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महीनों बाद भी नहीं चमका मनियर का बिंदी उद्योग
Updated Mon, 22 Oct 2018 12:29 AM IST
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बलिया। प्रदेश में लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की गई। इसमें नई तकनीकों के प्रयोग और प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है, ताकि ये उत्पाद बाजार में उपलब्ध अन्य उत्पाद का मुकाबला कर सकें। इसके तहत जनपद के मनियर स्थित बिंदी उद्योग का चयन किया गया। एक तरह से इस रोजगार में महिलाओं को जोड़कर अंशकालिक लाभ दिए जाने की योजना है तक घर घर रोजगार मुहैया कराया जा सके।
जिला उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस धंधे में लगभग 500 से 650 महिलाएं बिंदी बनाने का काम करती हैं। कस्बा में वाराणसी के व्यापारी भी रेडीमेड बिंदी लेकर पहुंचते हैं, वहीं कुछ कस्बा के भी व्यापारी हैं जो दिल्ली या गाजियाबाद से बिंदी सामग्री लाते हैं और बिंदी कारोबार से जुड़ी महिलाओं में बांट देते हैं। महिलाएं घर का काम निपटाने के बाद बिंदी के काम में लग जाती हैं और उसे कागज के पत्ते पर साट कर सेट में बंडल बना देती हैं। इसके लिए उन्हें एक दिन की मजदूरी मात्र 35 से 45 रुपये मिलती है। इसे महिलाएं पार्ट टाइम जॉब के तौर पर करती हैं।
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त की मानें तो मनियर के बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने के घर-घर घूम कर यह प्रयास किया गया कि सभी लोग इस धंधे को ऊंचाई देने के क्रम में कम्प्यूटर से डिजाइन निकालें। लघु उद्योग स्थापित कर मशीन का प्रयोग करें। पत्ता बनाने से उनकी कमाई अच्छी नहीं होगी। जब वे खुद नए डिजाइन के बिंदी का निर्माण करेंगे तो देश भर में उनका नाम होगा और यहां की निर्मित बिंदी को पुराने जमाने की तरह तरक्की का रास्ता भी मिल जाएगा। लेकिन कस्बा की महिलाएं उन व्यापारियों का ही काम करने की पक्षधर हैं जो उन्हें रेडीमेड बिंदी देकर केवल पत्ता बनवाते हैं और एवज में केवल मजदूरी देते हैं।
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इनसेट...
छह लोगों का स्वीकृत किया गया पांच-पांच लाख का कर्ज
बलिया। करीब दो माह पहले 11 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट समिट कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिले के विकास भवन सभागार में किया गया जिसे डीएम संग अधिकारियों ने देखा। कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने उद्योग विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मनियर के छह लाभार्थियों को बिंदी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए पांच-पांच लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। समिट में मनियर के बिंदी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए यहां के भी छोटे कारीगर शामिल हुए थे। जिलाधिकारी ने कहा कि छोटे उत्पाद वाले लोगों को बड़े स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से इस समिट का आयोजन हुआ है। लेकिन इसके बाद यह प्रक्रिया गति नहीं पकड़ सकी।
इनसेट...
55 लोगों को दिया गया प्रशिक्षण
बलिया। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त ने बताया कि मनियर के बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इस कारोबार से जुड़े लोगों को चिह्नित किया गया है और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए काम जारी है। यह भी बताया कि अभी तक 55 कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। बताया कि बिंदी प्रोडक्ट को बेचने के लिए अभी किसी कंपनी से कोई करार नहीं हुआ है। अगर कोई कारोबारी बिंदी उद्योग के लिए ऋण को आवेदन करता है तो उसका भरपूर सहयोग किया जाएगा।
वर्जन =
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत मनियर के बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। हालांकि इसके प्रति लोगों की रुचि काफी कम है। अबतक छह लोगों ने आवेदन किया जिसका ऋण स्वीकृत किया गया है। समय-समय पर कस्बा में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाता है।
- शिवलाल, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र, बलिया
1950 बिंदी उद्योग की शुरूआत
मनियर कस्बा दशकों से बिंदी (टिकुली) उद्योग के लिए मशहूर है। बिंदी के बहुत से कुटीर उद्योग यहां पर वर्षों से चल रहे हैं। इस उत्पाद का व्यापार स्थानीय बाजारों के अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों में भी होता है। यह उद्योग जनपद के लिए आय का एक बहुत बड़ा स्रोत है। बताया जाता है कि मनियर में बिंदी उद्योग की शुरुआत 1950 के करीब हुई थी और तब शीशे को गला कर बिंदी बनती थी। उस पर सोने और चांदी का पानी चढ़ाकर खूबसूरत बिंदी बनाने का काम किया जाता था। इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुस्लिम परिवार के लोग कोलकाता और अन्य जगहों पर जाकर नई डिजाइन की बिंदी बनाने के गुर भी सीखते थे और उसे यहां के कारीगरों से बनवाते थे। 1975 के आसपास शीशे की बिंदी का चलन समाप्त हुआ और बाजारों में नए किस्म की बिंदी आने लगी। हालांकि बदलते समय के अनुसार मनियर का बिंदी उद्योग तरक्की की राहों में इसलिए पीछे रह गया कि क्योंकि इस ओर कारीगर अपना पांव ही आगे नहीं बढ़ाना चाहते। वे इस ओर प्रयास करें तो वे भी आधुनिक तरीके से बिंदी का निर्माण कर सकते हैं। जबकि आज हर तरह के उद्योगों में आधुनिक मशीनें आगे का रास्ता तय कर रही हैं। अब सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में मनियर के बिंदी उद्योग को शामिल किया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग की ओर से इस बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन अब भी जिले में इसकी गति काफी धीमी है।
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जिला उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस धंधे में लगभग 500 से 650 महिलाएं बिंदी बनाने का काम करती हैं। कस्बा में वाराणसी के व्यापारी भी रेडीमेड बिंदी लेकर पहुंचते हैं, वहीं कुछ कस्बा के भी व्यापारी हैं जो दिल्ली या गाजियाबाद से बिंदी सामग्री लाते हैं और बिंदी कारोबार से जुड़ी महिलाओं में बांट देते हैं। महिलाएं घर का काम निपटाने के बाद बिंदी के काम में लग जाती हैं और उसे कागज के पत्ते पर साट कर सेट में बंडल बना देती हैं। इसके लिए उन्हें एक दिन की मजदूरी मात्र 35 से 45 रुपये मिलती है। इसे महिलाएं पार्ट टाइम जॉब के तौर पर करती हैं।
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जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त की मानें तो मनियर के बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने के घर-घर घूम कर यह प्रयास किया गया कि सभी लोग इस धंधे को ऊंचाई देने के क्रम में कम्प्यूटर से डिजाइन निकालें। लघु उद्योग स्थापित कर मशीन का प्रयोग करें। पत्ता बनाने से उनकी कमाई अच्छी नहीं होगी। जब वे खुद नए डिजाइन के बिंदी का निर्माण करेंगे तो देश भर में उनका नाम होगा और यहां की निर्मित बिंदी को पुराने जमाने की तरह तरक्की का रास्ता भी मिल जाएगा। लेकिन कस्बा की महिलाएं उन व्यापारियों का ही काम करने की पक्षधर हैं जो उन्हें रेडीमेड बिंदी देकर केवल पत्ता बनवाते हैं और एवज में केवल मजदूरी देते हैं।
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छह लोगों का स्वीकृत किया गया पांच-पांच लाख का कर्ज
बलिया। करीब दो माह पहले 11 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट समिट कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिले के विकास भवन सभागार में किया गया जिसे डीएम संग अधिकारियों ने देखा। कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने उद्योग विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मनियर के छह लाभार्थियों को बिंदी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए पांच-पांच लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। समिट में मनियर के बिंदी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए यहां के भी छोटे कारीगर शामिल हुए थे। जिलाधिकारी ने कहा कि छोटे उत्पाद वाले लोगों को बड़े स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से इस समिट का आयोजन हुआ है। लेकिन इसके बाद यह प्रक्रिया गति नहीं पकड़ सकी।
इनसेट...
55 लोगों को दिया गया प्रशिक्षण
बलिया। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त ने बताया कि मनियर के बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इस कारोबार से जुड़े लोगों को चिह्नित किया गया है और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए काम जारी है। यह भी बताया कि अभी तक 55 कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। बताया कि बिंदी प्रोडक्ट को बेचने के लिए अभी किसी कंपनी से कोई करार नहीं हुआ है। अगर कोई कारोबारी बिंदी उद्योग के लिए ऋण को आवेदन करता है तो उसका भरपूर सहयोग किया जाएगा।
वर्जन =
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत मनियर के बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। हालांकि इसके प्रति लोगों की रुचि काफी कम है। अबतक छह लोगों ने आवेदन किया जिसका ऋण स्वीकृत किया गया है। समय-समय पर कस्बा में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाता है।
- शिवलाल, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र, बलिया
1950 बिंदी उद्योग की शुरूआत
मनियर कस्बा दशकों से बिंदी (टिकुली) उद्योग के लिए मशहूर है। बिंदी के बहुत से कुटीर उद्योग यहां पर वर्षों से चल रहे हैं। इस उत्पाद का व्यापार स्थानीय बाजारों के अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों में भी होता है। यह उद्योग जनपद के लिए आय का एक बहुत बड़ा स्रोत है। बताया जाता है कि मनियर में बिंदी उद्योग की शुरुआत 1950 के करीब हुई थी और तब शीशे को गला कर बिंदी बनती थी। उस पर सोने और चांदी का पानी चढ़ाकर खूबसूरत बिंदी बनाने का काम किया जाता था। इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुस्लिम परिवार के लोग कोलकाता और अन्य जगहों पर जाकर नई डिजाइन की बिंदी बनाने के गुर भी सीखते थे और उसे यहां के कारीगरों से बनवाते थे। 1975 के आसपास शीशे की बिंदी का चलन समाप्त हुआ और बाजारों में नए किस्म की बिंदी आने लगी। हालांकि बदलते समय के अनुसार मनियर का बिंदी उद्योग तरक्की की राहों में इसलिए पीछे रह गया कि क्योंकि इस ओर कारीगर अपना पांव ही आगे नहीं बढ़ाना चाहते। वे इस ओर प्रयास करें तो वे भी आधुनिक तरीके से बिंदी का निर्माण कर सकते हैं। जबकि आज हर तरह के उद्योगों में आधुनिक मशीनें आगे का रास्ता तय कर रही हैं। अब सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में मनियर के बिंदी उद्योग को शामिल किया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग की ओर से इस बिंदी उद्योग को बढ़ावा देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन अब भी जिले में इसकी गति काफी धीमी है।