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सीएचसी-पीएचसी बने सफेद हाथ्ाी
Ballia
Updated Thu, 17 Jan 2013 05:30 AM IST
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बैरिया। क्षेत्र के सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों के आपरेशन और प्रसव की माकूल व्यवस्था नहीं हैं। कई बार लोगों ने इसकी शिकायत की लेकिन अब तक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो किया गया।
बैरिया तहसील क्षेत्र की कुल आबादी करीब चार लाख 26 हजार है। सरकार द्वारा लोगों के बेहतर इलाज के लिए आयुर्वेदिक, होमियोपैथ, एलोपैथिक सीएचसी एवं पीएचसी मिलाकर कुल 13 चिकित्सालय खोले गए हैं। लेकिन किसी भी सीएचसी और पीएचसी पर आपेरशन एवं प्रसव के लिए माकूल व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र के व्यवसायी सूर्य प्रकाश पांडेय का कहना है कि सीएचसी और पीएचसी पर सुविधाएं चिकित्सक नहीं होने के कारण बाध्य होकर निजी नर्सिंग होमों में जा कर आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है। अधिवक्ता कौशल मिश्र का कहना है कि निजी नर्सिंग होमों का आलम यह कि सर्जन की योग्यता न रखने के बावजूद गरीब जनता को मूर्ख बनाकर आपरेशन कर दिया जाता है। स्थिति खराब होने पर चिकित्सक पल्ला झाड़ लेते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीनाथ सिंह का कहना है कि क्षेत्र में नर्सिंग होम बिना मानक के खुल गए हैं। लेकिन चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से कभी भी उनकी जांच नहीं कराई जाती। यदि कभी जांच कराई भी जाती है, तो उन्हें हरी झंडी दे दी जाती है। सराफा व्यवसायी विद्याशंकर सर्राफ ने कहा कि अधिकांश नर्सिंग होमों में बाहर से आए सर्जन बताकर कंपाउंडर से आपरेशन करा दिया जाता है। तीमारदारों को नर्सिंग होम से किसी प्रकार की रसीद नहीं मिलती जिससे वह गड़बड़ी की शिकायत कर सकें।
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बैरिया तहसील क्षेत्र की कुल आबादी करीब चार लाख 26 हजार है। सरकार द्वारा लोगों के बेहतर इलाज के लिए आयुर्वेदिक, होमियोपैथ, एलोपैथिक सीएचसी एवं पीएचसी मिलाकर कुल 13 चिकित्सालय खोले गए हैं। लेकिन किसी भी सीएचसी और पीएचसी पर आपेरशन एवं प्रसव के लिए माकूल व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र के व्यवसायी सूर्य प्रकाश पांडेय का कहना है कि सीएचसी और पीएचसी पर सुविधाएं चिकित्सक नहीं होने के कारण बाध्य होकर निजी नर्सिंग होमों में जा कर आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है। अधिवक्ता कौशल मिश्र का कहना है कि निजी नर्सिंग होमों का आलम यह कि सर्जन की योग्यता न रखने के बावजूद गरीब जनता को मूर्ख बनाकर आपरेशन कर दिया जाता है। स्थिति खराब होने पर चिकित्सक पल्ला झाड़ लेते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीनाथ सिंह का कहना है कि क्षेत्र में नर्सिंग होम बिना मानक के खुल गए हैं। लेकिन चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से कभी भी उनकी जांच नहीं कराई जाती। यदि कभी जांच कराई भी जाती है, तो उन्हें हरी झंडी दे दी जाती है। सराफा व्यवसायी विद्याशंकर सर्राफ ने कहा कि अधिकांश नर्सिंग होमों में बाहर से आए सर्जन बताकर कंपाउंडर से आपरेशन करा दिया जाता है। तीमारदारों को नर्सिंग होम से किसी प्रकार की रसीद नहीं मिलती जिससे वह गड़बड़ी की शिकायत कर सकें।
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