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सिर्फ एक बार ही लिया जाए प्रवेश शुल्क
Updated Mon, 11 Dec 2017 10:21 PM IST
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बलिया। निजी स्कूलों की मनमानी व फीस वसूली पर योगी सरकार कड़े प्रावधान लाने जा रही है। कोई भी स्कूल अब एक बार में पूरे साल की फीस नही ले सकेंगे। यही नहीं सत्र के बीच में फीस भी नही बढ़ा सकेंगे। प्रदेश सरकार ने इस बाबत मसौदा जारी किया है। हालांकि स्कूल संचालक सरकार के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
निजी स्कूलों पर मनमानी तरीके से फीस लेने और हर साल फीस को बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं। इसको लेकर हर साल जिले में भी हो हंगामा होता रहता है। निजी स्कूलों पर शिक्षा से अधिक व्यवसायीकरण का आरोप भी लगता रहा है। इसको देखते हुए शासन ने अब निजी स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। सरकार बनाए गए मसौदे पर 22 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी है और इसके बाद ही इसे लागू किया जाएगा। लेकिन इसको लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरु हो गया है। मसौदे के तहत निजी स्कूल एक बार दाखिला होने के बाद हर साल बच्चों की फीस जहां नहीं बढ़ा सकेंगे वहीं पूरे साल की एकमुश्त फीस भी नहीं ले सकेंगे। इसके अलावा स्कूलों की ओर से अलग-अलग तरीके से होने वाली कमाई पर भी सरकार की नजर होगी और उसे भी स्कूल का आय माना जाएगा।
शहर के आवास विकास कालोनी निवासी दिनेश सिंह ने बताया कि केवल कानून बन जाने भर से कोई फायदा नहीं होने वाला है, लेकिन यह मसौदा सराहनीय है। कहा कि कानून बनाने से पहले उसका पालन कराने की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
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जेपी नगर निवासी रिंकू सिंह ने कहा कि सरकार का यह कदम अच्छा है और इससे गरीब व मध्यम वर्ग के लोग भी अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा सकेंगे। लेकिन इसे लागू कराना अहम होगा। तिखमपुर निवासी उमेश प्रताप ने कहा कि सरकार का यह मसौदा सही है। निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगना जरुरी है। रामपुर निवासी रत्नेश उपाध्याय ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी से लोग तंग आ चुके हैं और ऐसे में सरकार की यह पहल सराहनीय है। उधर, एक निजी स्कूल के संचालक हर्ष श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार का यह मसौदा सही है और इससे स्कूलों का संचालन प्रभावित नहीं होगा। कहा कि कुछ स्कूलों की मनमानी के कारण सभी बदनाम हो जाते हैं।
निजी स्कूलों पर मनमानी तरीके से फीस लेने और हर साल फीस को बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं। इसको लेकर हर साल जिले में भी हो हंगामा होता रहता है। निजी स्कूलों पर शिक्षा से अधिक व्यवसायीकरण का आरोप भी लगता रहा है। इसको देखते हुए शासन ने अब निजी स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। सरकार बनाए गए मसौदे पर 22 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी है और इसके बाद ही इसे लागू किया जाएगा। लेकिन इसको लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरु हो गया है। मसौदे के तहत निजी स्कूल एक बार दाखिला होने के बाद हर साल बच्चों की फीस जहां नहीं बढ़ा सकेंगे वहीं पूरे साल की एकमुश्त फीस भी नहीं ले सकेंगे। इसके अलावा स्कूलों की ओर से अलग-अलग तरीके से होने वाली कमाई पर भी सरकार की नजर होगी और उसे भी स्कूल का आय माना जाएगा।
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शहर के आवास विकास कालोनी निवासी दिनेश सिंह ने बताया कि केवल कानून बन जाने भर से कोई फायदा नहीं होने वाला है, लेकिन यह मसौदा सराहनीय है। कहा कि कानून बनाने से पहले उसका पालन कराने की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
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जेपी नगर निवासी रिंकू सिंह ने कहा कि सरकार का यह कदम अच्छा है और इससे गरीब व मध्यम वर्ग के लोग भी अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा सकेंगे। लेकिन इसे लागू कराना अहम होगा। तिखमपुर निवासी उमेश प्रताप ने कहा कि सरकार का यह मसौदा सही है। निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगना जरुरी है। रामपुर निवासी रत्नेश उपाध्याय ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी से लोग तंग आ चुके हैं और ऐसे में सरकार की यह पहल सराहनीय है। उधर, एक निजी स्कूल के संचालक हर्ष श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार का यह मसौदा सही है और इससे स्कूलों का संचालन प्रभावित नहीं होगा। कहा कि कुछ स्कूलों की मनमानी के कारण सभी बदनाम हो जाते हैं।