फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   40 feet high swing in marshy land, suffering on life

दलदली भूमि में 40 फीट ऊंचा झूला, जान पर आफत

Wed, 13 Nov 2019 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2019 11:09 PM IST
विज्ञापन
40 feet high swing in marshy land, suffering on life
ददरी मेले में बंद पड़ा चर्खी। - फोटो : BALLIA
बलिया। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के बाद सोमवार से शुरू ददरी मेला सजधज कर तैयार है। लेकिन मेले में आए झूले, चरखी के संचालन पर अभी तक ग्रहण लगा हुआ है। कारण है मेला क्षेत्र की जमीन का दलदली होना। जमीन दलदली होने के कारण नगर पालिका प्रशासन झूला के संचालन की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। उसने गेंद जिला प्रशासन के पाले में डाल दी है। नगर पालिका का कहना है कि जमीन दलदली है, इसलिए उस लगे झूले के फाउंडेशन के मजबूत होने पर संदेह है।
विज्ञापन

अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि विगत वर्षों में घटित घटनाओं के मद्देनजर व दलदली जमीन को देखते हुए उनकी ओर से चरखी के संचालन पर रोक लगाई गई है। दलदली जमीन का हवाला देते हुए जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। अब जिला प्रशासन की परमिशन मिलने के बाद ही चरखी व झूले का संचालन संभव है। गौरतलव हो कि मेला में चरखी व झूले मेलार्थियों के लिए सबसे अधिक मनोरंजन की चीज है। ऐसे में इसका संचालन न होने पर मेला पर इसका साइड इफेक्ट पड़ सकता है, क्योंकि युवा वर्ग चरखी व झूले का आनंद लेने के लिए ही मेला आते हैं। बीते माह आई भयानक बाढ़ के बाद पानी तो निकल गया, लेकिन जमीन काफी दलदली हो गई है। इस वजह से नगर पालिका ने इनके संचालन से अपना हाथ पीछे खींच लिया है। अब जिला प्रशासन द्वारा जमीन की जांच होने के बाद ही झूला का संचालन हो पाएगा या यह स्पष्ट हो पाएगा।
विज्ञापन

ददरी के चलते छोड़ दिए दूसरा मेला
बलिया। मेले में दो बड़े झूले, एक ड्रैगन, ब्रेक डांस, ट्रेन आदि कुल छह झूले आए हैं। लगातार दूसरे दिन भी बंद होने के कारण झूला संचालकों का कहना है कि हम मेला में आकर फंस गए हैं। दूसरे दिन भी लेबरों को बैठाकर पैसा देना पड़ा। मेला के चलते हम लोग दूसरा मेला छोड़ दिए हैं। ऐसे में यदि परमिशन नहीं मिली तो हमारा काफी नुकसान हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

पांच साल में हो चुकी तीन की मौत
बलिया। दलदल जमीन के मद्देनजर चरखी के संचालन पर रोक सही है या गलत यह तो प्रशासन जाने या नगर पालिका। हांलाकि हकीकत ये है कि पिछले पांच सालों में ददरी मेला में झूला से हुए अलग-अलग हादसों में अब तक तीन लोग जान गंवा चुक हैं। वर्ष 2014 में दुबहर क्षेत्र की नेहा यादव की झूले में गिरने से मौत हो गई थी। 2016 में नरहीं के कंचन खरवार की भी झूले से गिरने से मौत हो गई थी। बीते वर्ष एक युवती सेल्फी लेते समय अंसतुलित होकर झूले से गिर गई थी और उसकी मौत हो गई थी।
नगर पालिका अध्यक्ष बलिया अजय कुमार का कहना है कि दलदल जमीन को देखते हुए हम झूले और चरखी का रिस्क हम नहीं ले सकते। मनोरंजन से ज्यादा हमारे लिए जान की कीमत है। मेरे द्वारा जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। जिला प्रशासन जैसा निर्णय लेंगा किया जाएगा।

आर के प्रसाद अवर अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड का कहना है कि दलदली जमीन में झूले का फाउंडेशन यदि मजबूती से बनाया गया हो तो उसके संचालन में कोई खतरा नहीं है। फाउंडेशन आदि की जांच के बाद अनुमति दी जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed