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Ballia News: 32 साल से पुश्तैनी जमीन के लिए भटक रहा 82 वर्षीय बुजुर्ग
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न्याय के लिए विगत 32 वर्षों से न्यायालय का चक्कर लगा रहे तियरा हैदरपुर निवासी हरिशंकर तिवारी।
नगरा। पुश्तैनी जमीन पर कब्जा पाने की आस में 82 वर्षीय बुजुर्ग हरिशंकर तिवारी पिछले 32 वर्षों से न्यायालयों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। बुजुर्ग ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है।
तियरा हैदरपुर निवासी हरिशंकर तिवारी का आरोप है कि वर्ष 1996 में चकबंदी के दौरान उनकी भूमि से संबंधित अभिलेखों में गंभीर अनियमितता की गई। उनका कहना है कि तत्कालीन अधिकारी ने 29 दिसंबर 1996 को जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें ही फर्जी मुकदमों में उलझा दिया गया। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उनकी आराजी में से 11 डिसमिल पर अमलदरामद कर दिया गया।
पीड़ित के अनुसार, कमिश्नरी, जिला न्यायालय और जिलाधिकारी कार्यालय से उनके पक्ष में आदेश पारित हो चुके हैं, इसके बावजूद आज तक उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। वर्तमान में उनकी पुश्तैनी भूमि स्थित आराजी पर बना कच्चा मकान भी जर्जर होकर गिर चुका है। अब वहां सिर्फ टिनशेड बचा है। हरिशंकर तिवारी का आरोप है कि जब भी वह नए मकान के निर्माण के लिए नींव खोदने का प्रयास करते हैं तो गांव के कुछ दबंग और उनके परिजन विरोध करते हैं।
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हताश बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में फर्जी मुकदमों से मुक्ति दिलाने, पुश्तैनी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिंदगी के इस पड़ाव पर अब उनके पास दौड़भाग करने की ताकत नहीं बची है।
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मामले की जानकारी नहीं है। यदि शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अनिल कुमार, एडीएम फाइनेंस
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तियरा हैदरपुर निवासी हरिशंकर तिवारी का आरोप है कि वर्ष 1996 में चकबंदी के दौरान उनकी भूमि से संबंधित अभिलेखों में गंभीर अनियमितता की गई। उनका कहना है कि तत्कालीन अधिकारी ने 29 दिसंबर 1996 को जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें ही फर्जी मुकदमों में उलझा दिया गया। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उनकी आराजी में से 11 डिसमिल पर अमलदरामद कर दिया गया।
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पीड़ित के अनुसार, कमिश्नरी, जिला न्यायालय और जिलाधिकारी कार्यालय से उनके पक्ष में आदेश पारित हो चुके हैं, इसके बावजूद आज तक उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। वर्तमान में उनकी पुश्तैनी भूमि स्थित आराजी पर बना कच्चा मकान भी जर्जर होकर गिर चुका है। अब वहां सिर्फ टिनशेड बचा है। हरिशंकर तिवारी का आरोप है कि जब भी वह नए मकान के निर्माण के लिए नींव खोदने का प्रयास करते हैं तो गांव के कुछ दबंग और उनके परिजन विरोध करते हैं।
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हताश बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में फर्जी मुकदमों से मुक्ति दिलाने, पुश्तैनी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिंदगी के इस पड़ाव पर अब उनके पास दौड़भाग करने की ताकत नहीं बची है।
मामले की जानकारी नहीं है। यदि शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अनिल कुमार, एडीएम फाइनेंस