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सुधर नहीं पा रही ई-डिस्ट्रिक्ट योजना
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:06 AM IST
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बलिया। तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में ई-डिस्ट्रिक्ट योजना सुधर नहीं पा रही है। तहसीलकर्मियों और लेखपालों की मनमानी लोगों पर भारी पड़ रही है। प्रमाण पत्रों के लिए लोग चक्कर पे चक्कर लगा रहे लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं। जबकि नियमों के विपरीत कार्य करने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों को घर बैठे आठ विभागों की 26 सुविधाएं देने के लिए वर्ष 2012 में शासन की ओर इन सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए जनसेवा केन्द्र स्थापित कराए गए थे। योजना के तहत गांवों में स्थित जनसेवा केन्द्रों से सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और अधिकारियों की ओर से एसएसडीजी (स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे) के माध्यम से जारी करने का प्रावधान किया गया। जिले में कुल 540 जनसेवा केन्द खोले गए। वर्ष 2015 में जिले को ई-डिस्ट्रिक्ट योजना में शामिल किया गया और जनसेवा केन्द्रों से मिलने वाली सभी सुविधाओं को भी ई-डिस्ट्रिक्ट सर्वर से जोड़ दिया गया। प्रावधान किया गया कि किसी भी प्रमाण पत्र का निस्तारण अधिकतम 15 दिनों में हो जाए और ऐसा नहीं होने पर जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के वेतन से कटौती की जाए। जिले स्तर पर अपर जिलाधिकारी को इसके लिए बतौर नोडल अधिकारी बनाया गया। लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। निर्धारित समय सीमा के तहत आवेदनों का निस्तारण नहीं हो रहा। जबकि लोग प्रमाणपत्रों के लिए चक्कर लगा रहे।
खासकर राजस्व विभाग आय और जाति प्रमाण पत्रों के मामले में खूब मनमानी कर रहा। कई लेखपाल जहां आवेदनों को कई दिनों बाद बिना कार्रवाई के ही संबंधित तहसीलदार के पोर्टल पर वापस कर दे रहे हैं तो कई प्रमाण पत्र डिजिटल हस्ताक्षर के अभाव में कई दिनों तक तहसीलदार के पोर्टल पर पड़े रह जाते हैं। बतौर उदाहरण सदर तहसील के सोहांव की प्रियंका के जाति प्रमाण पत्र के आवेदन संख्या 58652 को लेखपाल प्रीतेश कुमार यादव की ओर से दो बार बिना कार्रवाई किए वापस किया गया है जिसके चलते 25 दिनों बाद भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है। इसी तरह शहर के विशुनीपुर निवासी आलोक के आय प्रमाण पत्र के आवेदन संख्या 72534 तथा पायल के आय प्रमाण आवेदन संख्या 72537 की जांच कर लेखपाल सतीश तिवारी ने एक सप्ताह पहले तहसीलदार के पोर्टल पर हस्तांतरित किया लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है।
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कोट
ई-डिस्ट्रिक्ट योजनार के तहत 15 दिनों के अंदर आवेदनों का निस्तारण करना है। बिना कार्रवाई किए आवेदन वापस करने या लंबित रखने के मामले की जांच चार अगस्त को विशेष ड्राइव चला कर किया जाएगा। इसमें दोषी मिले कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा। उनके निर्देशानुसार कार्रवाई होगी।
अभिजात सिंह, जिला प्रबंधक, ई-डिस्ट्रिक्ट
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ग्रामीणों को घर बैठे आठ विभागों की 26 सुविधाएं देने के लिए वर्ष 2012 में शासन की ओर इन सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए जनसेवा केन्द्र स्थापित कराए गए थे। योजना के तहत गांवों में स्थित जनसेवा केन्द्रों से सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और अधिकारियों की ओर से एसएसडीजी (स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे) के माध्यम से जारी करने का प्रावधान किया गया। जिले में कुल 540 जनसेवा केन्द खोले गए। वर्ष 2015 में जिले को ई-डिस्ट्रिक्ट योजना में शामिल किया गया और जनसेवा केन्द्रों से मिलने वाली सभी सुविधाओं को भी ई-डिस्ट्रिक्ट सर्वर से जोड़ दिया गया। प्रावधान किया गया कि किसी भी प्रमाण पत्र का निस्तारण अधिकतम 15 दिनों में हो जाए और ऐसा नहीं होने पर जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के वेतन से कटौती की जाए। जिले स्तर पर अपर जिलाधिकारी को इसके लिए बतौर नोडल अधिकारी बनाया गया। लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। निर्धारित समय सीमा के तहत आवेदनों का निस्तारण नहीं हो रहा। जबकि लोग प्रमाणपत्रों के लिए चक्कर लगा रहे।
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खासकर राजस्व विभाग आय और जाति प्रमाण पत्रों के मामले में खूब मनमानी कर रहा। कई लेखपाल जहां आवेदनों को कई दिनों बाद बिना कार्रवाई के ही संबंधित तहसीलदार के पोर्टल पर वापस कर दे रहे हैं तो कई प्रमाण पत्र डिजिटल हस्ताक्षर के अभाव में कई दिनों तक तहसीलदार के पोर्टल पर पड़े रह जाते हैं। बतौर उदाहरण सदर तहसील के सोहांव की प्रियंका के जाति प्रमाण पत्र के आवेदन संख्या 58652 को लेखपाल प्रीतेश कुमार यादव की ओर से दो बार बिना कार्रवाई किए वापस किया गया है जिसके चलते 25 दिनों बाद भी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है। इसी तरह शहर के विशुनीपुर निवासी आलोक के आय प्रमाण पत्र के आवेदन संख्या 72534 तथा पायल के आय प्रमाण आवेदन संख्या 72537 की जांच कर लेखपाल सतीश तिवारी ने एक सप्ताह पहले तहसीलदार के पोर्टल पर हस्तांतरित किया लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है।
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ई-डिस्ट्रिक्ट योजनार के तहत 15 दिनों के अंदर आवेदनों का निस्तारण करना है। बिना कार्रवाई किए आवेदन वापस करने या लंबित रखने के मामले की जांच चार अगस्त को विशेष ड्राइव चला कर किया जाएगा। इसमें दोषी मिले कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा। उनके निर्देशानुसार कार्रवाई होगी।
अभिजात सिंह, जिला प्रबंधक, ई-डिस्ट्रिक्ट