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पूरे पखवारे बदमाशों की गूंजती रहीं बंदूकें
Ballia
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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बलिया। जिले में लूट, हत्या व डकैती की घटनाओं से भेले ही जिला कराह रहा हो, लेकिन पुलिस बड़े मामले में भी एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। जिले में अपराधियों की बंदूकें गूंज रही हैं। एक पखवारे से जनपदवासियों की नींद हराम है। लेकिन महकमा घटनाओं पर परदा डालने में जुटा है। आलम यह है कि महकमे के अफसरों के दबाव में अधिकांश मामलों को दर्ज किया जाता है। संगीन वारदातों को पुलिस पहले दर्ज करने में आनाकानी करती है। काफी दबाव पड़ने पर चोरी या फिर सामान की गुमशुदगी दर्ज कर पल्ला झाड़ लेती है।
सूबे व जिले में अपराध का ग्राफ घटाने का पुलिस ने नया फंडा इजाद कर लिया है। कारण कि महकमे के आला अफसरों को लूट, हत्या, छिनैती जैसे बड़े अपराधों के लिए जवाब देना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र के एसओ भी केस दर्ज करने से पहले ना नुकूर करते हैं। महीने भर के भीतर आधा दर्जन लूट एवं छिनैती जैसी अपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद लुटेरे हथियार लहराते हुए भाग निकले। कई मामलों में पीड़ित व्यक्ति के थाने पर जाने पर उल्टे उसी से अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। मुकदमे के लिए तहरीर देने पर कई दिनों तक दौड़ाया गया। मुकदमा दर्ज करने से पहले तमाम नखरे दिखा और केस दर्ज होने से कोई फायदा न बता भुक्तभोगी को खामोश करने का प्रयास करती है। उसके मान जाने पर यह कहा जाता है कि पीड़ित तहरीर ही नहीं दे रहा है तो हम मुकदमा कैसे लिखें। अगर पीड़ित ने नेता व अधिकारियों से केस दर्ज करने की गुहार की तो किसी तरह लूट को चोरी में तब्दील कर दिया जाता है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि पुलिस खुद अपराध को रोकने के बजाए मामलों को दबाने का भरसक कोशिश करती है। शासन की मंशा है कि अपराध कम हो, इसके लिए पुलिस अपराध को रोकने के बजाए एफआईआर को रोकने का काम कर रही है।
पुलिस के कारनामे पर गौर करें तो गड़वार थाना क्षेत्र के असनवार निवासी सिंचाई विभाग के कर्मचारी जगदीश यादव से 4200 रुपये पिछले महीने दो बाइक सवार बदमाशों ने गांव के पास से लूट लिया था। पुलिस काफी दबाव के बाद उसे चोरी के रूप में दर्ज की। जब आईजी जोन वाराणसी के यहां से मामले के खुलासे का दबाव बनाया गया तो आनन-फानन में पुलिस दो युवकों को पकड़कर खुलासा किया। दोनों लुटेरों के पास से 12 हजार रुपये की बरामदगी कोतवाली में दिखाई गई, लेकिन पुलिस के चोरी का मुकदमा दर्ज होने के कारण आज भी पीड़ित को लूट का पैसा नहीं मिल रहा है। उसे बरामद रुपये लेने में भी कोर्ट का ही सहारा लेना पड़ सकता है। पीड़ित की माने तो उस वक्त पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज करने और खुलासा होने पर लूट दिखा पैसा और जेवरात वापस दिलाने का वादा दिया था। उस समय पुलिस पीड़ित से यह भी लिखवाकर लिया था कि हमारे साथ लूट की घटना नहीं हुई है।
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सूबे व जिले में अपराध का ग्राफ घटाने का पुलिस ने नया फंडा इजाद कर लिया है। कारण कि महकमे के आला अफसरों को लूट, हत्या, छिनैती जैसे बड़े अपराधों के लिए जवाब देना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र के एसओ भी केस दर्ज करने से पहले ना नुकूर करते हैं। महीने भर के भीतर आधा दर्जन लूट एवं छिनैती जैसी अपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद लुटेरे हथियार लहराते हुए भाग निकले। कई मामलों में पीड़ित व्यक्ति के थाने पर जाने पर उल्टे उसी से अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। मुकदमे के लिए तहरीर देने पर कई दिनों तक दौड़ाया गया। मुकदमा दर्ज करने से पहले तमाम नखरे दिखा और केस दर्ज होने से कोई फायदा न बता भुक्तभोगी को खामोश करने का प्रयास करती है। उसके मान जाने पर यह कहा जाता है कि पीड़ित तहरीर ही नहीं दे रहा है तो हम मुकदमा कैसे लिखें। अगर पीड़ित ने नेता व अधिकारियों से केस दर्ज करने की गुहार की तो किसी तरह लूट को चोरी में तब्दील कर दिया जाता है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि पुलिस खुद अपराध को रोकने के बजाए मामलों को दबाने का भरसक कोशिश करती है। शासन की मंशा है कि अपराध कम हो, इसके लिए पुलिस अपराध को रोकने के बजाए एफआईआर को रोकने का काम कर रही है।
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पुलिस के कारनामे पर गौर करें तो गड़वार थाना क्षेत्र के असनवार निवासी सिंचाई विभाग के कर्मचारी जगदीश यादव से 4200 रुपये पिछले महीने दो बाइक सवार बदमाशों ने गांव के पास से लूट लिया था। पुलिस काफी दबाव के बाद उसे चोरी के रूप में दर्ज की। जब आईजी जोन वाराणसी के यहां से मामले के खुलासे का दबाव बनाया गया तो आनन-फानन में पुलिस दो युवकों को पकड़कर खुलासा किया। दोनों लुटेरों के पास से 12 हजार रुपये की बरामदगी कोतवाली में दिखाई गई, लेकिन पुलिस के चोरी का मुकदमा दर्ज होने के कारण आज भी पीड़ित को लूट का पैसा नहीं मिल रहा है। उसे बरामद रुपये लेने में भी कोर्ट का ही सहारा लेना पड़ सकता है। पीड़ित की माने तो उस वक्त पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज करने और खुलासा होने पर लूट दिखा पैसा और जेवरात वापस दिलाने का वादा दिया था। उस समय पुलिस पीड़ित से यह भी लिखवाकर लिया था कि हमारे साथ लूट की घटना नहीं हुई है।
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