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पांच बाइक और एक ऑटो से की गई 810 क्विंटल चावल की ढुलाई
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बलिया। जिले में धान खरीद में धांधली व घोटाले का खेल सालों से चल रहा है। क्रय केंद्रों से धान की ढुलाई में भी हर साल खेल करके करोडों का वारा न्यारा किया जाता है। वर्ष 11-12 के दौरान हुई ढुलाई की जांच में सामने आया है कि पांच मोटर साइकिल व एक ऑटो रिक्शा के नंबरों को ट्रक बताते हुए 810 क्विंटल चावल की ढुलाई की गई है। इस प्रकरण की जांच भी फूड सेल की ओर से की जा रही है। अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उधर, शिकायतकर्ता ने कार्रवाई को लेकर डीएम से गुहार लगाई है, जिस पर उन्होंने मामले को गंभीर मानते हुए डिप्टी आरएमओ से प्रकरण में कार्रवाई करने व उन्हें भी अवगत कराने को कहा है।
जिले में हर साल धान और गेहूं खरीद में धांधली की बात सामने आती है। शिकायतों पर जांच के नाम के नाम पर कोरम कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। विपणन विभाग की मानें तो वर्ष 2011-12 में राइस मिलरों पर करोड़ों के सीएमआर चावल का बकाया है। जबकि राइस मिलर इसमें धांधली की बात करते हुए कई बार शासन से लेकर हाईकोर्ट तक से गुहार लगा चुके हैं। इसी बीच जिले के अमदौर गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रत्नाकर पांडेय ने पांच अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री के साथ ही आयुक्त खाद्य एवं रसद आदि आला अफसरों को शिकायती पत्र भेजा।
पांडेय ने बताया कि धान खरीद वर्ष 2011-12 व 2012-13 में तत्कालीन डिप्टी आरएमओ, क्रय केंद्र प्रभारी, परिवहन ठेकेदार व केंद्र से जुड़े राइस मिलरों ने बड़े पैमाने पर धांधली कर घोटाले को अंजाम दिया है लेकिन निष्पक्ष जांच कराने के लिए दिए गए साक्ष्य पर जांच तत्काल कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
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पांडेय ने शिकायत में बताया कि धान खरीद व चावल घोटाला बिहार राज्य के चारा घोटाला से बड़ा हो सकता है, इसकी जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। शासन के निर्देश पर जिला विपणन अधिकारी ने मामले की जांच एसपी सरोज क्षेत्रीय विपणन अधिकारी बांसडीह से कराई। जांच में सामने आया कि पांडेय की ओर से की गई शिकायत व साक्ष्य सही मिले हैं। एसपी सरोज ने वाहनों की पुष्टि सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय से भी कराई। इसमें कुल पांच मोटर साइकिल व एक ऑटो रिक्शा को ट्रक बताकर इनसे कुल 810 क्विंटल चावल की ढुलाई दिखाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला विपणन अधिकारी ने तत्कालीन सुखपुरा क्रय केंद्र प्रभारी व वर्तमान में जिला विपणन अधिकारी वाराणसी अरुण कुमार त्रिपाठी को 22 जुलाई 2019 को पक्ष प्रस्तुत करने के लिए पत्र भेजा लेकिन उन्होंने पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद पूरी जांच रिपोर्ट के साथ जिला विपणन अधिकारी ने शासन को पत्र भेजकर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जिला विपणन अधिकारी कमलेश पांडेय ने बताया कि वर्ष 2011-12 व 12-13 में धान खरीद के दौरान ढुलाई आदि में धांधली के शिकायत की जांच शासन के निर्देश पर कराई गई। जांच में शिकायतें सही मिली हैं। जांच रिपोर्ट को अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद लखनऊ को भेज दिया गया है।
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जिले में हर साल धान और गेहूं खरीद में धांधली की बात सामने आती है। शिकायतों पर जांच के नाम के नाम पर कोरम कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। विपणन विभाग की मानें तो वर्ष 2011-12 में राइस मिलरों पर करोड़ों के सीएमआर चावल का बकाया है। जबकि राइस मिलर इसमें धांधली की बात करते हुए कई बार शासन से लेकर हाईकोर्ट तक से गुहार लगा चुके हैं। इसी बीच जिले के अमदौर गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रत्नाकर पांडेय ने पांच अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री के साथ ही आयुक्त खाद्य एवं रसद आदि आला अफसरों को शिकायती पत्र भेजा।
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पांडेय ने बताया कि धान खरीद वर्ष 2011-12 व 2012-13 में तत्कालीन डिप्टी आरएमओ, क्रय केंद्र प्रभारी, परिवहन ठेकेदार व केंद्र से जुड़े राइस मिलरों ने बड़े पैमाने पर धांधली कर घोटाले को अंजाम दिया है लेकिन निष्पक्ष जांच कराने के लिए दिए गए साक्ष्य पर जांच तत्काल कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
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पांडेय ने शिकायत में बताया कि धान खरीद व चावल घोटाला बिहार राज्य के चारा घोटाला से बड़ा हो सकता है, इसकी जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। शासन के निर्देश पर जिला विपणन अधिकारी ने मामले की जांच एसपी सरोज क्षेत्रीय विपणन अधिकारी बांसडीह से कराई। जांच में सामने आया कि पांडेय की ओर से की गई शिकायत व साक्ष्य सही मिले हैं। एसपी सरोज ने वाहनों की पुष्टि सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय से भी कराई। इसमें कुल पांच मोटर साइकिल व एक ऑटो रिक्शा को ट्रक बताकर इनसे कुल 810 क्विंटल चावल की ढुलाई दिखाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला विपणन अधिकारी ने तत्कालीन सुखपुरा क्रय केंद्र प्रभारी व वर्तमान में जिला विपणन अधिकारी वाराणसी अरुण कुमार त्रिपाठी को 22 जुलाई 2019 को पक्ष प्रस्तुत करने के लिए पत्र भेजा लेकिन उन्होंने पक्ष प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद पूरी जांच रिपोर्ट के साथ जिला विपणन अधिकारी ने शासन को पत्र भेजकर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जिला विपणन अधिकारी कमलेश पांडेय ने बताया कि वर्ष 2011-12 व 12-13 में धान खरीद के दौरान ढुलाई आदि में धांधली के शिकायत की जांच शासन के निर्देश पर कराई गई। जांच में शिकायतें सही मिली हैं। जांच रिपोर्ट को अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद लखनऊ को भेज दिया गया है।