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सांसद आदर्श गांव के ग्रामीणों ने मतदान के बहिष्कार का किया ऐलान
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रामगढ़। कटान रोधी प्रोजेक्ट के खारिज होने से नाराज सांसद आदर्श गांव केहरपुर के ग्रामीणों ने सोमवार को आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। ग्रामीणों ने आने वाले चुनाव का बहिष्कार करने का पोस्टर भी सुघर छपरा ढाले पर लगा दिया और विरोध का आगाज कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद व विधायक की लापरवाही के चलते केहरपुर को बाढ़ व कटान से बचाने के लिए बना प्रोजेक्ट तकनीकी सलाहकार समिति लखनऊ से खारिज हो गया। ऐसे में गांव को आने वाले बाढ़ के समय में गंगा की कहर से बचाना मुश्किल कार्य होगा। ग्राम प्रधान विजय कांत पांडेय ने केहरपुर गांव को गंगा की कटान से बचाने के लिए जिला अधिकारी से लगायत मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई। लेकिन कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। बताया कि बाढ़ विभाग के अधिकारियों ने 24 करोड़ 95 लाख रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर शासन में भेजा था। लेकिन विभाग ने खारिज कर दिया।
अब यह नहीं समझ आ रहा है कि आखिर अब गांव को बचाने के लिए कौन सा उपाय होगा। केहरपुर निवासी बबन ओझा का कहना है कि हम सब ग्रामीणों ने 2019 के चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है साथ ही वोट बहिष्कार का बैनर भी लगा दिया है। त्रिभुवन ओझा का कहना है कि अगर गांव को बचाने के लिए शासन प्रशासन थोड़ा भी गंभीर होता तो यह नौबत नहीं आती। शिवजी सिंह का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ही प्रोजेक्ट खारिज हुआ। सोमवार को पीड़ितों ने चेताया कि अब भी प्रशासन मूकदर्शक बना रहा तो वह सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि गांव नहीं बचेगा तो वोट कैसा।
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वर्जन:::
बाढ़ व कटान प्रभावित केहर पुर को सुरक्षित रखने के लिए मैं हमेशा तैयार हूं। प्रोजेक्ट खारिज होने के मामले में शासन स्तर पर बातचीत कर इसका जल्द ही समाधान कराया जाएगा।
- भरत सिंह, सांसद, बलिया
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ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद व विधायक की लापरवाही के चलते केहरपुर को बाढ़ व कटान से बचाने के लिए बना प्रोजेक्ट तकनीकी सलाहकार समिति लखनऊ से खारिज हो गया। ऐसे में गांव को आने वाले बाढ़ के समय में गंगा की कहर से बचाना मुश्किल कार्य होगा। ग्राम प्रधान विजय कांत पांडेय ने केहरपुर गांव को गंगा की कटान से बचाने के लिए जिला अधिकारी से लगायत मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई। लेकिन कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। बताया कि बाढ़ विभाग के अधिकारियों ने 24 करोड़ 95 लाख रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर शासन में भेजा था। लेकिन विभाग ने खारिज कर दिया।
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अब यह नहीं समझ आ रहा है कि आखिर अब गांव को बचाने के लिए कौन सा उपाय होगा। केहरपुर निवासी बबन ओझा का कहना है कि हम सब ग्रामीणों ने 2019 के चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है साथ ही वोट बहिष्कार का बैनर भी लगा दिया है। त्रिभुवन ओझा का कहना है कि अगर गांव को बचाने के लिए शासन प्रशासन थोड़ा भी गंभीर होता तो यह नौबत नहीं आती। शिवजी सिंह का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ही प्रोजेक्ट खारिज हुआ। सोमवार को पीड़ितों ने चेताया कि अब भी प्रशासन मूकदर्शक बना रहा तो वह सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि गांव नहीं बचेगा तो वोट कैसा।
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बाढ़ व कटान प्रभावित केहर पुर को सुरक्षित रखने के लिए मैं हमेशा तैयार हूं। प्रोजेक्ट खारिज होने के मामले में शासन स्तर पर बातचीत कर इसका जल्द ही समाधान कराया जाएगा।
- भरत सिंह, सांसद, बलिया