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गंगा पहुंची नजदीक, गंगापुर और केहरपुर छाने ली दहशत
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:55 PM IST
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रामगढ़(बलिया)। बाढ़ नियंत्रण विभाग की कार्य प्रणाली खुद उसे कटघरे में खड़ा कर रही है। मानसून आने वाला है, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से कटानरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया है। कटान रोकने के लिए विभाग की नींद तब खुलती है, जब मानसून सिर पर आ जाता है। इससे काम के समय न मानकों का ख्याल रहता है और न ही समय पर कार्य पूरा हो पाता। हां, ठेकेदार और विभागीय के लोगों की ओर से धन का बंदरबाट जरूर किया जाता है।
बताते चलें कि बाढ़ नियंत्रण विभाग और जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत दूबे छपरा रिंग बंधा पर लगा दी है। वहीं, एनएच-31 को बचाने के लिए कोई भी कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है। लेट लतीफी की यहीं हालात रही तो दर्जनों गांव के लाखों के आबादी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर चर्चाएं गरम हैं कि आखिर विभाग डेंजर जोन गंगापुर पर काम शुरू क्यों नहीं करा रहा है। विभाग की ओर से दूबे छपरा में चल रहे कार्य में भी पूरे बंधे की लंबाई करीब दो किलोमीटर है, लेकिन मात्र 750 मीटर पर ही बाढ़ निरोधक कार्य कराए जा रहे हैं। शेष बचे बंधे की मरम्मत नहीं कराई गई तो इस बार भी बाढ़ का पानी रिंग बंधे को कहीं ना कहीं से तोड़ देगी। विभाग केवल उदई छपरा और गोपालपुर के सामने ही कार्य कर खानापूर्ति करने में जुटा है।
डेंजर जोन गंगापुर की हालत ये है कि गंगा नदी और बंधे की बीच की दूरी मात्र 20 मीटर शेष बची है। बावजूद बाढ़ विभाग और जिला प्रशासन कार्यों को लेकर उदासीन बना है। जिलाधिकारी ने अपने दौरे पर बाढ़ विभाग के अधिकारियों को साफ शब्दों में निर्देश दिया था कि हर हाल में डेंजर जोन गंगापुर पर कार्य आकस्मिक निधि के तहत कराया जाएं। जिलाधिकारी ने विभाग के अधिकारियों से पूछा था कि नदी के किनारे पर बसे गांव केहरपुर पर धारा की बैक रोलिंग का प्रभाव पड़ेगा, लिहाजा केहरपुर में भी तत्काल बाढ़ निरोधक कार्य शुरू किया जाए, लेकिन विभागीय अधिकारियों को सुनाई नहीं दे रहा है। यहीं हाल रहा तो आने वाला समय गंगापुर और केहरपुर के लिए अभिशाप बन सकता है।
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बताते चलें कि बाढ़ नियंत्रण विभाग और जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत दूबे छपरा रिंग बंधा पर लगा दी है। वहीं, एनएच-31 को बचाने के लिए कोई भी कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका है। लेट लतीफी की यहीं हालात रही तो दर्जनों गांव के लाखों के आबादी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर चर्चाएं गरम हैं कि आखिर विभाग डेंजर जोन गंगापुर पर काम शुरू क्यों नहीं करा रहा है। विभाग की ओर से दूबे छपरा में चल रहे कार्य में भी पूरे बंधे की लंबाई करीब दो किलोमीटर है, लेकिन मात्र 750 मीटर पर ही बाढ़ निरोधक कार्य कराए जा रहे हैं। शेष बचे बंधे की मरम्मत नहीं कराई गई तो इस बार भी बाढ़ का पानी रिंग बंधे को कहीं ना कहीं से तोड़ देगी। विभाग केवल उदई छपरा और गोपालपुर के सामने ही कार्य कर खानापूर्ति करने में जुटा है।
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डेंजर जोन गंगापुर की हालत ये है कि गंगा नदी और बंधे की बीच की दूरी मात्र 20 मीटर शेष बची है। बावजूद बाढ़ विभाग और जिला प्रशासन कार्यों को लेकर उदासीन बना है। जिलाधिकारी ने अपने दौरे पर बाढ़ विभाग के अधिकारियों को साफ शब्दों में निर्देश दिया था कि हर हाल में डेंजर जोन गंगापुर पर कार्य आकस्मिक निधि के तहत कराया जाएं। जिलाधिकारी ने विभाग के अधिकारियों से पूछा था कि नदी के किनारे पर बसे गांव केहरपुर पर धारा की बैक रोलिंग का प्रभाव पड़ेगा, लिहाजा केहरपुर में भी तत्काल बाढ़ निरोधक कार्य शुरू किया जाए, लेकिन विभागीय अधिकारियों को सुनाई नहीं दे रहा है। यहीं हाल रहा तो आने वाला समय गंगापुर और केहरपुर के लिए अभिशाप बन सकता है।
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