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सदर अस्पताल में तीन दिन बाद भी कम नहीं हुई दवाओं का टोटा
Updated Thu, 22 Feb 2018 12:04 AM IST
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बलिया। शासन स्तर से दवाओं का टोटा खत्म करने की दिशा में ठोस कवायद नहीं की जा रही। जिससे मरीज परेशान हो रहे। अस्पताल में दवाओ को लेकर तीन पहले अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी। पड़ताल की गई तो इसमें कोई खास सुधार नहीं देखा गया और न तो दवाएं ही उपलब्ध हो सकी है। ऐसे में अधिकांश मरीज अपने जेब से दवाएं खरीद रहे है। जबकि अस्पताल में किसी तरह मरीजों को सुई आदि लगाई जा रही।
बुधवार को जब अमर उजाला की टीम ने इस बारे में जिला चिकित्साल में जाकर पड़ताल कर मरीजों से हाल चाल लिया तो उसके नतीजे सकारात्मक नहीं आए। ओपीडी में लिखी जाने वाली कुछ दवाओं को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों ने बताया की दवा अस्पताल से मिल रही है और कुछ मरीजों ने बताया कुछ दवाएं उन्हें अस्पताल से नहीं मिल रहा है। जिसके चलते उन्हें बाहर जाकर दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जबकि भर्ती मरीजों से पूछे जाने पर उनका कहना था कि सुई और दवाई जो अस्पताल में उपलब्ध है उसे चिकित्सक लिख रहे हैं। जबकि ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सकों के मन मुताबिक अभी दवाएं नहीं है। पेट के रोग तथा त्वचा रोग संबंधी दवाएं न होने से मरीजों को अच्छी खासी चपत लग रही है।
दवा के लिए अक्तूबर से ही डिमांड किया जा रहा है और तीन दिन पहले रिमाईंडर भेजा गया है। लेकिन अभी तक दवा नहीं आई। आधी-अधूरी दवाएं ही आ रही है। जिससे डिमांड के अनुरुप पूर्ति नहीं हो पा रही है। इंनडेंट करने के 45 दिन इंतजार करना पड़ता है। दवाएं के लिए बार-बार फोन किया जा रहा है। अभी भी कोई ठीक नहीं है दवा कब तक आएगी।
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डा. एस. प्रसाद, सीएमएस जिला अस्पताल
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बुधवार को जब अमर उजाला की टीम ने इस बारे में जिला चिकित्साल में जाकर पड़ताल कर मरीजों से हाल चाल लिया तो उसके नतीजे सकारात्मक नहीं आए। ओपीडी में लिखी जाने वाली कुछ दवाओं को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों ने बताया की दवा अस्पताल से मिल रही है और कुछ मरीजों ने बताया कुछ दवाएं उन्हें अस्पताल से नहीं मिल रहा है। जिसके चलते उन्हें बाहर जाकर दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जबकि भर्ती मरीजों से पूछे जाने पर उनका कहना था कि सुई और दवाई जो अस्पताल में उपलब्ध है उसे चिकित्सक लिख रहे हैं। जबकि ओपीडी में बैठने वाले चिकित्सकों के मन मुताबिक अभी दवाएं नहीं है। पेट के रोग तथा त्वचा रोग संबंधी दवाएं न होने से मरीजों को अच्छी खासी चपत लग रही है।
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दवा के लिए अक्तूबर से ही डिमांड किया जा रहा है और तीन दिन पहले रिमाईंडर भेजा गया है। लेकिन अभी तक दवा नहीं आई। आधी-अधूरी दवाएं ही आ रही है। जिससे डिमांड के अनुरुप पूर्ति नहीं हो पा रही है। इंनडेंट करने के 45 दिन इंतजार करना पड़ता है। दवाएं के लिए बार-बार फोन किया जा रहा है। अभी भी कोई ठीक नहीं है दवा कब तक आएगी।
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डा. एस. प्रसाद, सीएमएस जिला अस्पताल