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अब पशुओं का कराया जाएगा बीमा, कानों में लगेंगे डिजिटल टैग
Updated Thu, 29 Jun 2017 11:51 PM IST
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बलिया। पशुधन बीमा योजना लागू करने का निर्देश जिले में पहुंच गया है और पशुपालन विभाग इसकी तैयारी में लग गया है। इसके तहत बीमित पशुओं के कानों में डिजिटल टैग लगाए जाएंगे।
केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त अंश के जरिए पशुधन बीमा योजना लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। पशुओं को सुरक्षित करने और पशुपालकों की पूंजी बचाने के उद्देश्य से सरकार इस कवायद में लगी है। शासन की ओर से पशुओं का बीमा करने की जिम्मेदारी ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी को दी गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की मानें तो जिले में विभिन पशु चिकित्सालयों पर तैनात पशु चिकित्साधिकारियों को संबंधित ब्लाक व क्षेत्र का नोडल अधिकारी बनाया गया है और इनके देखरेख में पशुओं के बीमा का काम होगा। जिला नोडल अधिकारी डा. जीवन लाल को बनाया गया है। सीवीओ ने बताया कि शासन की ओर से 2800 मवेशियों के बीमा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बताया कि सामान्य व बीपीएल पशुपालकों के लिए अलग-अलग प्रीमियम का निर्धारण किया गया है। सीवीओ की मानें तो बीमित पशुओं के कानों में बीमा कंपनी की ओर से डिजिटल टैग लगाए जाएंगे। उन पशुओं के बीमार होने, किसी हादसे में घायल होने या अप्राकृतिक मौत होने पर पशुपालकों को बीमित राशि मिलेगी।
दूध से होगा मवेशियों का मूल्य निर्धारण
पशुधन बीमा योजना के तहत पशुओं के मूल्य का निर्धारण उनके दूध के आधार पर किया जाएगा। सीवीओ ने बताया कि गाय के लिए प्रति लीटर चार हजार और भैंस के लिए प्रति लीटर छह हजार के आधार पर मवेशी का मूल्य तय कर बीमा किया जाएगा। हालांकि गाय के लिए अधिकतम 40 हजार और भैंस के लिए अधिकतम 60 हजार मूल्य तक बीमा का प्रावधान किया गया है। बकरी की कीमत अधिकतम छह हजार और घोड़े आदि के मूल्य का निर्धारण बाजार के आधार पर किया जाएगा।
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डिजिटल टैग से मिलेगी मवेशियों की जानकारी
पशुओं के बीमा होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी की ओर से उनके कानों में डिजिटल टैग लगाए जाएंगे। बताया जाता है कि बीमित पशुओं का पूरा विवरण बीमा कंपनी व पशुपालन विभाग के रिकार्ड में अंकित होगा और ऑनलाइन किया जाएगा। मवेशियों के कानों में लगे टैग नंबर के आधार पर मवेशी के बावत पूरी जानकारी ली जा सकेगी।
सामान्य वर्ग को 75 और बीपीएल को 90 फीसदी सरकारी अंशदान
पशुधन बीमा योजना के तहत सामान्य वर्ग के पशुपालकों के मवेशियों का बीमा प्रीमियम के 75 फीसदी का अंशदान सरकार वहन करेगी जिसमें 25 फीसदी केन्द्र और 50 फीसदी राज्य का अंश होगा। शेष 25 फीसदी पशुपालक को देना होगा जो एक साल के लिए मवेशी के मूल्य का 2.98 फीसदी और तीन साल के 3.76 फीसदी होगा। इसी तरह बीपीएल वर्ग के पशुपालकों के मवेशियों के बीमा प्रीमियम में कुल 90 फीसदी का अंशदान सरकार का होगा, जिसमें 40 फीसदी केन्द्र और 50 फीसदी राज्य का होगा। शेष 10 फीसदी पशुपालक को देना होगा। एक साल या तीन साल तक का बीमा कराने के लिए पशुपालक को केवल एक बार ही प्रीमियम देना है।
40 पशु चिकित्साधिकारियों के लक्ष्य का निर्धारण
पशुधन बीमा योजना लागू करने के लिए सभी पशु चिकित्सकों नोडल संबंधित क्षेत्र का नोडल अधिकारी बनाते हुए लक्ष्य का निर्धारण किया गया है। सीवीओ ने बताया कि जिले में कुल 40 पशु चिकित्साधिरी तैनात किए गए हैं। शासन की ओर से मिले कुल लक्ष्य 2800 के सापेक्ष प्रत्येक पशु चिकित्साधिकारी को 70 मवेशियों के बीमा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि इससे अधिक मवेशियों का भी बीमा कराया जा सकता है।
पशुधन बीमा योजना लागू करने को लेकर तैयारी शुरु कर दी गई है। इसे मूर्तरुप देने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। यह योजना पशुपालकों के लिए काफी लाभदायक है लिहाजा वह मवेशियों का बीमा अवश्य कराएं।
- डा. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बलिया
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केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त अंश के जरिए पशुधन बीमा योजना लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। पशुओं को सुरक्षित करने और पशुपालकों की पूंजी बचाने के उद्देश्य से सरकार इस कवायद में लगी है। शासन की ओर से पशुओं का बीमा करने की जिम्मेदारी ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी को दी गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की मानें तो जिले में विभिन पशु चिकित्सालयों पर तैनात पशु चिकित्साधिकारियों को संबंधित ब्लाक व क्षेत्र का नोडल अधिकारी बनाया गया है और इनके देखरेख में पशुओं के बीमा का काम होगा। जिला नोडल अधिकारी डा. जीवन लाल को बनाया गया है। सीवीओ ने बताया कि शासन की ओर से 2800 मवेशियों के बीमा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बताया कि सामान्य व बीपीएल पशुपालकों के लिए अलग-अलग प्रीमियम का निर्धारण किया गया है। सीवीओ की मानें तो बीमित पशुओं के कानों में बीमा कंपनी की ओर से डिजिटल टैग लगाए जाएंगे। उन पशुओं के बीमार होने, किसी हादसे में घायल होने या अप्राकृतिक मौत होने पर पशुपालकों को बीमित राशि मिलेगी।
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दूध से होगा मवेशियों का मूल्य निर्धारण
पशुधन बीमा योजना के तहत पशुओं के मूल्य का निर्धारण उनके दूध के आधार पर किया जाएगा। सीवीओ ने बताया कि गाय के लिए प्रति लीटर चार हजार और भैंस के लिए प्रति लीटर छह हजार के आधार पर मवेशी का मूल्य तय कर बीमा किया जाएगा। हालांकि गाय के लिए अधिकतम 40 हजार और भैंस के लिए अधिकतम 60 हजार मूल्य तक बीमा का प्रावधान किया गया है। बकरी की कीमत अधिकतम छह हजार और घोड़े आदि के मूल्य का निर्धारण बाजार के आधार पर किया जाएगा।
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डिजिटल टैग से मिलेगी मवेशियों की जानकारी
पशुओं के बीमा होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी की ओर से उनके कानों में डिजिटल टैग लगाए जाएंगे। बताया जाता है कि बीमित पशुओं का पूरा विवरण बीमा कंपनी व पशुपालन विभाग के रिकार्ड में अंकित होगा और ऑनलाइन किया जाएगा। मवेशियों के कानों में लगे टैग नंबर के आधार पर मवेशी के बावत पूरी जानकारी ली जा सकेगी।
सामान्य वर्ग को 75 और बीपीएल को 90 फीसदी सरकारी अंशदान
पशुधन बीमा योजना के तहत सामान्य वर्ग के पशुपालकों के मवेशियों का बीमा प्रीमियम के 75 फीसदी का अंशदान सरकार वहन करेगी जिसमें 25 फीसदी केन्द्र और 50 फीसदी राज्य का अंश होगा। शेष 25 फीसदी पशुपालक को देना होगा जो एक साल के लिए मवेशी के मूल्य का 2.98 फीसदी और तीन साल के 3.76 फीसदी होगा। इसी तरह बीपीएल वर्ग के पशुपालकों के मवेशियों के बीमा प्रीमियम में कुल 90 फीसदी का अंशदान सरकार का होगा, जिसमें 40 फीसदी केन्द्र और 50 फीसदी राज्य का होगा। शेष 10 फीसदी पशुपालक को देना होगा। एक साल या तीन साल तक का बीमा कराने के लिए पशुपालक को केवल एक बार ही प्रीमियम देना है।
40 पशु चिकित्साधिकारियों के लक्ष्य का निर्धारण
पशुधन बीमा योजना लागू करने के लिए सभी पशु चिकित्सकों नोडल संबंधित क्षेत्र का नोडल अधिकारी बनाते हुए लक्ष्य का निर्धारण किया गया है। सीवीओ ने बताया कि जिले में कुल 40 पशु चिकित्साधिरी तैनात किए गए हैं। शासन की ओर से मिले कुल लक्ष्य 2800 के सापेक्ष प्रत्येक पशु चिकित्साधिकारी को 70 मवेशियों के बीमा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि इससे अधिक मवेशियों का भी बीमा कराया जा सकता है।
पशुधन बीमा योजना लागू करने को लेकर तैयारी शुरु कर दी गई है। इसे मूर्तरुप देने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। यह योजना पशुपालकों के लिए काफी लाभदायक है लिहाजा वह मवेशियों का बीमा अवश्य कराएं।
- डा. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बलिया