि नियम है कि सूत्र बताने का हम पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है।
बलिया में बिक रहे थे बोर्ड के प्रश्नपत्र व कॉपियां
पत्रकारों ने कहा कि यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले ही बलिया में बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं व प्रश्नपत्र बिक रहे थे। पूरी सूचना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही थी। इसके बाद भी बलिया के डीएम और एसपी लगातार अपनी खामियों को छिपाने में लगे रहे। अखबार में खबर प्रकाशित हुई तो प्रशासन ने पत्रकारों का दमन करते हुए मामले को दबाने का प्रयास किया।