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वन विभाग करा रहा हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
Updated Sat, 01 Dec 2018 11:31 PM IST
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बलिया/भरौली। राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक दोनों किनारे लगे पुराने हरे पेड़ों को वन निगम की ओर से मशीनों से अंधाधुंध कटवाया जा रहा है। वन निगम के कर्मियों का दावा है कि पुराने जर्जर पेड़ों को काटने का निर्देश डीएफओ की ओर से दिया गया है। मौके पर सूखे और जर्जर पेड़ों को छोड़कर हरे और मोटे पेड़ों को काटा जा रहा है। एनएच 31 पर मात्र 22 किमी में ही 617 पेड़ काटे जाएंगे, जिसकी बाजार में कीमत 50 लाख से भी अधिक होगी।
एक ओर जहां पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए शासन की ओर से कवायद की जा रही है, वहीं जिले में वन विभाग की अनुमति से अंधाधुंध हरे पेड़ों को काटने का काम किया जा रहा है। पिछले कई दिनों से एनएच 31 पर जिले में सीमावर्ती गांव कोटवां नारायनपुर से सड़क किनारे स्थित आम, शीशम, नीम, जामुन, पीपल, बरगद के हरे पेड़ों को मशीन से काटने का काम जोरों पर किया जा रहा है। मौके पर मौजूद वन निगम के लागिंग सहायक की माने तो पुराने पेड़ों को काटने की अनुमति डीएफओ की ओर से दी गई है। उन्होंने बताया कि पुराने और जर्जर पेड़ों के चलते आए दिन सड़कों पर हो रहे हादसे को देखते हुए डीएफओ की ओर से अनुमति दी गई है। बताया कि कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक 22 किलोमीटर में कुल 617 पेड़ों को कटवाने का निर्देश मिला है। इसके तहत, कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक बाएं पटरी पर कुल 391 और चितबड़ागांव से कोटवां नारायनपुर तक बाएं पटरी पर कुल 291 पेड़ काटे जाएंगे। पेड़ों को मशीन से काटने के बाद तुरंत मशीन से ही छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं और इसके बाद ट्रैक्टर ट्राली से रसड़ा स्थित वन निगम को भेज दिया जा रहा है। उधर, इन पेड़ों को काटे जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी होने लगी हैं। लोगों की माने तो वन निगम के कर्मचारी मोटे और कीमती लकड़ियों के पेड़ों को तो काट रहा है लेकिन जर्जर और सूखे पेड़ों को छोड़ दे रहा है। लोग काटे जाने वाले कुल पेड़ों की लकड़ियों की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक आंक रहे हैं। लोगों का मानना है कि जड़ों से मजबूत मोटे पेड़ों से कहीं खतरा नहीं हैं, अगर टहनियां सड़कों तक आई हैं तो उसे काटा जाना चाहिए था।
लाखों के पेड़ों के मामले में गोलमाल की आशंका
बलिया। वन विभाग की ओर से हर लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है लेकिन यह पौधे अधिकांशत: कागजों पर लगाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जाता है। एनएच किनारे जिस तरह का पेड़ काटा जा रहा है, वैसा पेड़ वन विभाग की ओर से कहीं भी तैयार नहीं किया जा सका है। सूत्रों की मानें तो हादसे के नाम पर लाखों के पेड़ों को काट कर वन विभाग और वन निगम की ओर से बड़े पैमाने पर गोलमाल की जाएगी।
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सूखे और जर्जर से नहीं हरे और मोटे पेड़ों से खतरा
बलिया। कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक दर्जनों स्थानों पर एनएच किनारे सूखे और जर्जर पेड़ मौजूद हैं, जो हादसे को दावत दे रहे हैं। वन विभाग को मोटे और हरे पेड़ों से अधिक हादसा होने का डर है। बताया जाता है कि सूखे और जर्जर पेड़ों की अधिकांश लकड़ियां काम लायक नहीं होती जबकि हरे पेड़ों की लकड़ियां काम लायक होती हैं जो काफी महंगी होती हैं। यही कारण है कि वन विभाग कीमती पेड़ों को कटवा रहा है। बतौर उदाहरण एनएच पर काटे जा रहे पेड़ के बीच गोविंदपुर गांव के सामने सड़क के सटे आधा दर्जन पेड़े जर्जर और सूखे हैं, जिसे नहीं काटा गया है।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में सड़क किनारे सूखे और जर्जर पेड़ों को काटने का निर्देश है, जिसके तहत पेड़ों को कटवाया जा रहा है। वैसे पेड़ों को काटा जाना है जिसकी जड़ों से मिट्टी हट गई हों, गिरने के कगार पर हो। हरे पेड़ों को नहीं काटा जाना है, अगर ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - श्रद्घा यादव, डीएफओ, बलिया
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एक ओर जहां पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए शासन की ओर से कवायद की जा रही है, वहीं जिले में वन विभाग की अनुमति से अंधाधुंध हरे पेड़ों को काटने का काम किया जा रहा है। पिछले कई दिनों से एनएच 31 पर जिले में सीमावर्ती गांव कोटवां नारायनपुर से सड़क किनारे स्थित आम, शीशम, नीम, जामुन, पीपल, बरगद के हरे पेड़ों को मशीन से काटने का काम जोरों पर किया जा रहा है। मौके पर मौजूद वन निगम के लागिंग सहायक की माने तो पुराने पेड़ों को काटने की अनुमति डीएफओ की ओर से दी गई है। उन्होंने बताया कि पुराने और जर्जर पेड़ों के चलते आए दिन सड़कों पर हो रहे हादसे को देखते हुए डीएफओ की ओर से अनुमति दी गई है। बताया कि कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक 22 किलोमीटर में कुल 617 पेड़ों को कटवाने का निर्देश मिला है। इसके तहत, कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक बाएं पटरी पर कुल 391 और चितबड़ागांव से कोटवां नारायनपुर तक बाएं पटरी पर कुल 291 पेड़ काटे जाएंगे। पेड़ों को मशीन से काटने के बाद तुरंत मशीन से ही छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं और इसके बाद ट्रैक्टर ट्राली से रसड़ा स्थित वन निगम को भेज दिया जा रहा है। उधर, इन पेड़ों को काटे जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी होने लगी हैं। लोगों की माने तो वन निगम के कर्मचारी मोटे और कीमती लकड़ियों के पेड़ों को तो काट रहा है लेकिन जर्जर और सूखे पेड़ों को छोड़ दे रहा है। लोग काटे जाने वाले कुल पेड़ों की लकड़ियों की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक आंक रहे हैं। लोगों का मानना है कि जड़ों से मजबूत मोटे पेड़ों से कहीं खतरा नहीं हैं, अगर टहनियां सड़कों तक आई हैं तो उसे काटा जाना चाहिए था।
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लाखों के पेड़ों के मामले में गोलमाल की आशंका
बलिया। वन विभाग की ओर से हर लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है लेकिन यह पौधे अधिकांशत: कागजों पर लगाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जाता है। एनएच किनारे जिस तरह का पेड़ काटा जा रहा है, वैसा पेड़ वन विभाग की ओर से कहीं भी तैयार नहीं किया जा सका है। सूत्रों की मानें तो हादसे के नाम पर लाखों के पेड़ों को काट कर वन विभाग और वन निगम की ओर से बड़े पैमाने पर गोलमाल की जाएगी।
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सूखे और जर्जर से नहीं हरे और मोटे पेड़ों से खतरा
बलिया। कोटवां नारायनपुर से चितबड़ागांव तक दर्जनों स्थानों पर एनएच किनारे सूखे और जर्जर पेड़ मौजूद हैं, जो हादसे को दावत दे रहे हैं। वन विभाग को मोटे और हरे पेड़ों से अधिक हादसा होने का डर है। बताया जाता है कि सूखे और जर्जर पेड़ों की अधिकांश लकड़ियां काम लायक नहीं होती जबकि हरे पेड़ों की लकड़ियां काम लायक होती हैं जो काफी महंगी होती हैं। यही कारण है कि वन विभाग कीमती पेड़ों को कटवा रहा है। बतौर उदाहरण एनएच पर काटे जा रहे पेड़ के बीच गोविंदपुर गांव के सामने सड़क के सटे आधा दर्जन पेड़े जर्जर और सूखे हैं, जिसे नहीं काटा गया है।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में सड़क किनारे सूखे और जर्जर पेड़ों को काटने का निर्देश है, जिसके तहत पेड़ों को कटवाया जा रहा है। वैसे पेड़ों को काटा जाना है जिसकी जड़ों से मिट्टी हट गई हों, गिरने के कगार पर हो। हरे पेड़ों को नहीं काटा जाना है, अगर ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - श्रद्घा यादव, डीएफओ, बलिया