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जलस्तर खिसका, पेयजल संकट बढ़ा
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बेल्थरारोड। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। इसके चलते अभी से भूजल स्तर नीचे गिरना शुरू हो गया है। इससे पेयजल संकट गहराने लगा है। भूजल स्तर के नीचे गिरने के चलते जिले के अधिकतर हैंडपंप बेकार साबित हो रहे हैं। इनसे या तो पानी नहीं आ रहा है या फिर गंदा पानी आ रहा है। इसके चलते लोगों को पीने के पानी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में कुल 47 हजार के आस पास इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें 44 हजार हैंडपंप ग्रामीण इलाकों में और करीब तीन हजार हैंडपंप नगरीय इलाकों में लगे हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता आइम हुसैन ने बताया कि जिले में अभी जलस्तर कम होने की सूचना किसी भी इलाके से नहीं मिली है। न ही हैंडपंपों ने पानी ही छोड़ा है। संभावना जताई कि आनेवाले दिनों में भीषण गर्मी पड़ने पर जलस्तर कम हो सकता है। बताया कि वैसे हैंडपंपों के खराब होने पर उन्हें ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है। इसके लिए जिला पंचायत से उन्हें पैसा भी दिया जाता है। कहा कि इन नलकूपों की बोरिंग काफी डीप की गई है और जलस्तर कम होने की दशा में यह परियोजनाएं प्रभावित नहीं होंगी। कहा कि प्रत्येक परियोजना से दो से चार गांवों को पाइप लाइन से पेयजल मुहैया कराया जाता है। रिबोरिंग के लिए सभी ब्लाकों से प्रस्ताव मांगा गया है। वहीं जलाशय के सूखने से बदतर हो जा रही स्थितिपूर्व में हर गांव में एक बड़ा तालाब होता था जो वाटर लेवल मैनेजमेंट के काम आता था। इससे जलस्तर नीचे नहीं जाता था और लोगों को परेशानी भी नहीं होती थी। आंकड़ों के अनुसार जनपद के 17 विकास खंडों में कुल 1632 पोखरे है जिनमें 1032 पोखरे सूख चुके हैं। इसके चलते वाटर लेवल नीचे चला गया है।
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जिले में कुल 47 हजार के आस पास इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें 44 हजार हैंडपंप ग्रामीण इलाकों में और करीब तीन हजार हैंडपंप नगरीय इलाकों में लगे हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता आइम हुसैन ने बताया कि जिले में अभी जलस्तर कम होने की सूचना किसी भी इलाके से नहीं मिली है। न ही हैंडपंपों ने पानी ही छोड़ा है। संभावना जताई कि आनेवाले दिनों में भीषण गर्मी पड़ने पर जलस्तर कम हो सकता है। बताया कि वैसे हैंडपंपों के खराब होने पर उन्हें ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है। इसके लिए जिला पंचायत से उन्हें पैसा भी दिया जाता है। कहा कि इन नलकूपों की बोरिंग काफी डीप की गई है और जलस्तर कम होने की दशा में यह परियोजनाएं प्रभावित नहीं होंगी। कहा कि प्रत्येक परियोजना से दो से चार गांवों को पाइप लाइन से पेयजल मुहैया कराया जाता है। रिबोरिंग के लिए सभी ब्लाकों से प्रस्ताव मांगा गया है। वहीं जलाशय के सूखने से बदतर हो जा रही स्थितिपूर्व में हर गांव में एक बड़ा तालाब होता था जो वाटर लेवल मैनेजमेंट के काम आता था। इससे जलस्तर नीचे नहीं जाता था और लोगों को परेशानी भी नहीं होती थी। आंकड़ों के अनुसार जनपद के 17 विकास खंडों में कुल 1632 पोखरे है जिनमें 1032 पोखरे सूख चुके हैं। इसके चलते वाटर लेवल नीचे चला गया है।
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