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राम के जन्म लेते ही लगे जय श्री राम के नारे
Updated Fri, 06 Oct 2017 12:03 AM IST
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गड़वार। कस्बा के रामलीला मंच पर गड़वार के ऐतिहासिक रामलीला के क्रम में तीसरे दिन बुधवार की रात स्थानीय कलाकारों ने रामजन्म लीला का सजीव मंचन किया। इस दौरान महिलाओं ने सोहर गीत भी गाए तथा जयकारा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
लीला का शुभारंभ गड़वार थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने भगवान की राम की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर लीला का शुभारंभ किया। लीला के क्रम में जब रावण को अपने गुप्तचरों से ज्ञात होता है कि राजा दशरथ के पुत्र द्वारा किसी दशानन का वध होगा। यह बात जब लंकेश को उनके सेनापति बताते हैं तब वह अयोध्या सेनापति को भेजता है। सेनापति राजा दशरथ से यह कहता है कि या तो आप लंकेश का अधीनता स्वीकार करें या तो युद्ध स्वीकार करें। इस पर राजा दशरथ क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि अपने लंकेश को बता दो कि दशरथ किसी की अधीनता स्वीकार नहीं करते हैं। यदि उसके बाहुबल पर इतने ही घमंड है तो मैं लंका के मुख्य द्वार को अपने बाणों से बंद कर रहा हूं। यदि लंकेश मेरे द्वारा बंद किए द्वार खोल देता है तो मैं उसी दिन उसकी अधीनता स्वीकार कर लूंगा। उधर राजा दशथ लंका के मुख्य द्वार को बाण से भर देते हैं और रावण मुख्य द्वार को खोलने का बहुत प्रयास करता है। जेकिन उसे असफलता ही हाथ लगती है।लीला के दूसरी कड़ी में पृथ्वी प्रकट होती हैं और कहता है कि मेरे उपर पेड़, पौधे, पहाड़, मनुष्य, जंतु, जानवरों का बोझ होने के बावजूद भी मैं परेशान नहीं हूं। लेकिन आताताई राक्षसों के आतंक से मैं बिल्कुल पीड़ित हो चुकी हूं जो मेरे लिए असहनीय है। यह सोचकर पृथ्वी देवताओं के पास जाती हैं और अपनी व्यथा कहती हैं। आकाशवाणी होती है कि हे पृथ्वी तुम लोग चिंता मत करो। सभी देवता अपने-अपने धाम को चले जांए। मैं जल्द ही अयोध्या के राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या के गर्भ में उत्पन्न होकर राक्षसों का संहार करने के लिए जल्द ही प्रकट हूंगा। तत्पश्चात श्रीराम लक्ष्मण, भरत शत्रुघभन का जन्म होता है। जय श्री राम, जय श्री राम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। महिलाएं मंगलगीत गाने लगती है।
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लीला का शुभारंभ गड़वार थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने भगवान की राम की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर लीला का शुभारंभ किया। लीला के क्रम में जब रावण को अपने गुप्तचरों से ज्ञात होता है कि राजा दशरथ के पुत्र द्वारा किसी दशानन का वध होगा। यह बात जब लंकेश को उनके सेनापति बताते हैं तब वह अयोध्या सेनापति को भेजता है। सेनापति राजा दशरथ से यह कहता है कि या तो आप लंकेश का अधीनता स्वीकार करें या तो युद्ध स्वीकार करें। इस पर राजा दशरथ क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि अपने लंकेश को बता दो कि दशरथ किसी की अधीनता स्वीकार नहीं करते हैं। यदि उसके बाहुबल पर इतने ही घमंड है तो मैं लंका के मुख्य द्वार को अपने बाणों से बंद कर रहा हूं। यदि लंकेश मेरे द्वारा बंद किए द्वार खोल देता है तो मैं उसी दिन उसकी अधीनता स्वीकार कर लूंगा। उधर राजा दशथ लंका के मुख्य द्वार को बाण से भर देते हैं और रावण मुख्य द्वार को खोलने का बहुत प्रयास करता है। जेकिन उसे असफलता ही हाथ लगती है।लीला के दूसरी कड़ी में पृथ्वी प्रकट होती हैं और कहता है कि मेरे उपर पेड़, पौधे, पहाड़, मनुष्य, जंतु, जानवरों का बोझ होने के बावजूद भी मैं परेशान नहीं हूं। लेकिन आताताई राक्षसों के आतंक से मैं बिल्कुल पीड़ित हो चुकी हूं जो मेरे लिए असहनीय है। यह सोचकर पृथ्वी देवताओं के पास जाती हैं और अपनी व्यथा कहती हैं। आकाशवाणी होती है कि हे पृथ्वी तुम लोग चिंता मत करो। सभी देवता अपने-अपने धाम को चले जांए। मैं जल्द ही अयोध्या के राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या के गर्भ में उत्पन्न होकर राक्षसों का संहार करने के लिए जल्द ही प्रकट हूंगा। तत्पश्चात श्रीराम लक्ष्मण, भरत शत्रुघभन का जन्म होता है। जय श्री राम, जय श्री राम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। महिलाएं मंगलगीत गाने लगती है।
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