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करोड़ों से बना सीवर लापता, बना सस्पेंस
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बलिया। शहर की सीवर परियोजना जल निगम विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की शिकार हो गई है। आलम यह है करोड़ों की लागत से बना सिटी जोन का सीवर लापता हो गया है। जल निगम जहां इसे नगर पालिका को हैंडओवर का जहां दावा कर रहा है, वहीं नगर पालिका बता रही कि उसे नहीं मिला है। दोनों विभागों से आरटीआई के तहत मिली जानकारी से इसका खुलासा हुआ है।
शहर में वर्ष 2006-07 में कुल 97.22 करोड़ की लागत से बनने वाले सीवर व एसटीपी विभागीय अधिकारियों की सुस्ती व भ्रष्टाचार के कारण 13 साल बाद पूरा नहीं हो सका है। सीवर निर्माण के लिए शहर को दो भागों में बांटा गया। सिटी जोन की लागत जहां 52.22 करोड़ थी, वहीं सिविल लाइन जोन के लिए कुल लागत 45 करोड़ निर्धारित थी। कुल 97.22 करोड़ में से 12 करोड़ की धनराशि एसटीपी निर्माण के लिए तय की गई थी। शासन से कार्ययोजना स्वीकृत होने के बाद बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया गया और विभाग ने इस कार्य को मेसर्स ज्योति बिल्ड टेक्नो प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली को ठेका दे दिया। वर्ष 2006-07 में ही सीवर निर्माण कार्य शुरू किया गया। वर्तमान में सिविल लाइन जोन में महीनों से सीवर पाईप के लिए शहर के एनसीसी तिराहा आदि जगहों पर सड़क की खुदाई कर छोड़ी गई है। बताया जाता है कि अधिकारियों की मिलीभगत से चैंबर प्लास्टर में करोड़ों का खेल किया गया है। उधर, विभाग का दावा है कि सिटी जोन का काम सालों पहले पूरा कर नगर पालिका को हैंडओवर किया जा चुका है। इसकी पुष्टि के लिए इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने जल निगम व नगर पालिका से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। जल निगम के अधिशासी अभियंता कायम हुसेन की ओर से 21 नवंबर 18 को यह बताया गया है कि सिटी जोन का काम वर्ष 2012 में पूरा कर फ्लो टेस्टिंग के बाद नगर पालिका को हस्तांतरित किया जा चुका है। इस योजना का मकसद नगरवासियों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन अभी तक किसी को इस योजना से लाभान्वित नहीं किया गया है। उधर, नगर पालिका परिषद बलिया की ओर से 14 जनवरी को इंटक जिलाध्यक्ष को सूचना भेजी गई। ईओ डीके विश्वकर्मा ने बताया है कि जल निगम की ओर से सीवर योजना से संबधित नजरी नक्शा, आगणन व टेक ओवर पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई है।
शहर में वर्ष 2006-07 में कुल 97.22 करोड़ की लागत से बनने वाले सीवर व एसटीपी विभागीय अधिकारियों की सुस्ती व भ्रष्टाचार के कारण 13 साल बाद पूरा नहीं हो सका है। सीवर निर्माण के लिए शहर को दो भागों में बांटा गया। सिटी जोन की लागत जहां 52.22 करोड़ थी, वहीं सिविल लाइन जोन के लिए कुल लागत 45 करोड़ निर्धारित थी। कुल 97.22 करोड़ में से 12 करोड़ की धनराशि एसटीपी निर्माण के लिए तय की गई थी। शासन से कार्ययोजना स्वीकृत होने के बाद बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया गया और विभाग ने इस कार्य को मेसर्स ज्योति बिल्ड टेक्नो प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली को ठेका दे दिया। वर्ष 2006-07 में ही सीवर निर्माण कार्य शुरू किया गया। वर्तमान में सिविल लाइन जोन में महीनों से सीवर पाईप के लिए शहर के एनसीसी तिराहा आदि जगहों पर सड़क की खुदाई कर छोड़ी गई है। बताया जाता है कि अधिकारियों की मिलीभगत से चैंबर प्लास्टर में करोड़ों का खेल किया गया है। उधर, विभाग का दावा है कि सिटी जोन का काम सालों पहले पूरा कर नगर पालिका को हैंडओवर किया जा चुका है। इसकी पुष्टि के लिए इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने जल निगम व नगर पालिका से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। जल निगम के अधिशासी अभियंता कायम हुसेन की ओर से 21 नवंबर 18 को यह बताया गया है कि सिटी जोन का काम वर्ष 2012 में पूरा कर फ्लो टेस्टिंग के बाद नगर पालिका को हस्तांतरित किया जा चुका है। इस योजना का मकसद नगरवासियों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन अभी तक किसी को इस योजना से लाभान्वित नहीं किया गया है। उधर, नगर पालिका परिषद बलिया की ओर से 14 जनवरी को इंटक जिलाध्यक्ष को सूचना भेजी गई। ईओ डीके विश्वकर्मा ने बताया है कि जल निगम की ओर से सीवर योजना से संबधित नजरी नक्शा, आगणन व टेक ओवर पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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