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Ballia News: 10 घंटे में 15 एमएम हुई बारिश, दो डिग्री गिरा तापमान
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नगर में हो रही रिमझिम बारिश बचाव के लिए बाइक पर छाता लेकर अपने गंतव्य को जाते लोग।संवाद
बलिया। चक्रवात अर्नब का असर बृहस्पतिवार की सुबह से जिले में ही दिखाई पड़ने लगा। सुबह से दस घंटे में 15 एमएम (मिलीमीटर) बारिश हुई है। देर रात तक बारिश होती रही। उधर, नगरा थाना क्षेत्र के भीमपुरा नंबर दो गांव में बिजली गिरने से रामावती देवी (65) की मौत हो गई।
बारिश से शहर के फोरलेन समेत आवास विकास कॉलोनी, टैगोर नगर, आनंद नगर, रामदहिम पुरम आदि मोहल्ले में जलभराव की स्थिति बनी रही। सड़कों पर कीचड़ बना रहा है। कामकाज करने वालों लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। श्रमिकों को बिना काम के लिए लौटना पड़ा। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान में लगभग दो डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान 29 व न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 30.5 व न्यूनतम 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
मौसम विशेषज्ञ प्रो. सुरेश सिंह ने बताया कि चक्रवात का असर दो दिनों तक रहेगा। बारिश की अभी तेज होने की प्रबल संभावना है। आकाशीय बिजली गिरने व तेज हवाएं चलने का अनुमान है। हवा संग बारिश होने पर धान समेत अन्य फसलों को काफी नुकसान पहुंचेगा। प्रशासन की तरफ से लोगों को सलाह दी गई है कि बाहर निकलने से पहले मौसम का ताजा पूर्वानुमान देख लें और आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें।
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सरकारी कार्यालयों में कम दिखे फरियादी
चक्रवाती तूफान के असर को देखते हुए सरकारी कार्यालयों में भी फरियादी कम दिखाई दिए। डीएम कार्यालय व कचहरी में भीड़ भाड़ दिखाई देते थी लेकिन जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकले। बाजारों में भी भीड़ कम दिखाई दी। सदर तहसील में छिटपुट ही लोग आते-जाते दिखाई दिए। काम काज को निपटाकर लोग तत्काल घर की तरफ निकलने में लगे रहे।
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फोरलेन पर जगह-जगह जल भराव ने बढ़ाई परेशानी
माल्देपुर से कदम चौराहे तक निर्माणाधीन फोरलेन पर जगह-जगह पानी लगने से लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। जलालपुर, बहेरी, मालगोदाम, एससी कालेज चौराहा, कदमतर के आगे फोरलेन पर जलभराव होने से वाहन चालकों को दिक्कत हुई। पानी निकासी के लिए नाला बनाया गया है लेकिन ऊंचा होने के कारण पानी सड़क पर जमा हो जा रहा है।
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किसानों को फसल की गुणवत्ता खराब होने की चिंता, तूफान के असर पर नजर
बेल्थरारोड। तूफान अर्नब के प्रभाव से मौसम में आए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। बृहस्पतिवार को सुबह से बूंदाबांदी का क्रम शुरू हो गया, जो पूरे दिन जारी रहा। मौसम में बदलाव के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। किसानों का कहना है कि बूंदाबांदी तक बारिश सीमित रही तो नुकसान की आशंका कम रहेगी, लेकिन तेज बारिश होने पर खेतों में खड़ी धान की फसल प्रभावित हो सकती है। वहीं, कटाई के बाद खलिहान में रखे धान के भींगने से उसे सूखाने और सुरक्षित रखने में परेशानी होगी। नमी बढ़ने से धान की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बना रहेगा।
पूर। मौसम पूर्वानुमान में तेज हवा चलने की आशंका जताई गई थी, हालांकि अब तक तेज हवा नहीं चली है। इसके बावजूद बारिश ने धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में धान की फसल तैयार हो रही है और कई जगहों पर बालियां निकल चुकी हैं। ऐसे में यदि बारिश के साथ तेज हवा चलती है तो फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। किसान लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें डर सता रहा है कि कहीं चक्रवात का असर तेज हुआ तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
रसड़ा। बारिश ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी। सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों की है जो काट कर खेत में छोड़ रखे है। अभी अधिकाश किसानों की धान की फसल खेत में है कुछ किसानों ने धान की फसल काट कर खेत में छोड़ रखे है। रसात से किसानों को फायदा कम नुकसान है।
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बारिश से शहर के फोरलेन समेत आवास विकास कॉलोनी, टैगोर नगर, आनंद नगर, रामदहिम पुरम आदि मोहल्ले में जलभराव की स्थिति बनी रही। सड़कों पर कीचड़ बना रहा है। कामकाज करने वालों लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। श्रमिकों को बिना काम के लिए लौटना पड़ा। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान में लगभग दो डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान 29 व न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 30.5 व न्यूनतम 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
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मौसम विशेषज्ञ प्रो. सुरेश सिंह ने बताया कि चक्रवात का असर दो दिनों तक रहेगा। बारिश की अभी तेज होने की प्रबल संभावना है। आकाशीय बिजली गिरने व तेज हवाएं चलने का अनुमान है। हवा संग बारिश होने पर धान समेत अन्य फसलों को काफी नुकसान पहुंचेगा। प्रशासन की तरफ से लोगों को सलाह दी गई है कि बाहर निकलने से पहले मौसम का ताजा पूर्वानुमान देख लें और आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें।
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सरकारी कार्यालयों में कम दिखे फरियादी
चक्रवाती तूफान के असर को देखते हुए सरकारी कार्यालयों में भी फरियादी कम दिखाई दिए। डीएम कार्यालय व कचहरी में भीड़ भाड़ दिखाई देते थी लेकिन जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकले। बाजारों में भी भीड़ कम दिखाई दी। सदर तहसील में छिटपुट ही लोग आते-जाते दिखाई दिए। काम काज को निपटाकर लोग तत्काल घर की तरफ निकलने में लगे रहे।
फोरलेन पर जगह-जगह जल भराव ने बढ़ाई परेशानी
माल्देपुर से कदम चौराहे तक निर्माणाधीन फोरलेन पर जगह-जगह पानी लगने से लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। जलालपुर, बहेरी, मालगोदाम, एससी कालेज चौराहा, कदमतर के आगे फोरलेन पर जलभराव होने से वाहन चालकों को दिक्कत हुई। पानी निकासी के लिए नाला बनाया गया है लेकिन ऊंचा होने के कारण पानी सड़क पर जमा हो जा रहा है।
किसानों को फसल की गुणवत्ता खराब होने की चिंता, तूफान के असर पर नजर
बेल्थरारोड। तूफान अर्नब के प्रभाव से मौसम में आए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। बृहस्पतिवार को सुबह से बूंदाबांदी का क्रम शुरू हो गया, जो पूरे दिन जारी रहा। मौसम में बदलाव के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। किसानों का कहना है कि बूंदाबांदी तक बारिश सीमित रही तो नुकसान की आशंका कम रहेगी, लेकिन तेज बारिश होने पर खेतों में खड़ी धान की फसल प्रभावित हो सकती है। वहीं, कटाई के बाद खलिहान में रखे धान के भींगने से उसे सूखाने और सुरक्षित रखने में परेशानी होगी। नमी बढ़ने से धान की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बना रहेगा।
पूर। मौसम पूर्वानुमान में तेज हवा चलने की आशंका जताई गई थी, हालांकि अब तक तेज हवा नहीं चली है। इसके बावजूद बारिश ने धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में धान की फसल तैयार हो रही है और कई जगहों पर बालियां निकल चुकी हैं। ऐसे में यदि बारिश के साथ तेज हवा चलती है तो फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। किसान लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें डर सता रहा है कि कहीं चक्रवात का असर तेज हुआ तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
रसड़ा। बारिश ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी। सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों की है जो काट कर खेत में छोड़ रखे है। अभी अधिकाश किसानों की धान की फसल खेत में है कुछ किसानों ने धान की फसल काट कर खेत में छोड़ रखे है। रसात से किसानों को फायदा कम नुकसान है।