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संस्कृत स्कूल के दो शिक्षिकाओं को 3.31 करोड़ का कूटरचित दस्तावेजों पर किया गया भुगतान
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बलिया। फर्जी कागजातों के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एक संस्कृत विद्यालय की दो शिक्षिकाओं को तीन करोड़ 31 लाख 52 हजार 461 रुपये का भुगतान कर देने का मामला सामने आया है। संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ एपी वर्मा ने 14 अक्तूबर को प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र भेजा है। शासन ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है। इसे लेकर विभाग में हड़कंप मचा है।
नगर के टैगोर नगर निवासी रामशरण सिंह ने तीन सितंबर 2020 को संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र देकर श्री अमरनाथ संस्कृत उमावि खेजुरी में बिना विभागीय अनुमन्यता के ही शिक्षकों, कर्मचारियों के वेतन खाते से करोड़ों रुपये के अवशेष का भुगतान करने की शिकायत की। जेडी ने डीआईओएस से प्रकरण से संबंधित दस्तावेज मंगा कर जांच की। जिसमें धनावंटन आदेश की प्रतियां कूटरचित एवं फर्जी मिलीं। पाया गया कि जिविनि कार्यालय द्वारा श्री अमरनाथ संस्कृत उमावि खेजुरी की शिक्षिका किरन मिश्रा और भारती जायसवाल के अवशेष वेतन भुगतान का मांगपत्र प्रेषित किया गया। नोट शीट्स पर वित्त एवं लेखाधिकारी शिवकुमार दुबे और डीआईओएस भास्कर मिश्र ने सहमति दी है। स्पष्ट है कि जिविनि की मांग पर ही वित्त नियंत्रक माध्यमिक प्रयागराज द्वारा 20 सितंबर 19 को 1,98,63,476 और वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा की मांग पर 27 दिसंबर 2019 को 1,32,88,985 रुपये का धनावंटन किया गया है। इस धन के दुरुपयोग में डीआईओएस भास्कर मिश्र, वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा बलिया शिवकुमार दुबे, पटल सहायक श्याम नारायण शुक्ला के साथ विद्यालय प्रबंधक, संबंधित शिक्षिका तथा वित्त नियंत्रक शिक्षा निदेशालय प्रयागराज कार्यालय की भी संलिप्तता मिलने पर जेडी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। उधर, जेडी की सिफारिश पर शासन ने भी जांच शुरू कर दी है। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है।
संस्कृत स्कूल की दो शिक्षिकाओं को करोड़ों के अवशेष भुगतान की जांच की गई। इसमें कई लोग दोषी मिले हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है और जांच भी शुरू हो चुकी है। - अनारपति वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़
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नगर के टैगोर नगर निवासी रामशरण सिंह ने तीन सितंबर 2020 को संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा को पत्र देकर श्री अमरनाथ संस्कृत उमावि खेजुरी में बिना विभागीय अनुमन्यता के ही शिक्षकों, कर्मचारियों के वेतन खाते से करोड़ों रुपये के अवशेष का भुगतान करने की शिकायत की। जेडी ने डीआईओएस से प्रकरण से संबंधित दस्तावेज मंगा कर जांच की। जिसमें धनावंटन आदेश की प्रतियां कूटरचित एवं फर्जी मिलीं। पाया गया कि जिविनि कार्यालय द्वारा श्री अमरनाथ संस्कृत उमावि खेजुरी की शिक्षिका किरन मिश्रा और भारती जायसवाल के अवशेष वेतन भुगतान का मांगपत्र प्रेषित किया गया। नोट शीट्स पर वित्त एवं लेखाधिकारी शिवकुमार दुबे और डीआईओएस भास्कर मिश्र ने सहमति दी है। स्पष्ट है कि जिविनि की मांग पर ही वित्त नियंत्रक माध्यमिक प्रयागराज द्वारा 20 सितंबर 19 को 1,98,63,476 और वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा की मांग पर 27 दिसंबर 2019 को 1,32,88,985 रुपये का धनावंटन किया गया है। इस धन के दुरुपयोग में डीआईओएस भास्कर मिश्र, वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा बलिया शिवकुमार दुबे, पटल सहायक श्याम नारायण शुक्ला के साथ विद्यालय प्रबंधक, संबंधित शिक्षिका तथा वित्त नियंत्रक शिक्षा निदेशालय प्रयागराज कार्यालय की भी संलिप्तता मिलने पर जेडी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। उधर, जेडी की सिफारिश पर शासन ने भी जांच शुरू कर दी है। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है।
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संस्कृत स्कूल की दो शिक्षिकाओं को करोड़ों के अवशेष भुगतान की जांच की गई। इसमें कई लोग दोषी मिले हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है और जांच भी शुरू हो चुकी है। - अनारपति वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़
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