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चुनाव बाद गायब हो जाते हैं मुद्दे व वादे
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रतसर। मतदान को लेकर उत्साहित नए मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से परख करने के बाद ही किसी प्रत्याशी को मतदान करने का निर्णय लिया है। युवाओं का कहना है कि प्रत्येक चुनावों में प्रत्याशियों की ओर से युवाओं लुभाया जाता है लेकिन जीतने के बाद कोई उनकी मूलभूत सुविधाओं पर गौर नहीं करता है। जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार की स्थिति दयनीय है।
बीए तृतीय वर्ष की छात्रा साधना का कहना है कि जनपद में शिक्षा की स्थिति अत्यंत दयनीय है। क्षेत्र में एक भी राजकीय महिला महाविद्यालय नहीं है जिससे छात्राओं को 20 किलोमीटर की दूरी तय कर महाविद्यालय जाना पड़ता है। किसी ने महिला महाविद्यालय की स्थापना नहीं कराई। उच्चशिक्षा को बढ़ावा देने वाले को ही वोट देंगे।
एमए प्रथम वर्ष की छात्रा प्रियंका का कहना है कि जनपद में राजकीय मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने से रोजगारपरक शिक्षा के लिए लड़कियों को बड़े शहरों में जाना पड़ता है। चुनावोें में प्रत्याशी वादा करते हैं लेकिन जीतने के बाद वादा भूल जाते हैं। इस चुनाव सोच समझ कर वोट देंगे।
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बीए प्रथम वर्ष की छात्रा समीक्षा पांडेय का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ी-बड़ी बातें होती है लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। जनपद में एकमात्र महिला थाना होना ही गवाह है कि इस मुद्दे के प्रति नेता कितने गंभीर हैं। ग्रामीण अंचलों में आज भी महिलाएं तमाम तरह की हिंसा की शिकार होती हैं लेकिन महिला थाना नहीं होने से उनको न्याय नहीं मिलता।
एमए की छात्रा चंचल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा का सपना साकार करना चुनौती है। क्षेत्र में महिला महाविद्यालय होना चाहिए। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद लड़कियों को बीए, एमए करने के लिए दूर जाना पड़ता है। इससे आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से तरह-तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।
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बीए तृतीय वर्ष की छात्रा साधना का कहना है कि जनपद में शिक्षा की स्थिति अत्यंत दयनीय है। क्षेत्र में एक भी राजकीय महिला महाविद्यालय नहीं है जिससे छात्राओं को 20 किलोमीटर की दूरी तय कर महाविद्यालय जाना पड़ता है। किसी ने महिला महाविद्यालय की स्थापना नहीं कराई। उच्चशिक्षा को बढ़ावा देने वाले को ही वोट देंगे।
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एमए प्रथम वर्ष की छात्रा प्रियंका का कहना है कि जनपद में राजकीय मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने से रोजगारपरक शिक्षा के लिए लड़कियों को बड़े शहरों में जाना पड़ता है। चुनावोें में प्रत्याशी वादा करते हैं लेकिन जीतने के बाद वादा भूल जाते हैं। इस चुनाव सोच समझ कर वोट देंगे।
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बीए प्रथम वर्ष की छात्रा समीक्षा पांडेय का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ी-बड़ी बातें होती है लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। जनपद में एकमात्र महिला थाना होना ही गवाह है कि इस मुद्दे के प्रति नेता कितने गंभीर हैं। ग्रामीण अंचलों में आज भी महिलाएं तमाम तरह की हिंसा की शिकार होती हैं लेकिन महिला थाना नहीं होने से उनको न्याय नहीं मिलता।
एमए की छात्रा चंचल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा का सपना साकार करना चुनौती है। क्षेत्र में महिला महाविद्यालय होना चाहिए। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद लड़कियों को बीए, एमए करने के लिए दूर जाना पड़ता है। इससे आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से तरह-तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।