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ीएसटी दरे कम तो हुई, फिर भी पुराने दर पर मिल रहा सामान
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:06 PM IST
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बलिया। जीएसटी की दरें कम करते हुए केंद्र सरकार ने एक बार फिर से लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश की है। जिसका कोई खास फायदा अभी तक ग्राहकों को नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं इस जीएसटी की दर में कमी के चलते ग्राहकों और दुकानदारों के बीच किचकिच जरूर बढ़ गई है। लोगों का मानना है कि प्रिंटेड सामानों पर अलग से जीएसटी कम होने का लेबल लगाया जाना चाहिए जिससे आम जनता को फायदा हो सके।
जीएसटी मामलों के जानकार तथा कर सलाहाकार उमेश प्रताप का कहना है कि जीएसटी लागू करने के पहले भी लोगों को दिग्भ्रमित किया गया। जबकि जीएसटी दर कम करने के बाद लोगों को पता ही नहीं चल रहा है कि किस सामान पर कितना जीएसटी कम हुआ है। जिसके चलते व्यापारी तो मालामाल हो रहे है लेकिन आमजन फायदे से ंवंचित है।
व्यापारी गंगेश कुमार का कहना है कि जीएसटी की दर कम किए जाने की सूचना भी छोटे दुकानदारों को नहीं मिल पाती है। जबकि दर कम किए जाने का लाभ बड़े दुकानदारों और उद्योगपतियों को मिल रहा है। सरकार की अदूरदर्शी नीति के चलते आम जनता लुट रही है।
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केशव कुमार सोनी कहते हैं कि जनता को टैक्स लाद कर परेशान तो किया गया लेकिन जब जीएसटी की दरे कम की गई तो कंपनी संचालकों को प्रिंट में कमी करने का निर्देश क्यों नहीं दिया गया। जब वाशिंग पाउडर, डिटर्जेंट जैसे सामानों पर प्रिंट करते समय जीएसटी दर क्यों नहीं घटाया गया।
व्यापारी पिंकू श्रीवास्तव कहते हैं कि जीएसटी दर में कमी किए जाने का कार्य तो सराहनीय है लेकिन सरकार की सोच आमजन के विपरीत है। जीएसटी दरों को कम कर देना नहीं बल्कि कम मूल्य पर बेचवाने की जिम्मेदारी भी सरकार की होती है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो इसका सीधा असर सरकार की नीतियों पर पड़ेगा।
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जीएसटी मामलों के जानकार तथा कर सलाहाकार उमेश प्रताप का कहना है कि जीएसटी लागू करने के पहले भी लोगों को दिग्भ्रमित किया गया। जबकि जीएसटी दर कम करने के बाद लोगों को पता ही नहीं चल रहा है कि किस सामान पर कितना जीएसटी कम हुआ है। जिसके चलते व्यापारी तो मालामाल हो रहे है लेकिन आमजन फायदे से ंवंचित है।
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व्यापारी गंगेश कुमार का कहना है कि जीएसटी की दर कम किए जाने की सूचना भी छोटे दुकानदारों को नहीं मिल पाती है। जबकि दर कम किए जाने का लाभ बड़े दुकानदारों और उद्योगपतियों को मिल रहा है। सरकार की अदूरदर्शी नीति के चलते आम जनता लुट रही है।
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केशव कुमार सोनी कहते हैं कि जनता को टैक्स लाद कर परेशान तो किया गया लेकिन जब जीएसटी की दरे कम की गई तो कंपनी संचालकों को प्रिंट में कमी करने का निर्देश क्यों नहीं दिया गया। जब वाशिंग पाउडर, डिटर्जेंट जैसे सामानों पर प्रिंट करते समय जीएसटी दर क्यों नहीं घटाया गया।
व्यापारी पिंकू श्रीवास्तव कहते हैं कि जीएसटी दर में कमी किए जाने का कार्य तो सराहनीय है लेकिन सरकार की सोच आमजन के विपरीत है। जीएसटी दरों को कम कर देना नहीं बल्कि कम मूल्य पर बेचवाने की जिम्मेदारी भी सरकार की होती है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो इसका सीधा असर सरकार की नीतियों पर पड़ेगा।