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Ballia News: शनिचरा बाबा पूजन में उमड़ा आस्था का सैलाब
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मनियर कस्बा में आयोजित शनिचरा बाबा के पूजनोत्सव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
मनियर। भाद्र मास के कृष्ण पक्ष के प्रथम शनिवार की देर शाम मनियर उत्तर टोला स्थित शनिचरा बाबा के स्थान पर पूजन समारोह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
हर वर्ष की तरह इस बार भी तुरैहा समाज की ओर से विधि-विधान से शनिचरा बाबा का पूजन-अर्चन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार शनिचरा बाबा के स्थान की स्थापना करीब 150 वर्ष पूर्व हुई थी। मान्यता है कि सरयू नदी में आई बाढ़ के दौरान नेपाल से एक शिला बहकर मनियर क्षेत्र में पहुंची थी। लोगों ने उसे उठाकर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन शिला नहीं उठ सकी।
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बताया जाता है कि तुरैहा समाज के सरजू तुरहा ने किसी तरह शिला को उठा लिया, लेकिन वर्तमान मंदिर स्थल पर पहुंचते ही वह दोबारा नहीं उठी। उसी रात स्वप्न में शिला को इसी स्थान पर स्थापित कर पूजा करने का संदेश मिलने की लोकमान्यता है।
इसके बाद सरजू तुरहा ने शिला की स्थापना कर पूजा शुरू की और तभी से इसे शनिचरा बाबा के रूप में पूजा जाता है। तुरैहा समाज में यह भी मान्यता है कि बिच्छू, हाड़ा आदि जहरीले जंतुओं के काटने पर शनिचरा बाबा के स्थान पर पूजा करने से विष का प्रभाव कम हो जाता है।
पूजन समारोह के दौरान शनिचरा बाबा शिक्षा सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए रोआब्जा शरबत का स्टॉल लगाया गया। इसमें डॉ. विनय कुमार तुरैहा, डॉ. विजय शंकर और ललन प्रसाद तुरैहा का विशेष सहयोग रहा। संवाद
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हर वर्ष की तरह इस बार भी तुरैहा समाज की ओर से विधि-विधान से शनिचरा बाबा का पूजन-अर्चन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
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स्थानीय लोगों के अनुसार शनिचरा बाबा के स्थान की स्थापना करीब 150 वर्ष पूर्व हुई थी। मान्यता है कि सरयू नदी में आई बाढ़ के दौरान नेपाल से एक शिला बहकर मनियर क्षेत्र में पहुंची थी। लोगों ने उसे उठाकर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन शिला नहीं उठ सकी।
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बताया जाता है कि तुरैहा समाज के सरजू तुरहा ने किसी तरह शिला को उठा लिया, लेकिन वर्तमान मंदिर स्थल पर पहुंचते ही वह दोबारा नहीं उठी। उसी रात स्वप्न में शिला को इसी स्थान पर स्थापित कर पूजा करने का संदेश मिलने की लोकमान्यता है।
इसके बाद सरजू तुरहा ने शिला की स्थापना कर पूजा शुरू की और तभी से इसे शनिचरा बाबा के रूप में पूजा जाता है। तुरैहा समाज में यह भी मान्यता है कि बिच्छू, हाड़ा आदि जहरीले जंतुओं के काटने पर शनिचरा बाबा के स्थान पर पूजा करने से विष का प्रभाव कम हो जाता है।
पूजन समारोह के दौरान शनिचरा बाबा शिक्षा सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए रोआब्जा शरबत का स्टॉल लगाया गया। इसमें डॉ. विनय कुमार तुरैहा, डॉ. विजय शंकर और ललन प्रसाद तुरैहा का विशेष सहयोग रहा। संवाद