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कटान से गंगा में बहा 400 मीटर रिवेटमेंट कार्य

Sun, 30 Oct 2022 12:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 12:42 AM IST
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400 meter revetment work shed in the Ganges from the cut
गंगा नदी के कटान में धराशायी हुआ कन्हई ब्रह्मा बाबा का चबूतरा का आधा भाग। - फोटो : BALLIA
गंगा नदी का जलस्तर नीचे खिसकते ही शुक्रवार की देर रात में अचानक कटान शुरू हो गया। इससे गोपालपुर गांव स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने कन्हई ब्रम्ह बाबा स्थान पर नीम और बरगद के विशाल पेड़ गंगा की गोद में समाहित हो गये। वहीं कटान का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा, जिससे दहशत का माहौल है। माना जा रहा है कि गंगा की लहरें किसी भी समय कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान को अपने चपेटे में ले सकतीं हैं।
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कटान की सूचना मिलते ही बाढ़ विभाग के ठेकेदारों ने प्लास्टिक की बोरी में मिट्टी भरकर गंगा नदी के किनारे डालने का काम शुरू कर दिया। इसके पहले हरे पेड़ों की टहनियां एवं बम्बूक्रेट विधि से कटान रोकने का प्रयास भी किया गया। हालांकि कुछ खास सफलता नहीं मिली। इसके बाद बाढ़ विभाग तीन जेसीबी लगाकर मिट्टी को समतल कराने में जुट गया। इस कटान में पांच माह पहले कराए गए रिवेटमेंट कार्य का 400 मीटर हिस्सा गंगा की धारा में विलीन हो चुका है। इसको लेकर गोपालपुर गांव के लोग जान माल की सुरक्षा को लेकर दहशत में हैं।
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बाढ़ विभाग ने पिछले वर्ष लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बम्बूक्रेट विधि से कटान रोकने का कार्य कराया था। उसके बाद कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान से दक्षिण की ओर इसी वर्ष मई महीने में 10 करोड़ रुपये की लागत से रिवेटमेंट कार्य भी कराया गया था। इस कार्य का 400 मीटर हिस्सा शनिवार को गंगा में बह गया।
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कटान पीड़ित पंकज तिवारी, सुमित उपाध्याय, नागेन्द्र तिवारी, शिवजी तिवारी, उदय सिंह, पूर्व प्रधान मनोज यादव, डा. राजेन्द्र मिश्र आदि का कहना है कि कभी भी रिवेटमेंट एवं पार्कोपाईन विधि का कार्य गंगा के कटान में विलीन हो सकता है। बाढ़ विभाग फ्लड फाइटिंग पर उतर आया है।
काश, बाढ़ विभाग ने सुनी होती ग्रामीणों की बात
दया छपरा। काश, बाढ़ विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने ग्रामीणों की बात सुनी होती तो यह दिन देखने को नहीं मिलता। कन्हई ब्रह्म बाबा का स्थान बच जाता। मई में जब कटान रोकने का कार्य हो रहा था उसी समय ग्रामीणों ने मांग किया कि कटिंग से लेकर उदई छपरा बस्ती तक भी ठोकर व पत्थर बिछाकर कटान को रोका जाए। पर बाढ़ विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दुबे छपरा कटिंग से उदई छपरा तक पार्कों पाइन से कटान रोकने का प्रयास किया। लेकिन कार्तिक के महीने में शुक्रवार की रात्रि में गंगा की कटान ने इसे ध्वस्त कर दिया। गोपालपुर निवासी प्रभाकर तिवारी और प्रभुनाथ गुप्ता ने बताया कि बाढ़ के समय तो कटान रुका था पर इस कार्तिक के महीने में बाढ़ विभाग की लापरवाही से फिर कटान शुरू हो गया।
आस्था व विश्वास का प्रतीक है श्री कन्हई ब्रह्म स्थान
दया छपरा। बैरिया तहसील अंतर्गत गोपालपुर, दुबेछपरा, उदई छ्परा सहित दर्जनों गांव के लोगों की आस्था के प्रतीक श्री कन्हई ब्रह्म बाबा का स्थान भी अब कटान की जद में आ गया है। बीती रात घटते जलस्तर के साथ ही कटान ने ऐसा तांडव मचाया कि लगभग 400 मीटर के दायरे में जमीन खिसककर गंगा में समाहित हो गया।
स्नान करने वालों को घाट पर जाने से रोका
दया छपरा। कार्तिक महीना होने से गोपालपुर कन्हाई ब्रह्म बाबा स्थान पर ही क्षेत्र के दया छपरा, दलपतपुर, चकिया, नवका गांव आदि गांवों के पुरुष व महिलाएं गंगा स्नान के लिए प्रतिदिन बजे भोर में पहुंचते हैं। शुक्रवार की रात्रि गंगा से कटान शुरू हुआ। शनिवार की भोर में भी महिलाएं व पुरुष गंगा स्नान के लिए गोपालपुर श्री कन्हई ब्रह्म स्थान पर पहुंचे तो वहां चल रहे अखंड रामचरितमानस पाठ करने वालों ने उन्हें रोका क्योंकि घाट पर जाने से कटान की चपेट में आने का खतरा था।

गोपालपुर गांव में गंगा नदी से कटान की सूचना मिलते ही बचाव का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। आबादी पूरी तरह से सुरक्षित है। आबादी को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए जेई को कटान स्थल पर निगरानी रखने का आदेश दिया गया है। - संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग, बलिया
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