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कृषि रक्षा की दवाईयों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं
Updated Thu, 13 Sep 2018 12:28 AM IST
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बलिया। जिले के कृषि रक्षा विभाग की अधिकांश इकाईयां पूरी तरह बेहाल हैं। फसलों की रक्षा करने वाली दवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए माकूल इंतजाम नहीं है। कई इकाइयों के भवन जर्जर होकर गिर चुके हैं तो कई किराए पर चल रहे हैं। विभाग की ओर से इस बाबत शासन को पत्र भेजा गया है लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई कवायद नहीं की गई है।
किसानों के फसलों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ब्लॉक में एक कृषि रक्षा इकाई स्थापित है। इन इकाईयों से किसानों को फसलों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए दवाईयां उपलब्ध कराई जाती है। जिले में कुल 17 कृषि रक्षा इकाईयां व एक बफर गोदाम स्थापित हैं लेकिन दशकों बाद भी सात ब्लाकों में किराए के भवन में यह इकाईयां संचालित की जाती हैं। इसमें मुरली छपरा, बेलहरी, बेरुआरबारी, नवानगर, मनियर, चिलकहर व सोहांव ब्लाक हैं। नगरा ब्लॉक परिसर में स्थित कृषि रक्षा इकाई ध्वस्त हो चुकी है और इसका संचालन बीज गोदाम पर किया जा रहा है। इसी तरह पंदह ब्लॉक परिसर में स्थित कृषि रक्षा इकाई भी बेहाल है। इस नौ केंद्रों के नया बनाने का प्रस्ताव जिला कृषि रक्षा विभाग की ओर से कृषि रक्षा के उप निदेशक आजमगढ़ को भेजा गया है। इसी तरह अन्य आठ ब्लाकों के परिसर में स्थित कृषि रक्षा इकाईयां पूरी तरह जर्जर हो गई हैं। इनके मरम्मत का भी प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। इतना ही नहीं जिला मुख्यालय पर स्थित कृषि रक्षा का बफर गोदाम भी पूरी जर्जर है। कृषि रक्षा इकाइयों के जर्जर होने के कारण फसलों की सुरक्षा को लेकर दवाइयों को रखने के लिए कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बरसात के दिनों में फसलों से संबंधित दवाइयों को बचाने के लिए कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ती है।
जला कृषि रक्षा अधिकारी प्रियानंदा ने कहा कि अधिकांश कृषि रक्षा इकाइयां जर्जर हो गई हैं और इसके अलावा कई इकाईयां सालों से किराए के भवन में संचालित हो रही हैं। इस बाबत उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया हैं।
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किसानों के फसलों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ब्लॉक में एक कृषि रक्षा इकाई स्थापित है। इन इकाईयों से किसानों को फसलों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए दवाईयां उपलब्ध कराई जाती है। जिले में कुल 17 कृषि रक्षा इकाईयां व एक बफर गोदाम स्थापित हैं लेकिन दशकों बाद भी सात ब्लाकों में किराए के भवन में यह इकाईयां संचालित की जाती हैं। इसमें मुरली छपरा, बेलहरी, बेरुआरबारी, नवानगर, मनियर, चिलकहर व सोहांव ब्लाक हैं। नगरा ब्लॉक परिसर में स्थित कृषि रक्षा इकाई ध्वस्त हो चुकी है और इसका संचालन बीज गोदाम पर किया जा रहा है। इसी तरह पंदह ब्लॉक परिसर में स्थित कृषि रक्षा इकाई भी बेहाल है। इस नौ केंद्रों के नया बनाने का प्रस्ताव जिला कृषि रक्षा विभाग की ओर से कृषि रक्षा के उप निदेशक आजमगढ़ को भेजा गया है। इसी तरह अन्य आठ ब्लाकों के परिसर में स्थित कृषि रक्षा इकाईयां पूरी तरह जर्जर हो गई हैं। इनके मरम्मत का भी प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है। इतना ही नहीं जिला मुख्यालय पर स्थित कृषि रक्षा का बफर गोदाम भी पूरी जर्जर है। कृषि रक्षा इकाइयों के जर्जर होने के कारण फसलों की सुरक्षा को लेकर दवाइयों को रखने के लिए कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बरसात के दिनों में फसलों से संबंधित दवाइयों को बचाने के लिए कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ती है।
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जला कृषि रक्षा अधिकारी प्रियानंदा ने कहा कि अधिकांश कृषि रक्षा इकाइयां जर्जर हो गई हैं और इसके अलावा कई इकाईयां सालों से किराए के भवन में संचालित हो रही हैं। इस बाबत उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया हैं।
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