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चिकित्सकों के नियमित न आने से पशुपालकों में रोष
Updated Mon, 11 Dec 2017 10:13 PM IST
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खेजुरी (बलिया)। कस्बे में पशु चिकित्सालय रखरखाव, भवन के अभाव तथा नियमित कर्मचारियों के न रहने के कारण पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गया है। करीब दस लाख रुपए की लागत से बना पशु चिकित्सालय खेजुरी में एक डॉक्टर एक कंपाउंडर की नियुक्ति है। जबकि दो कंपाउंडर का रहना अति आवश्यक है इसके अलावा दो चपरासी का भी रहना जरूरी है। इस समय एक चिकित्सक तथा उनका एक कंपाउंडर अस्पताल पर नियुक्त है। जबकि पहले से नियुक्त चपरासी सेवा मुक्त हो चुका है। उसके स्थान पर किसी भी दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की गई है, सुबह नौ बजे से चार बजे तक चलने वाले अस्पताल में दस बजे के बाद चिकित्साकर्मियों की उपस्थिति होती है और दो बजे के आसपास अस्पताल बंद हो जाता है। इस संबंध में पशुपालक लल्लन राजभर ,टुनटुन राजभर और बीरबल चौहान का कहना है, कि समय से चिकित्सक नहीं आते और कभी-कभी ऐसा होता है कि कई-कई दिन तक लोग नहीं आते हैं । जिससे पशुओं की बीमारी की हालत में हम लोगों को प्राइवेट इलाज करने वाले अप्रशिक्षित डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। इस संबंध में चिकित्सा कर्मियों से बात की गई तो बताया कि अस्पताल में रहने के लिए बनने वाला भवन आधा अधूरा है। जिसमें कोई भी व्यक्ति रह नहीं सकता इसलिए यहां स्थाई रूप से निवास नहीं किया जा सकता। दवाओं के स्टाक की भारी मात्रा में कमी रहती है, जिसके कारण पशुओं का इलाज दवाओं के अभाव में कम हो पाता है। लेकिन जितनी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं उसका भरपूर प्रयोग कर पशुओं की सेवा की जाती है। प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में पशुओं की चिकित्सा सेवा बहाल करने के लिए शासन के स्तर पर प्रार्थना पत्र भेजा गया है।
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