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दोस्त ने ही ले ली इंद्रजीत की जान
Ballia
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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गड़वार/चिलकहर। कुरेजी-कुकुहरा नहर मार्ग के बेलेसरा माइनर के पास हजौली के टेकरहीं गांव निवासी शिक्षक इंद्रजीत प्रजापति की हत्या दीपावली की रात उसके अजीज मित्र सुमंत सिंह उर्फ भीम सिंह ने की थी। शिक्षक हत्या का खुलासा गड़वार पुलिस ने मंगलवार की सुबह किया।
थानाध्यक्ष गड़वार ने बताया कि टकरहीं निवासी भीम सिंह ने एक योजना के तहत अपने मित्र इंद्रजीत को दीपावली के दिन बलिया अपने मकान पर दीप जलाने के बहाने ले आया। दोनों ने एक साथ दारू पी और दारू पीते समय भीम ने इंद्रजीत के गिलास में नशे की गोली डाल दी साथ ही खुद कम शराब पी। फिर नशे में धुत इंद्रजीत को कुरेजी-कुकुहरा नहर मार्ग से गांव ले जाने लगा और बेलेसर माइनर के पास भीम ने लघुशंका के बहाने अपनी बाइक रोक दी। फिर दोनों नीचे उतरे लेकिन इंद्रजीत पूरी तरह नशे में धुत था। वह जमीन पर लेट गया। इस बीच मौका देख भीम सिंह ने बाइक की डिग्गी से दाव निकाल उसके गर्दन को धड़ से अलग कर दिया। इंद्रजीत की मौके पर ही मौत हो गई। शिक्षक इंद्रजीत की हत्या का खुलासा करते हुए एसओ ने बताया कि इंद्रजीत और भीम सिंह में अच्छी दोस्ती थी। इंद्रजीत ने अपने भाइयों की नौकरी के लिए भीम सिंह को 15 लाख रुपये दिए थे। तीन साल बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो इंद्रजीत अपने रुपये वापस मांगने लगा। इसके बाद भीम सिंह ने इंद्रजीत से दूरी बना ली। लेकिन इंद्रजीत हमेशा उसपर पैसे देने के लिए दबाव बनाता था। दबाव बढ़ने पर भीम सिंह ने उसकी हत्या कर दी। घटना के दूसरे दिन सुबह भीम मौके पर पहुंचा और कहने लगा कि मेरे साथ इंद्रजीत बलिया गया था और शाम को सात बजे ही हजौली चट्टी पर आ गया था। उसके बाद उसका कहीं पता नहीं चला। शक के आधार पर पुलिस भीम सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करती रही। एक हफ्ते बाद सोमवार की रात उसने सच उगला।
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थानाध्यक्ष गड़वार ने बताया कि टकरहीं निवासी भीम सिंह ने एक योजना के तहत अपने मित्र इंद्रजीत को दीपावली के दिन बलिया अपने मकान पर दीप जलाने के बहाने ले आया। दोनों ने एक साथ दारू पी और दारू पीते समय भीम ने इंद्रजीत के गिलास में नशे की गोली डाल दी साथ ही खुद कम शराब पी। फिर नशे में धुत इंद्रजीत को कुरेजी-कुकुहरा नहर मार्ग से गांव ले जाने लगा और बेलेसर माइनर के पास भीम ने लघुशंका के बहाने अपनी बाइक रोक दी। फिर दोनों नीचे उतरे लेकिन इंद्रजीत पूरी तरह नशे में धुत था। वह जमीन पर लेट गया। इस बीच मौका देख भीम सिंह ने बाइक की डिग्गी से दाव निकाल उसके गर्दन को धड़ से अलग कर दिया। इंद्रजीत की मौके पर ही मौत हो गई। शिक्षक इंद्रजीत की हत्या का खुलासा करते हुए एसओ ने बताया कि इंद्रजीत और भीम सिंह में अच्छी दोस्ती थी। इंद्रजीत ने अपने भाइयों की नौकरी के लिए भीम सिंह को 15 लाख रुपये दिए थे। तीन साल बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो इंद्रजीत अपने रुपये वापस मांगने लगा। इसके बाद भीम सिंह ने इंद्रजीत से दूरी बना ली। लेकिन इंद्रजीत हमेशा उसपर पैसे देने के लिए दबाव बनाता था। दबाव बढ़ने पर भीम सिंह ने उसकी हत्या कर दी। घटना के दूसरे दिन सुबह भीम मौके पर पहुंचा और कहने लगा कि मेरे साथ इंद्रजीत बलिया गया था और शाम को सात बजे ही हजौली चट्टी पर आ गया था। उसके बाद उसका कहीं पता नहीं चला। शक के आधार पर पुलिस भीम सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करती रही। एक हफ्ते बाद सोमवार की रात उसने सच उगला।
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