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गंगा पर सियासत को करें बंद

Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
Ballia
Ballia Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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बलिया। गंगा में पानी नहीं रहेगा तो मनुष्य जीवित नहीं रह सकता। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री जितनी चिंता गंगा के लिए तपस्यारत लोगों के प्रति दिखा रहे हैं, उतनी चिंता टिहरी में कैद गंगा के प्रति दिखाते तो प्रदेश के जनमानस को गंगा के लिए आंदोलन करने की नौबत नहीं आती। यह बात रविवार को पत्रकारों के समक्ष गंगा मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने कहीं। वे मिश्र नेउरी स्थित अध्यात्मिक चिंतन संस्थान कार्यालय पर गंगा आंदोलन की समीक्षात्मक बैठक को संबोधित कर रहे थे।
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कहा कि देश के कुछ चोटी के संतों को गंगा के बहाने कांग्रेस के सेहत की चिंता सता रही है। सियासत को चिंता बताने वाले संत साधुता के कितने करीब हैं ? यह चिंतनीय है, जिसपर देश के बुद्धिजीवियों को गंभीर मंथन करना होगा। कहा कि आजादी शासन के राष्ट्रीय प्रमुख से कुछ क्रांतिकारी निर्णय की उपेक्षा कर रही है। जिस ओर प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का ध्यान तक नहीं है। कहा कि गंगा की समस्या एक दिन में पैदा नहीं हुई है। ऐसा अब तक की केंद्र सरकारों द्वारा देश के भूगोल को न समझने का परिणाम स्वरूप भारत की जनता को विरासत में मिल रहा है। श्री तिवारी ने सवाल करते हुए कहा कि आखिर एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार गंगा मुक्ति आंदोलन का समर्थन कर रही है। कहा कि कुंभ मेले की तैयारी कर रही सरकार को समय रहते गंगा में पानी बना रहे इसकी तैयारी करनी चाहिए। बैठक की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष जगन्नाथ तिवारी तथा संचालन श्रीकांत चौबे ने किया है।
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