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खुदाई के नाम पर कोरम पूरा करने से बेमतलब साबित हो रहा तालाब
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:18 AM IST
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रसड़ा। सरकार द्वारा जल संचय के लिए कराए जा रहे पोखरे की खुदाई कोरम पूर्ण किए जाने से गांव में स्थित पोखरे एवं तालाब बेमतलब साबित हो रहे। प्राचीन पोखरे एवं तालाब अपने अस्तित्व के लिए जूझते नजर आ रहे हैं। सरकार द्वारा तालाब पोखरों पर खुदाई के नाम पर करोड़ो रुपए पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद भी गांव स्थित पोखरों तालाबो के दिन बहुरते नजर नहीं आ रहे हैं।
महात्मा गांधी गारंटी रोजगार योजना के अंतर्गत गांव सभा एवं ब्लॉक मुख्यालय द्वारा तालाबों पोखरों की खुदाई जारी है। अधिकांश पोखरों की खुदाई कागजों पर ही कर दी जा रही है। जबकि कुछ जगहों पर खुदाई हुई भी है तो दोनों हाथों से लूट खसोट जारी है। लूट खसोट में कार्यदायी संस्था एवं मजदूरों के काम न करने के कारण जल संचय योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार का मजदूरों से दैनिक मजदूरी पर रोजगार मुहैया कराने का प्रावधान है। सरकार द्वारा कार्य का मापदंड भी तय है। प्रतिदिन पुरूषों को दो घन मीटर तथा महिलाओं को डेढ़ घन मीटर मिट्टी काटना है। प्रतिदिन का दैनिक मजदूरी 175 रुपया निर्धारित है। परंतु मजदूरों द्वारा कार्यों में हीला-हवाली करने के कारण मानक के अनुरूप पुखरो की खुदाई नहीं हो पा रही है ।
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महात्मा गांधी गारंटी रोजगार योजना के अंतर्गत गांव सभा एवं ब्लॉक मुख्यालय द्वारा तालाबों पोखरों की खुदाई जारी है। अधिकांश पोखरों की खुदाई कागजों पर ही कर दी जा रही है। जबकि कुछ जगहों पर खुदाई हुई भी है तो दोनों हाथों से लूट खसोट जारी है। लूट खसोट में कार्यदायी संस्था एवं मजदूरों के काम न करने के कारण जल संचय योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार का मजदूरों से दैनिक मजदूरी पर रोजगार मुहैया कराने का प्रावधान है। सरकार द्वारा कार्य का मापदंड भी तय है। प्रतिदिन पुरूषों को दो घन मीटर तथा महिलाओं को डेढ़ घन मीटर मिट्टी काटना है। प्रतिदिन का दैनिक मजदूरी 175 रुपया निर्धारित है। परंतु मजदूरों द्वारा कार्यों में हीला-हवाली करने के कारण मानक के अनुरूप पुखरो की खुदाई नहीं हो पा रही है ।
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