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68 दिनों में अतिक्रमण की 1660 शिकायतें
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बलिया। अतिक्रमण कर अवैध कब्जे की शिकायतें नहीं थम रही हैं। स्थिति यह है कि पिछले 68 दिनों में अतिक्रमण की 1660 शिकायतें आई जिनमें 171 मामले जांच में गलत पाए गए। 659 मामलों को सुलह समझौते से निस्तारण हुआ। राजस्व विभाग की टीम ने 739 स्थानों से अतिक्रमण हटवाते हुए 101.53 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। अतिक्रमण के 13 मामले अभी भी लंबित हैं।
प्रदेश सरकार ने दो साल पहले आठ मई को भूखंडों से अतिक्रमण और अवैध कब्जे हटवाने का आदेश दिया था। इसके तहत प्रभावशाली व्यक्तियों, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों द्वारा स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी भूमियों, धार्मिक संस्थानों, प्रतिष्ठानों, लावारिस संपत्तियों के अलावा गरीब व कमजोर लोगों की जमीन पर किए गए अवैध कब्जा को हटाया जाना था। खासकर गांवों में स्थित सार्वजनिक उपयोग की भूमि, तालाब, पोखरे, चारागाह, कब्रिस्तान, श्मशान, कुंआ, सड़क किनारे की जमीन, चकमार्ग, चकनाली आदि पर अतिक्रमण के मामले कार्रवाई करने का प्रावधान था। इसके बाद भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। आज भी सार्वजनिक जमीनों पर दबंग निर्माण आदि कराने से नहीं हिचक रहे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से आए दिन भूमाफिया की ओर से अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही हैैं। शिकायतों पर गौर करें तो एक अप्रैल 19 से सात जून 19 तक इन 68 दिनों में अतिक्रमण की कुल 1660 शिकायतें राजस्व विभाग को मिलीं। इसमें 171 मामले जांच में गलत पाए गए। इसके अलावा 78 मामले जहां न्यायालयों में विचाराधीन हैं। वहीं, 659 मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किया गया। राजस्व विभाग की ओर से 739 मामलों में अतिक्रमण को हटाते हुए 101.53 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। शिकायतों के आधार पर 71 मामलों में राजस्व वाद दर्ज कराया गया है जबकि सात मामलों में सिविल वाद दर्ज कराया गया है। 21 मामलों में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। 13 मामले अभी लंबित हैं। अतिक्रमण की इन 1660 शिकायतों में सबसे अधिक राजस्व विभाग से संबंधित 1080 मामले है। इसके अलावा पीडब्लूडी से संबंधित दो, सिंचाई विभाग से संबंधित आठ, वन विभाग के दो, नगर विकास के एक व अन्य विभागों के 562 शिकायतें मिलीं।
एडीएम रामआसरे ने बताया कि अतिक्रमण की शिकायतों का निस्तारण वरीयता के आधार पर किया जाता है। वित्तीय वर्ष 19-20 में अब तक 1660 मामले आए जिसमें अधिकांश का निस्तारण कराया गया है।
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प्रदेश सरकार ने दो साल पहले आठ मई को भूखंडों से अतिक्रमण और अवैध कब्जे हटवाने का आदेश दिया था। इसके तहत प्रभावशाली व्यक्तियों, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों द्वारा स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी भूमियों, धार्मिक संस्थानों, प्रतिष्ठानों, लावारिस संपत्तियों के अलावा गरीब व कमजोर लोगों की जमीन पर किए गए अवैध कब्जा को हटाया जाना था। खासकर गांवों में स्थित सार्वजनिक उपयोग की भूमि, तालाब, पोखरे, चारागाह, कब्रिस्तान, श्मशान, कुंआ, सड़क किनारे की जमीन, चकमार्ग, चकनाली आदि पर अतिक्रमण के मामले कार्रवाई करने का प्रावधान था। इसके बाद भी शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है। आज भी सार्वजनिक जमीनों पर दबंग निर्माण आदि कराने से नहीं हिचक रहे हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से आए दिन भूमाफिया की ओर से अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही हैैं। शिकायतों पर गौर करें तो एक अप्रैल 19 से सात जून 19 तक इन 68 दिनों में अतिक्रमण की कुल 1660 शिकायतें राजस्व विभाग को मिलीं। इसमें 171 मामले जांच में गलत पाए गए। इसके अलावा 78 मामले जहां न्यायालयों में विचाराधीन हैं। वहीं, 659 मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किया गया। राजस्व विभाग की ओर से 739 मामलों में अतिक्रमण को हटाते हुए 101.53 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। शिकायतों के आधार पर 71 मामलों में राजस्व वाद दर्ज कराया गया है जबकि सात मामलों में सिविल वाद दर्ज कराया गया है। 21 मामलों में अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। 13 मामले अभी लंबित हैं। अतिक्रमण की इन 1660 शिकायतों में सबसे अधिक राजस्व विभाग से संबंधित 1080 मामले है। इसके अलावा पीडब्लूडी से संबंधित दो, सिंचाई विभाग से संबंधित आठ, वन विभाग के दो, नगर विकास के एक व अन्य विभागों के 562 शिकायतें मिलीं।
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एडीएम रामआसरे ने बताया कि अतिक्रमण की शिकायतों का निस्तारण वरीयता के आधार पर किया जाता है। वित्तीय वर्ष 19-20 में अब तक 1660 मामले आए जिसमें अधिकांश का निस्तारण कराया गया है।
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