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भगवान छप्पन भोग के नहीं प्रेम के भूखे है -प्रेम भूषण जी

Thu, 20 Dec 2018 12:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Dec 2018 12:55 AM IST
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भगवान छप्पन भोग के नहीं प्रेम के भूखे है -प्रेम भूषण जी
बलिया। भगवान ने मनुष्य को बनाकर कोई स्वार्थ नहीं चाहा है। लेकिन हमलोग भगवान के एक भी काम नहीं आ रहे। हम दिखावे के लिये भगवान को छप्पन भोग चढ़ाते हैं और पूरे मोहल्ले में कहते है कि आज मैंने भगवान को छप्पन भोग चढ़ाया है। हम यह इसलिए नहीं करते हैं कि हमने छप्पन भोग चढ़ाया है बल्कि इसलिए करते हैं दुनिया मेरे ऐश्वर्य को देेखे और मुझे बड़ा भक्त समझे। अरे भाई किसको छप्पन भोग चढ़ा रहे हो, जिसने सबकुछ दिया उसी के सामने अहंकार, भगवान छप्पन भोग के नहीं प्रेम के भूखे हैं। शहर के टाऊन डिग्री कालेज में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन प्रेमभूषण महाराज ने प्रवचन में लोगों को यह सीख दी।
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कहा कि अगर भगवान को कोई अपने घर बुला सकता है, रुका सकता है तो वह भक्त ही है। ऐसा तब होगा जब आप केवटराज जैसी भक्ति अपने हृदय में प्रभु के लिये लाएं। केवट ने जब मात्र प्रभु के चरण को नेह के साथ पखारा तो उसकी चारो व्याधि दूर हो गयी थी। संत प्रेम भूषण ने शबरी प्रेम के चित्रण से यह बताया कि भगवत प्रेम में कोई भी जाति बंधन और स्त्री पुरुष का भेद नहीं होता है। अगर सेवक हो तो हनुमान जी जैसे हो, हनुमत चरित्र से भक्ति का संचार किया । माता सीता का हरण करने वाले लंकेश रावण को युद्ध में हराकर जनक नंदिनी के साथ वापस अयोध्या आते हैं जहां भगवान का राज्याभिषेक होता है। श्रीराम के लंका विजय से लेकर अयोध्या में राज्याभिषेक तक का मनोहारी प्रंसग सुनाया। कहा कि असत्य पर सत्य की विजय होती है। असत्य, अधर्म व अन्याय पर चलने वाला व्यक्ति कितना भी सामर्थ्यवान हो उसका पतन अवश्य होता है। कथा का श्रवण कराकर उपस्थित भक्तों को भावविभोर व भक्तिमय कर दिया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व स्वामी प्रेम भूषण जी महाराज के आसन पर पहुंचने के बाद इस आयोजन के यजमान विंध्यांचल सिंह एवं श्रीमती तेतरी सिंह (माता पिता दयाशंकर सिंह ), विशेष यजमान डुमरांव महाराज चन्द्र विजय प्रताप सिंह, युवराज शिवांग, विजय सिंह , रामाशीष, प्रकाश, रामानंद सिंह, राणा प्रताप सिंह, शेषनाथ पाठक, दयाशंकर सिंह, नागेंद्र पांडेय, विजय बहादुर सिंह ,गोपाल जी सिंह, दिनेश वर्मा, अरुण अग्निहोत्री, जितेंद्र सिंह ,राजेश गुप्त, धर्मेंद्र सिंह, गिरिजेश दत्त शुक्ल ,गिरीश नारायण चतुर्वेदी, विनय सिंह ने भगवान भोलेनाथ, भगवान श्रीराम को सपरिवार पूजन अर्चन किया।
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