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नहीं लग रहा बालू के अवैध खनन पर लगाम
Updated Sat, 03 Jun 2017 10:55 PM IST
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बलिया। योगी सरकार के फरमान के बावजूद जनपद में बालू का अवैध खनन बदस्तूर जारी है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में अवैध खनन को लेकर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी लाख दावे करें, लेकिन उस पर अंकुश पूरी तरह से नहीं लग पाया है। पुलिस की मिलीभगत से रोजाना दर्जनों मिनी ट्रकों से अवैध तरीके से बिहार से सटे इलाकों में लाल बालू भी आता है। आसपास के गांवों में सड़क किनारे ही मंडिया भी सजती हैं, लेकिन वन और वाणिज्य कर विभाग की नजर नहीं पड़ती है।
लाल बालू की तस्करी के लिए बिहार की सीमा से सटे नरहीं थाना क्षेत्र के भरौली स्थित गंगा पुल का रास्ता व बैरिया थाना क्षेत्र के घाघरा पर स्थित मांझी पुल का रास्ता है। बिहार के कोइलवर में लाल बालू का सबसे बड़ा खदान है और यहां से निकले ट्रकों को प्रदेश की सीमा में प्रवेश के लिए सबसे नजदीक रास्ता भरौली का गंगा पुल है। लेकिन पिछले तीन सालों से इस पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण बिहार सरकार की ओर से भारी वाहनोें का आवागमन प्रतिबंधित करते हुुए पुल के दोनों सिरे पर लोहे की बैरिकेटिंग लगाई गई है। लेकिन इसके बाद से बालू माफियाओं ने छोटे वाहनों ट्र्रैक्टर, मिनी ट्रक, पिकअप आदि से बालू लाने का काम शुरु कर दिया जो बदस्तूर जारी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लाल बालू को ले आकर भरौली, उजियार, गोविंपुर, सोहांव, बसंतपुर आदि आसपास के गांवों में सड़क किनारे डंप किया जाता है और ट्रकों पर लादकर जनपद के अलावा गैर जिले को भेजा जाता है। ग्रामीणों की मानें तो शाम ढलने के बाद बालू लदे वाहनों का आना शुरु हो जाता है जो भोर तक चलता रहता है। लाल बालू की मंडियां एनएच किनारे अलग-अलग गांवों के सामने सजती हैं लेकिन इस पर वाणिज्य कर व वन विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं जाती है। सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे में कई विभागों की भूमिका है।
इनसेट=
गंगा घाटों पर सफेद बालू का होता है खनन
बलिया। नगर के महावीर घाट, बिचला घाट, कोटवा घाट पर बालू का अवैध खनन खुलेआम जारी है। विगत दिनों शिकायत मिलने पर एसडीएम सदर ने कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया, जिस पर पुलिस ने अगले दिन एक ट्रक को अवैध बालू खनन में पकड़ा। इतना ही नहीं, गंगा घाटों पर खनन साफ दिखाई दे रहा है, जिसे पुलिस भी स्वीकार करती है।
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वर्जन =
सफेद बालू के खनन पर पूरी तरह से रोक है, इसकी यदि कहीं से भी शिकायत मिलती है, उस पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। सभी तटवर्ती थानों को भी निर्देशित किया गया है।
- मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी
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लाल बालू की तस्करी के लिए बिहार की सीमा से सटे नरहीं थाना क्षेत्र के भरौली स्थित गंगा पुल का रास्ता व बैरिया थाना क्षेत्र के घाघरा पर स्थित मांझी पुल का रास्ता है। बिहार के कोइलवर में लाल बालू का सबसे बड़ा खदान है और यहां से निकले ट्रकों को प्रदेश की सीमा में प्रवेश के लिए सबसे नजदीक रास्ता भरौली का गंगा पुल है। लेकिन पिछले तीन सालों से इस पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण बिहार सरकार की ओर से भारी वाहनोें का आवागमन प्रतिबंधित करते हुुए पुल के दोनों सिरे पर लोहे की बैरिकेटिंग लगाई गई है। लेकिन इसके बाद से बालू माफियाओं ने छोटे वाहनों ट्र्रैक्टर, मिनी ट्रक, पिकअप आदि से बालू लाने का काम शुरु कर दिया जो बदस्तूर जारी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लाल बालू को ले आकर भरौली, उजियार, गोविंपुर, सोहांव, बसंतपुर आदि आसपास के गांवों में सड़क किनारे डंप किया जाता है और ट्रकों पर लादकर जनपद के अलावा गैर जिले को भेजा जाता है। ग्रामीणों की मानें तो शाम ढलने के बाद बालू लदे वाहनों का आना शुरु हो जाता है जो भोर तक चलता रहता है। लाल बालू की मंडियां एनएच किनारे अलग-अलग गांवों के सामने सजती हैं लेकिन इस पर वाणिज्य कर व वन विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं जाती है। सूत्रों की मानें तो इस गोरखधंधे में कई विभागों की भूमिका है।
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गंगा घाटों पर सफेद बालू का होता है खनन
बलिया। नगर के महावीर घाट, बिचला घाट, कोटवा घाट पर बालू का अवैध खनन खुलेआम जारी है। विगत दिनों शिकायत मिलने पर एसडीएम सदर ने कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया, जिस पर पुलिस ने अगले दिन एक ट्रक को अवैध बालू खनन में पकड़ा। इतना ही नहीं, गंगा घाटों पर खनन साफ दिखाई दे रहा है, जिसे पुलिस भी स्वीकार करती है।
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सफेद बालू के खनन पर पूरी तरह से रोक है, इसकी यदि कहीं से भी शिकायत मिलती है, उस पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। सभी तटवर्ती थानों को भी निर्देशित किया गया है।
- मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी