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अहिल्या का प्रभु श्रीराम ने किया उद्घार
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:29 AM IST
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बलिया। नगर के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में चल रही रामलीला मंचन में रविवार की रात कलाकारों ने अहिल्या उद्धार, गंगा पूजा व नगर दर्शन का भावपूर्ण मंचन किया। इसके पूर्व दर्शकों ने प्रभु श्रीराम, माता सीता सहित चारों भाइयों की आरती की गई।
श्री शुभ नगर रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगर के रामलीला मैदान में आयोजित लीला मंचन में महर्षि विश्वामित्र को राजा जनक द्वारा जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर में आने का बुलावा प्राप्त होता है। जिसके बाद विश्वामित्र जनकपुर जाने को तैयार होते है। श्रीराम-लक्ष्मण को भी जनकपुर जाने की लालसा उत्पन्न होती है। यह देख विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण को साथ लेकर जनकपुर के लिए प्रस्थान करते है।
जनकपुर जाते वक्त रास्ते में एक शिलाखंड देखते है। श्रीराम व लक्ष्मण के मन में शिलाखंड के बारे जानने की जिज्ञासा होती है। विश्वामित्र बताते है कि इंद्रदेव के कारण गौतम ऋषि श्राप से उनकी पत्नी शिलाखंड बन गई। जिसे पैर से छूकर श्रीराम अहिल्या को गौतम ऋषि के श्राप से मुक्त कर उद्धार करते है। इसके बाद गंगा मइया की पूजन-अर्चन कर विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण के साथ जनकपुरी पहुंचते है, जहां जनकपुर नगर घूमने की श्रीराम व लक्ष्मण की इच्छा होती है। दोनों भाइयों के आग्रह पर विश्वामित्र नगर का दर्शन कराते है। उधर, विश्वामित्र दोनों भाइयों के साथ राजा जनक के दरबार में पहुंचते है, जहां राजा जनक ने उनका आदर-सत्कार किया। इस मौके पर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक केसरी, जितेंद्र वर्मा, संतोष सोनी, मानिक चंद्र वर्मा, किशुन चौबे, मान सिंह, विजय आदि रहे।
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श्री शुभ नगर रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगर के रामलीला मैदान में आयोजित लीला मंचन में महर्षि विश्वामित्र को राजा जनक द्वारा जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर में आने का बुलावा प्राप्त होता है। जिसके बाद विश्वामित्र जनकपुर जाने को तैयार होते है। श्रीराम-लक्ष्मण को भी जनकपुर जाने की लालसा उत्पन्न होती है। यह देख विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण को साथ लेकर जनकपुर के लिए प्रस्थान करते है।
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जनकपुर जाते वक्त रास्ते में एक शिलाखंड देखते है। श्रीराम व लक्ष्मण के मन में शिलाखंड के बारे जानने की जिज्ञासा होती है। विश्वामित्र बताते है कि इंद्रदेव के कारण गौतम ऋषि श्राप से उनकी पत्नी शिलाखंड बन गई। जिसे पैर से छूकर श्रीराम अहिल्या को गौतम ऋषि के श्राप से मुक्त कर उद्धार करते है। इसके बाद गंगा मइया की पूजन-अर्चन कर विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण के साथ जनकपुरी पहुंचते है, जहां जनकपुर नगर घूमने की श्रीराम व लक्ष्मण की इच्छा होती है। दोनों भाइयों के आग्रह पर विश्वामित्र नगर का दर्शन कराते है। उधर, विश्वामित्र दोनों भाइयों के साथ राजा जनक के दरबार में पहुंचते है, जहां राजा जनक ने उनका आदर-सत्कार किया। इस मौके पर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक केसरी, जितेंद्र वर्मा, संतोष सोनी, मानिक चंद्र वर्मा, किशुन चौबे, मान सिंह, विजय आदि रहे।
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