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चित्रकूट के भाजपा विधायक पहुंचे चितू पांडेय के पैतृक गांव
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चित्तू पांडेय की 124वीं जयंती
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बलिया। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले चित्तू पांडेय की 124वीं जयंती उनके पैतृकगांव रट्टचक वायन में शुक्रवार को मनाई गई। इस दौरान वक्ताओें ने चित्तू पांडेय के बलिदान को देश के लिए अनुकरणीय बताया।
चित्रकूट सदर के भाजपा विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने वीर चित्तू पांडेय के के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बलिया के चित्तू पांडेय नहीं बल्कि चित्तू पांडेय से बलिया है। ब्रिटिश हुकूमत के दांत खट्टे कर देने वाले चित्तू पांडेय का व्यक्तित्व एक त्यागी पुरुष का रहा है। इस दौरान विधायक को चित्तू पांडेय के वर्तमान पीढ़ी उनके प्रपौत्र जैनेंद्र पांडेय मिंटू, हरिश पांडेय ने आवभगत किया। इस मौके पर कमलेश्वर पांडेय, राजेंद्र पांडेय, सुभाष पांडेय, चुनमुन पांडेय आदि लोग उपस्थित रहे।
उधर, स्मारक समिति के लोगों एवं संभ्रांत व्यक्तियों ने चित्तू पांडेय चौराहा स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही साथ शेर-ए-बलिया चित्तू पांडेय अमर रहे और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ बागी बलिया के वीर सपूत को नमन किया। इस अवसर पर कहा गया कि आजादी के लिए शेर-ए-बलिया चित्तू पांडेय का बलिदान बलिया ही नहीं पूरे देश के लिए अनुकरणीय है। मुख्य वक्ता डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय ने चित्तू पांडेय के योगदान इतिहास में काफी अहम बताया। इस मौके पर अशोक पांडेय, शशिकांत चतुर्वेदी, रामकिंकड़ सिंह, संतोष दीक्षित, रूपशे चौबे, आनंद विक्रम सिंह आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्ष करूणानिधि तिवारी तथा संचालन ज्ञानेंद्र पांडेय मिंटू ने किया।
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उल्लेखनीय है कि 19 अगस्त 1942 को जेल का फाटक तोड़ कर आजादी के दीवानों को मुक्त कर दिया गया था। जिले के सभी थानों पर आंदोलनकारियों का कब्जा हो गया। उस हालत में चित्तू पांडेय अंगूठे का निशान लगाकर गुलाम देश में आजाद बलिया के प्रथम कलेक्टर बने। वह 13 दिन तक कलेक्टर बने रहे। चित्तू पांडेय का जन्म 10 मई 1895 को रट्टू चक (सागरपाली) में हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख देने वाले चित्तू पांडेय को शेर ए बलिया कह कर पुकारा जाने लगा।
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चित्रकूट सदर के भाजपा विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने वीर चित्तू पांडेय के के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बलिया के चित्तू पांडेय नहीं बल्कि चित्तू पांडेय से बलिया है। ब्रिटिश हुकूमत के दांत खट्टे कर देने वाले चित्तू पांडेय का व्यक्तित्व एक त्यागी पुरुष का रहा है। इस दौरान विधायक को चित्तू पांडेय के वर्तमान पीढ़ी उनके प्रपौत्र जैनेंद्र पांडेय मिंटू, हरिश पांडेय ने आवभगत किया। इस मौके पर कमलेश्वर पांडेय, राजेंद्र पांडेय, सुभाष पांडेय, चुनमुन पांडेय आदि लोग उपस्थित रहे।
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उधर, स्मारक समिति के लोगों एवं संभ्रांत व्यक्तियों ने चित्तू पांडेय चौराहा स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही साथ शेर-ए-बलिया चित्तू पांडेय अमर रहे और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ बागी बलिया के वीर सपूत को नमन किया। इस अवसर पर कहा गया कि आजादी के लिए शेर-ए-बलिया चित्तू पांडेय का बलिदान बलिया ही नहीं पूरे देश के लिए अनुकरणीय है। मुख्य वक्ता डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय ने चित्तू पांडेय के योगदान इतिहास में काफी अहम बताया। इस मौके पर अशोक पांडेय, शशिकांत चतुर्वेदी, रामकिंकड़ सिंह, संतोष दीक्षित, रूपशे चौबे, आनंद विक्रम सिंह आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्ष करूणानिधि तिवारी तथा संचालन ज्ञानेंद्र पांडेय मिंटू ने किया।
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उल्लेखनीय है कि 19 अगस्त 1942 को जेल का फाटक तोड़ कर आजादी के दीवानों को मुक्त कर दिया गया था। जिले के सभी थानों पर आंदोलनकारियों का कब्जा हो गया। उस हालत में चित्तू पांडेय अंगूठे का निशान लगाकर गुलाम देश में आजाद बलिया के प्रथम कलेक्टर बने। वह 13 दिन तक कलेक्टर बने रहे। चित्तू पांडेय का जन्म 10 मई 1895 को रट्टू चक (सागरपाली) में हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख देने वाले चित्तू पांडेय को शेर ए बलिया कह कर पुकारा जाने लगा।