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अभियान से फाइलेरिया पर लगा अंकुश
Ballia
Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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बलिया। फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है। यह रोग क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छर के काटने से और परजीवी उचेरेरिया बैंक क्राप्टी के कारण होता है। इसे हाथीपांव रोग भी कहा जाता है। इससे निजात पाने के लिए शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष फाइलेरिया दिवस मनाया जाता है। जिसमें आयु वर्ग के अनुसार डीइसी दवा नि:शुल्क दी जाती है। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2005 से अब तक कुल फैलेरिया रोगी 14 हजार 871 मिले। जबकि 94 लाख 08 हजार 962 लोगों को फाइलेरिया से निजात को डीइसी की दवा दी गई।
शासन द्वारा फाइलेरिया रोग से निजात के लिए 2005 से जनपद में फाइलेरिया दिवस अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें डीइसी की एक खुराक आयु वर्ग के अनुसार दी जाती है। पीड़ित व्यक्ति अगर लगातार प्रोग्राम की दवा खा लेते तो फाइलेरिया रोग होने की संभावना नगन्य हो जाती है। यह रोग जानलेवा नहीं होता है ,बल्कि प्रभावित अंग में सूजन बढ़ा देता है और अंग विकृति पैदा करता है। जिला अस्पताल के फाइलेरिया विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2005 में छह हजार 442 फै लेरिया रोगी मिले और 22 लाख 50 हजार 146 लोगों को डीइसी की दवा खिलाई गई।
वर्ष 2006 व 07 में अभियान किसी कारणवश बंद रहा। लेकिन पुन: वर्ष 2008 में अभियान को चालू किया गया। जिसमें 3171 फाइलेरिया रोगी मिले एवं 23 लाख 72 हजार 476 लोगों को डीइसी की खुराक दी गई। इसी क्रम में 2010 में 3133 फाइलेरिया रोगी पंजीयन हुए एवं 24 लाख एक हजार 668 लोगों को दवा की खुराक दी गई। वर्ष 2011 में 2125 फाइलेरिया रोगी मिले एवं 23 लाख 83 हजार 672 लोगों को डीइसी की एक खुराक दी गई। इस प्रकार अभियान चलने से प्रत्येक वर्ष मरीजों की संख्या में कमी आई है।
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शासन द्वारा फाइलेरिया रोग से निजात के लिए 2005 से जनपद में फाइलेरिया दिवस अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें डीइसी की एक खुराक आयु वर्ग के अनुसार दी जाती है। पीड़ित व्यक्ति अगर लगातार प्रोग्राम की दवा खा लेते तो फाइलेरिया रोग होने की संभावना नगन्य हो जाती है। यह रोग जानलेवा नहीं होता है ,बल्कि प्रभावित अंग में सूजन बढ़ा देता है और अंग विकृति पैदा करता है। जिला अस्पताल के फाइलेरिया विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2005 में छह हजार 442 फै लेरिया रोगी मिले और 22 लाख 50 हजार 146 लोगों को डीइसी की दवा खिलाई गई।
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वर्ष 2006 व 07 में अभियान किसी कारणवश बंद रहा। लेकिन पुन: वर्ष 2008 में अभियान को चालू किया गया। जिसमें 3171 फाइलेरिया रोगी मिले एवं 23 लाख 72 हजार 476 लोगों को डीइसी की खुराक दी गई। इसी क्रम में 2010 में 3133 फाइलेरिया रोगी पंजीयन हुए एवं 24 लाख एक हजार 668 लोगों को दवा की खुराक दी गई। वर्ष 2011 में 2125 फाइलेरिया रोगी मिले एवं 23 लाख 83 हजार 672 लोगों को डीइसी की एक खुराक दी गई। इस प्रकार अभियान चलने से प्रत्येक वर्ष मरीजों की संख्या में कमी आई है।
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