{"_id":"6a874b4e4a8fc21649021b84","slug":"a-better-career-in-the-evolving-academic-landscape-will-be-built-only-through-research-and-innovation-ballia-news-c-190-1-svns1008-171133-2026-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: शोध और नवाचार से ही बदलते अकादमिक परिदृश्य में बनेगा बेहतर कॅरिअर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: शोध और नवाचार से ही बदलते अकादमिक परिदृश्य में बनेगा बेहतर कॅरिअर
विज्ञापन
जेएनसीयू में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला। विवि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में शोध और नवाचार पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में हुआ।
मुख्य वक्ता ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, प्रयागराज के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने प्राध्यापकों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए शोध, नवाचार, परियोजना लेखन, फंडिंग और रोजगारपरक शिक्षा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न प्रोजेक्ट फंडिंग एजेंसियों की जानकारी देते हुए शोध परियोजना के लिए विषय चयन, प्रस्ताव तैयार करने, शोध की गुणवत्ता और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि बदलते अकादमिक एवं तकनीकी परिदृश्य में केवल पारंपरिक शिक्षण तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उच्च शिक्षा संस्थानों को शोध एवं नवाचार के माध्यम से समाज की समकालीन समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। प्रो. सिंह ने प्राध्यापकों और शोधार्थियों से शोध एवं नवाचार को अपनी अकादमिक गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फंडिंग अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्य वक्ता ईश्वर शरण पीजी कॉलेज, प्रयागराज के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने प्राध्यापकों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए शोध, नवाचार, परियोजना लेखन, फंडिंग और रोजगारपरक शिक्षा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न प्रोजेक्ट फंडिंग एजेंसियों की जानकारी देते हुए शोध परियोजना के लिए विषय चयन, प्रस्ताव तैयार करने, शोध की गुणवत्ता और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के बारे में बताया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बदलते अकादमिक एवं तकनीकी परिदृश्य में केवल पारंपरिक शिक्षण तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उच्च शिक्षा संस्थानों को शोध एवं नवाचार के माध्यम से समाज की समकालीन समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। प्रो. सिंह ने प्राध्यापकों और शोधार्थियों से शोध एवं नवाचार को अपनी अकादमिक गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फंडिंग अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
विज्ञापन