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एसडीएम बने श्याम बाबू का जाति प्रमाण पत्र अवैध
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बैरिया। जिलाधिकारी के आदेश पर तहसीलदार की जांच में पीसीएस 2016 में चयनित इब्राहिमाबाद उपरवार निवासी श्याम बाबू का अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र अवैध पाया गया।
लोक सेवा आयोग प्रयागराज के सचिव जगदीश ने श्यामबाबू की ओर से लगाए गए अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र पर सवाल उठाते हुए उसे सत्यापन के लिए भेजा था। उन्होंने पत्र में कहा था कि बहुत लोग अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। इसके चलते आयोग ने नवीनतम जाति प्रमाण पत्र जो छह माह से अधिक पुराना न हो, मांग की है। इस पर जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने तहसीलदार रामनरायण वर्मा को जांच सौंपी थी। डीएम के आदेश पर तहसीलदार ने श्यामबाबू को नोटिस भेजकर साक्ष्य मांगा था। श्यामबाबू ने जवाब दिया कि हमारे पूर्वजों के पास जमीन नहीं है। इसलिए गोन्हियाछपरा निवासी परमानंद साह का 1359 फसली की खतौनी लगाए हैं। वहीं, कक्षा पांच व आठ की टीसी लगी है। तहसीलदार ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट भेजते हुए उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय के हवाला देते हुए कहा है कि कई प्रकरणों में विधि व्यवस्था प्रतिपादित की गई है। किसी व्यक्ति के जाति का निर्धारण उसके पिता की जाति से होता है, रिश्तेदार की जाति से नहीं। यह भी बताया है कि टीसी प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर की नकल राष्ट्रपति के आदेश के बहुत बाद का है। इसके अलावा आवेदक अपने पूर्वज के नाम अंकित 1359 फसली की खतौनी भी प्रस्तुत नहीं की है जिससे शासनादेश के अनुसार श्यामबाबू का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र वैध नहीं है।
उल्लेखनीय है कि श्याम बाबू का 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल पद पर चयनित हुए थे। सिपाही की नौकरी लगने के बाद भी श्याम बाबू ने तैयारी करते हुए पीसीएस 2016 की परीक्षा दी थी। जिसमें उनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था।
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तहसीलदार रामनरायण वर्मा ने कहा कि श्याम बाबू को नोटिस भेजकर अनुसूचित जनजाति होने का दस्तावेज मांगा गया था। बताया कि दस्तावेज के मुताबिक 1359 फसली का खतौनी या टीसी, परिवार रजिस्टर का नकल 1950 से पहले का परिवार में किसी भी सदस्य या पूर्वज का होना चाहिए, लेकिन श्यामबाबू द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है।
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लोक सेवा आयोग प्रयागराज के सचिव जगदीश ने श्यामबाबू की ओर से लगाए गए अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र पर सवाल उठाते हुए उसे सत्यापन के लिए भेजा था। उन्होंने पत्र में कहा था कि बहुत लोग अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। इसके चलते आयोग ने नवीनतम जाति प्रमाण पत्र जो छह माह से अधिक पुराना न हो, मांग की है। इस पर जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने तहसीलदार रामनरायण वर्मा को जांच सौंपी थी। डीएम के आदेश पर तहसीलदार ने श्यामबाबू को नोटिस भेजकर साक्ष्य मांगा था। श्यामबाबू ने जवाब दिया कि हमारे पूर्वजों के पास जमीन नहीं है। इसलिए गोन्हियाछपरा निवासी परमानंद साह का 1359 फसली की खतौनी लगाए हैं। वहीं, कक्षा पांच व आठ की टीसी लगी है। तहसीलदार ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट भेजते हुए उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय के हवाला देते हुए कहा है कि कई प्रकरणों में विधि व्यवस्था प्रतिपादित की गई है। किसी व्यक्ति के जाति का निर्धारण उसके पिता की जाति से होता है, रिश्तेदार की जाति से नहीं। यह भी बताया है कि टीसी प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर की नकल राष्ट्रपति के आदेश के बहुत बाद का है। इसके अलावा आवेदक अपने पूर्वज के नाम अंकित 1359 फसली की खतौनी भी प्रस्तुत नहीं की है जिससे शासनादेश के अनुसार श्यामबाबू का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र वैध नहीं है।
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उल्लेखनीय है कि श्याम बाबू का 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल पद पर चयनित हुए थे। सिपाही की नौकरी लगने के बाद भी श्याम बाबू ने तैयारी करते हुए पीसीएस 2016 की परीक्षा दी थी। जिसमें उनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ था।
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तहसीलदार रामनरायण वर्मा ने कहा कि श्याम बाबू को नोटिस भेजकर अनुसूचित जनजाति होने का दस्तावेज मांगा गया था। बताया कि दस्तावेज के मुताबिक 1359 फसली का खतौनी या टीसी, परिवार रजिस्टर का नकल 1950 से पहले का परिवार में किसी भी सदस्य या पूर्वज का होना चाहिए, लेकिन श्यामबाबू द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है।