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बाढ़ प्रभावित केहरपुर के ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:21 PM IST
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गंगा के मुहाने पर बसे केहरपुर ग्रामसभा को सांसद आदर्श गांव के रूप में सांसद ने गोद लिया है। तब से लोगों में यह उम्मीद जगी है कि शायद केहरपुर गांव को गंगा के गोद में जाने से बचाया जा सकता है। लेकिन प्रशासन के तरफ से इस गांव को बचाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं किया जा सका है। ऐसे में सांसद को इस आदर्श गांव में विकास की गंगा बहाना टेढ़ी खीर लग रहा है।
ग्रामसभा केहरपुर का पूर्वा श्रीनगर, प्रेमनगर बक्सी, पहले से ही गंगा के गोद में समा गया है। जहाँ के सैकड़ों लोग बेघर होकर सुघरछपरा से दूबेछपरा तक एनएच 31 को अपना शरण स्थली बनाया है तो केहरपुर के लोग अपने गांव का बावजूद बचाने के लिए जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज बुलंद किये हुये है । केहरपुर निवासी अनिल ओझा का कहना है कि पहले हमारे गाँव को गंगा के गोद में जाने से बचाने का प्रयास किया जाये सुघरछपरा निवासी जयप्रकाश पाण्डेय का कहना है कि जब गौवे ना बाची त विकास कैसे हो पाई । हमनी के एक ही निवेदन बा कि केहरपुर गांव के गंगा के गोद में न समा सके एकर ठोस उपाय कईल जाऊ । बबन ओझा का कहना है कि हमनी के गॉंव सांसद आदर्श गांव में चयनीत भईल त बहुत खुशी भईल बा कि शायद अब हमनी के गॉंव गंगा के कहर से बच जाई । शिक्षक शशिकान्त ओझा का कहना है कि विकास की गंगा ग्रामसभा केहरपुर में जरूर बहे के चाहीं लेकिन पहिले केहरपुर व सुघरछपरा के बचावे खातिर पहिले प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किया जाये। जेकर घर गंगा में विलीन हो गईल बा ओके प्राथमिकता के आधार पर गृह अनुदान भी दिहल जाऊ ।
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ग्रामसभा केहरपुर का पूर्वा श्रीनगर, प्रेमनगर बक्सी, पहले से ही गंगा के गोद में समा गया है। जहाँ के सैकड़ों लोग बेघर होकर सुघरछपरा से दूबेछपरा तक एनएच 31 को अपना शरण स्थली बनाया है तो केहरपुर के लोग अपने गांव का बावजूद बचाने के लिए जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज बुलंद किये हुये है । केहरपुर निवासी अनिल ओझा का कहना है कि पहले हमारे गाँव को गंगा के गोद में जाने से बचाने का प्रयास किया जाये सुघरछपरा निवासी जयप्रकाश पाण्डेय का कहना है कि जब गौवे ना बाची त विकास कैसे हो पाई । हमनी के एक ही निवेदन बा कि केहरपुर गांव के गंगा के गोद में न समा सके एकर ठोस उपाय कईल जाऊ । बबन ओझा का कहना है कि हमनी के गॉंव सांसद आदर्श गांव में चयनीत भईल त बहुत खुशी भईल बा कि शायद अब हमनी के गॉंव गंगा के कहर से बच जाई । शिक्षक शशिकान्त ओझा का कहना है कि विकास की गंगा ग्रामसभा केहरपुर में जरूर बहे के चाहीं लेकिन पहिले केहरपुर व सुघरछपरा के बचावे खातिर पहिले प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किया जाये। जेकर घर गंगा में विलीन हो गईल बा ओके प्राथमिकता के आधार पर गृह अनुदान भी दिहल जाऊ ।
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