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एनआरसी में 638 बच्चों का इलाज कर भेजा गया घर
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कुपोषण से मुक्ति के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से चलाई जा रही सरकारी योजनाओं से लोग लाभांवित हो रहे हैं। विभाग की ओर से कुपोषण से बचाव के लिए समय-समय पर चलाए जा रहे कार्यक्रमों से लोगों में जगारुकता बढ़ रही है। जिससे जिले में कुुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। आंकड़ों पर गौर किया जाय तो अब तक एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में 640 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया। इसमें 638 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। जबकि वर्तमान में दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में अक्तूबर 2016 से स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र 10 बेड का है। यहां गंभीर कुपोषित बच्चों का नि:शुल्क इलाज किया जाता है। कुपोषित बच्चे व उसके तीमारदार को आहार व भोजन नि:शुल्क दिया जाता है। विभाग की ओर से जनपद में अब तक 316359 बच्चों का सर्वे किया गया है। इसमें 2923 तीव्र अति गंभीर और 12986 मध्यम अति गंभीर बच्चों को चिह्नित किया गया था। इसमें से अब तक एनआरसी में 640 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया। जिसमें से 638 बच्चों का इलाज किया जा चुका है।
जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पर मानक के अनुसार एक डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य स्टाफ तैनात है। यहां भर्ती मरीजों को डाक्टर की सलाह पर भोजन, फल मिलता है और थेरेपी की जाती है। जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में तैनात डा. ऋषभ सिंह ने बताया कि प्रतिदिन सुबह-शाम बच्चों के देखा जाता है और दवा से लेकर खाना तक उपलब्ध कराया जाता है। एनआरसी में भर्ती बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि यहां पर बच्चों के साथ हम लोगों को भी भोजन मिलता है।
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तीन में से दो का चल रहा इलाज
बलिया। जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में तैनात काउंसलर रेनू तिवारी ने बताया कि दिसंबर 2021 में 18 कुपोषित बच्चे भर्ती थे। जिन्हें इलाज कर घर भेजा गया। जबकि जनवरी 2022 में एक भर्ती किया गया। वहीं फरवरी में तीन भर्ती हुए। इसमें एक का इलाज कर घर भेजा गया। जबकि दो का अभी इलाज चल रहा है।
कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषाहार अन्य सुविधा दी जाती है। गंभीर होने पर उन्हें एनआरसी में भर्ती कर समुचित इलाज किया जाता है। वर्तमान में एनआरसी में दो बच्चे भर्ती है। कुपोषित होने के कई कारण है। इसलिए सरकार ने महिलाओं के साथ ही किशोरियों पर विशेष ध्यान दिया है। किशोरियों को फल, दूध, घी व स्वास्थ्य संबंधी जानकारी व दवा दी जाती है।
- कृष्ण मुरारी पांडेय, डीपीओ, बलिया
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जिला अस्पताल में अक्तूबर 2016 से स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र 10 बेड का है। यहां गंभीर कुपोषित बच्चों का नि:शुल्क इलाज किया जाता है। कुपोषित बच्चे व उसके तीमारदार को आहार व भोजन नि:शुल्क दिया जाता है। विभाग की ओर से जनपद में अब तक 316359 बच्चों का सर्वे किया गया है। इसमें 2923 तीव्र अति गंभीर और 12986 मध्यम अति गंभीर बच्चों को चिह्नित किया गया था। इसमें से अब तक एनआरसी में 640 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया। जिसमें से 638 बच्चों का इलाज किया जा चुका है।
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जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पर मानक के अनुसार एक डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य स्टाफ तैनात है। यहां भर्ती मरीजों को डाक्टर की सलाह पर भोजन, फल मिलता है और थेरेपी की जाती है। जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में तैनात डा. ऋषभ सिंह ने बताया कि प्रतिदिन सुबह-शाम बच्चों के देखा जाता है और दवा से लेकर खाना तक उपलब्ध कराया जाता है। एनआरसी में भर्ती बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि यहां पर बच्चों के साथ हम लोगों को भी भोजन मिलता है।
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तीन में से दो का चल रहा इलाज
बलिया। जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में तैनात काउंसलर रेनू तिवारी ने बताया कि दिसंबर 2021 में 18 कुपोषित बच्चे भर्ती थे। जिन्हें इलाज कर घर भेजा गया। जबकि जनवरी 2022 में एक भर्ती किया गया। वहीं फरवरी में तीन भर्ती हुए। इसमें एक का इलाज कर घर भेजा गया। जबकि दो का अभी इलाज चल रहा है।
कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषाहार अन्य सुविधा दी जाती है। गंभीर होने पर उन्हें एनआरसी में भर्ती कर समुचित इलाज किया जाता है। वर्तमान में एनआरसी में दो बच्चे भर्ती है। कुपोषित होने के कई कारण है। इसलिए सरकार ने महिलाओं के साथ ही किशोरियों पर विशेष ध्यान दिया है। किशोरियों को फल, दूध, घी व स्वास्थ्य संबंधी जानकारी व दवा दी जाती है।
- कृष्ण मुरारी पांडेय, डीपीओ, बलिया