बेटी की डोली को विदा करने के बाद पिता ने निभाया छोटे भाई होने का फर्ज, बड़े भाई की अर्थी को दिया कंधा, नम हुईं आंखें
- जिस दिन घर में आनी थी बारात, उसी दिन घर पहुंचा पैरामिलिट्री फोर्स के जवान का शव
- लड़की के ससुराल से पांच लोगों को बुलाकर की गई रश्म अदायगी, बेटी की विदाई के बाद बड़े भाई का किया अंतिम संस्कार
विस्तार
बलिया जिले के नगरा मोड़ के समीप स्थित एक घर में सोमवार को एक बेटी की बरात आनी थी। इसे लेकर परिवार के सभी पुरुष सदस्य बरातियों के स्वागत की तैयारियों में जुटे थे। महिलाएं मांगलिक कार्यक्रमों में जुटी थीं, तभी एक गाड़ी आकर दरवाजे पर रुकी और इसके बाद घर में सन्नाटा छा गया। गाड़ी में दुल्हन के बड़े पापा का शव आया था जो पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान थे।
इस पल ने सभी को झकझोर कर रख दिया। परिवार के लोगों ने बेटी के ससुराल फोन किया और बारात की बजाय सिर्फ पांच लोगों को भेजने के लिए कहा ताकि शादी की रश्म अदायगी की जा सके। इसके बाद गाजीपुर जिले के नंदगंज से दूल्हे के साथ पांच लोग आए, दिन में ही शादी की रश्में अदा की गईं। इसके बाद पिता ने जल्दी-जल्दी बेटी की विदाई की और भाई का फर्ज निभाने के लिए अर्थी को कांधा देने की तैयारी में जुट गए।
कस्बा के नगरा मोड़ निवासी रविंद्र नाथ पांडेय पुत्र ब्रह्मानंद पाण्डेय पैरा मिलिट्री फोर्स में जवान थे। उनकी तैनाती भूटान में थी। वहीं अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उनकी यूनिट ने इलाज के लिए हाशिआरा एयर फोर्स अस्पताल पश्चिम बंगाल में भर्ती कराया। वहां जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों ने उन्हें दो दिन पहले नजदीक स्थित पटना एम्स के लिए रेफर कर दिया। वहां से पटना एम्स लाते समय जवान की रास्ते में ही मौत हो गई। मौत के बाद उनके शव को बीच रास्ते से ही गांव के लिए रवाना कर दिया।
गांव में उनके सगे छोटे भाई सुरेंद्रनाथ पांडेय की बेटी माला की शादी सोमवार को ही तय थी। सोमवार को गाजीपुर के नंदगंज से बरात आनी थी और सभी लोग बारात के स्वागत तथा शादी की रश्मों की तैयारियों में जुटे हुए थे, तभी रविंद्रनाथ पांडेय का शव घर पहुंचा।
गमगीन माहौल के बीच करीबियों की सलाह पर सुरेंद्र नाथ ने पहले पिता उसके बाद भाई होने का फर्ज निभाने का फैसला किया। सुरेंद्रनाथ ने बेटी के ससुराल फोन किया और वस्तुस्थिति की जानकारी दी। उनके अनुरोध पर दूल्हे के साथ पांच लोग गाजीपुर से गांव पहुंचे। रविंद्र के शव को घर से थोड़ी दूर रख शादी की रश्में दिन में ही पूरी की गईं। फिर माला की विदाई के बाद परिवार के लोग शव के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए।
पत्नी का रोते-रोते था बुरा हाल
रविंद्रनाथ पांडेय की पत्नी उर्मिला देवी (50) का रोते-रोते बुरा हाल था। वह बार-बार पति के शव के पास जाने का प्रयास कर रही थीं और गांव की महिलाएं उन्हें समझाने में जुटी थीं। दोनों बेटे राजीव कुमार पांडेय (27) और मदन कुमार पांडेय (24) साथ 20 वर्षीय बेटी लक्ष्मी भी लगातार रोए जा रहे थे। उन्हें लोग ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे थे।