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राष्ट्रीय नहीं स्थानीय मुद्दे वाले को दें तरजीह
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बलिया। स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले इस जिले में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हुए। यहां सुविधाओं से युक्त अस्पताल, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से विकास नहीं हुआ। ऐसे में राष्ट्रीय नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों पर काम करने वाले प्रत्याशी चुना जाना जरूरी है। ये बातें अमर उजाला और दी सिविल बार की ओर से दी सिविल बार एसोसिएशन के सभागार में शुक्रवार को आयोजित मतदाता जागरूकता संवाद में अधिवक्ताओं ने कहीं।
इस दौरान अधिवक्ता विनय कुमार तिवारी ने कहा कि जनता की मूलभूत सुविधाओं का अब तक के जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं रखा जिससे न तो अच्छे शिक्षण संस्थान स्थापित हुए और न ही उच्च और तकनीकी शिक्षा की कोई व्यवस्था की गई। इसके लिए कहीं न कहीं मतदाताओं की भी कमी है जिसा फायदा जनप्रतिनिधियों ने उठाया।
अधिवक्ता मनोज राय हंस ने कहा कि शिक्षा अधिकार के तहत स्कूलों में मानक के अनुरूप प्रवेश नहीं लिए जा रहे हैं। इस मुद्दे को उठाने के बाद भी जनप्रतिनिधियों के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। निजी स्कूलों की मनमानी के चलते छात्र और अभिभावक दोनों ही परेशान हैं।
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अधिवक्ता विनय कुमार सिंह व सुनील पांडेय ने कहा कि चिकित्सा एवं शिक्षा दो मूलभूत समस्याएं हैं। इन समस्याओं को दूर करने के प्रति जनप्रतिनिधि उदासीन रहे है। अस्पताल में दवाएं नहीं हैं। उच्च शिक्षा के नाम विश्वविद्यालय में संसाधनों की कमी है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से हमारा जिला पिछड़ा है।
अधिवक्ता अमित चौबे और विनोद तिवारी ने कहा कि सरकार सुधार की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। सरकारी स्कूलों में केवल शिक्षकों को वेतन दिया जाता है। बच्चों को पढ़ाने के लिए लोग निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। आज भी सरकारी स्कूलों पर करोड़ों खर्च किया जा रहा है लेकिन पढ़ाई न के बराबर है।
अधिवक्ता अजय राय ने कहा कि जनप्रतिनिधियों में नैतिकता नहीं रह गई है। यही वजह है कि जीतने के बाद उनके साथ 10 लोग ही हमेशा रहते हैं। उन्हीं का पूरे पांच साल विकास होता है। सरकार केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाती है लेकिन असल भ्रष्टाचार पर नकेल ही नहीं लग पा रही है।
अधिवक्ता विवेकानंद पांडेय तथा श्रीकांत पांडेय ने कहा कि सरकारी खजाने की लूट जबतक बंद नहीं होगी तब तक विकास नहीं होगा। केवल राष्ट्रीय मुद्दे पर ही नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों पर जनप्रतिनिधि चुनना पड़ेगा। तभी जिले का विकास होगा। नेता राष्ट्रीय मुद्दे और राष्ट्रीय नेता के चेहरे पर जीतकर सदन की गरिमा भी तार-तार कर रहे हैं।
अधिवक्ता राजेश सिंह्र औ सोनू गुप्ता ने कहा कि पिछले पांच साल में फोर लेन और फ्लाईओवर की बात सुनते रहे। कई बार नक्शा दिखाकर अधिकारियों के साथ फोटो भी खिंचवाया गया लेकिन कटहल नाला तक नहीं बन सका।
अधिवक्ता विकास चंद राय और इंद्रजीत तिवारी ने कहा कि जिले में कोई बड़ा कार्य तो कराया नहीं गया। अगर जिले में विश्वविद्यालय और जनेश्वर मिश्र सेतु बन रहा है उसे भी पूरा कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
अधिवक्ता परविंद कुमार तिवारी और अमित पांडेय ने कहा कि जिले में सुविधासंपन्न अस्पताल नहीं खुलवाए गए। शिक्षा व्यवस्था की बात करना ही बेमानी है। चुनाव जीतने के बाद नेता कुछ ही लोगों में ही सिमटकर रह जाते हैं।
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इस दौरान अधिवक्ता विनय कुमार तिवारी ने कहा कि जनता की मूलभूत सुविधाओं का अब तक के जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं रखा जिससे न तो अच्छे शिक्षण संस्थान स्थापित हुए और न ही उच्च और तकनीकी शिक्षा की कोई व्यवस्था की गई। इसके लिए कहीं न कहीं मतदाताओं की भी कमी है जिसा फायदा जनप्रतिनिधियों ने उठाया।
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अधिवक्ता मनोज राय हंस ने कहा कि शिक्षा अधिकार के तहत स्कूलों में मानक के अनुरूप प्रवेश नहीं लिए जा रहे हैं। इस मुद्दे को उठाने के बाद भी जनप्रतिनिधियों के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। निजी स्कूलों की मनमानी के चलते छात्र और अभिभावक दोनों ही परेशान हैं।
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अधिवक्ता विनय कुमार सिंह व सुनील पांडेय ने कहा कि चिकित्सा एवं शिक्षा दो मूलभूत समस्याएं हैं। इन समस्याओं को दूर करने के प्रति जनप्रतिनिधि उदासीन रहे है। अस्पताल में दवाएं नहीं हैं। उच्च शिक्षा के नाम विश्वविद्यालय में संसाधनों की कमी है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से हमारा जिला पिछड़ा है।
अधिवक्ता अमित चौबे और विनोद तिवारी ने कहा कि सरकार सुधार की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। सरकारी स्कूलों में केवल शिक्षकों को वेतन दिया जाता है। बच्चों को पढ़ाने के लिए लोग निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। आज भी सरकारी स्कूलों पर करोड़ों खर्च किया जा रहा है लेकिन पढ़ाई न के बराबर है।
अधिवक्ता अजय राय ने कहा कि जनप्रतिनिधियों में नैतिकता नहीं रह गई है। यही वजह है कि जीतने के बाद उनके साथ 10 लोग ही हमेशा रहते हैं। उन्हीं का पूरे पांच साल विकास होता है। सरकार केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाती है लेकिन असल भ्रष्टाचार पर नकेल ही नहीं लग पा रही है।
अधिवक्ता विवेकानंद पांडेय तथा श्रीकांत पांडेय ने कहा कि सरकारी खजाने की लूट जबतक बंद नहीं होगी तब तक विकास नहीं होगा। केवल राष्ट्रीय मुद्दे पर ही नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों पर जनप्रतिनिधि चुनना पड़ेगा। तभी जिले का विकास होगा। नेता राष्ट्रीय मुद्दे और राष्ट्रीय नेता के चेहरे पर जीतकर सदन की गरिमा भी तार-तार कर रहे हैं।
अधिवक्ता राजेश सिंह्र औ सोनू गुप्ता ने कहा कि पिछले पांच साल में फोर लेन और फ्लाईओवर की बात सुनते रहे। कई बार नक्शा दिखाकर अधिकारियों के साथ फोटो भी खिंचवाया गया लेकिन कटहल नाला तक नहीं बन सका।
अधिवक्ता विकास चंद राय और इंद्रजीत तिवारी ने कहा कि जिले में कोई बड़ा कार्य तो कराया नहीं गया। अगर जिले में विश्वविद्यालय और जनेश्वर मिश्र सेतु बन रहा है उसे भी पूरा कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
अधिवक्ता परविंद कुमार तिवारी और अमित पांडेय ने कहा कि जिले में सुविधासंपन्न अस्पताल नहीं खुलवाए गए। शिक्षा व्यवस्था की बात करना ही बेमानी है। चुनाव जीतने के बाद नेता कुछ ही लोगों में ही सिमटकर रह जाते हैं।