बहराइच। खैरीघाट के पिपरिया स्थित चंडी माता मंदिर परिसर में चल रहे श्री चंडी महायज्ञ के अवसर पर सोमवार देर शाम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में कविताओं, गीतों और शायरी की ऐसी प्रस्तुति हुई कि पूरा माहौल साहित्यिक रंग में रंग गया। हर रचना पर तालियों और वाहवाही की गूंज रही।
कार्यक्रम की शुरुआत बाराबंकी के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. ओम शर्मा ओम की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद लखनऊ की वंदना अनम ने- दरिया अश्कों का पार कर लूंगी… सुनाकर तालियां बटोरीं। बस्ती से आए कवि लोकेश त्रिपाठी ने-मर गई मां तो बट गए जेवर, बट गया घर पिता के मरते ही… सुनाकर लोगों को भावुक कर दिया। बाराबंकी के विनय शुक्ल ने जोशीली राष्ट्रवादी कविता प्रस्तुत कर उत्साह भर दिया। लखीमपुर खीरी के गीतकार ज्ञान प्रकाश आकुल ने पढ़ा- हम दोनों में इच्छाएं हैं, हम दोनों में प्यार नहीं है।
डॉ. ओम शर्मा ओम ने-बूढ़े मां-बाप को भगा करके लोग कुत्तों को पाल लेते हैं… सुनाकर लोगों को झकझोरा। इसके अलावा डॉ. सर्वेश त्रिपाठी, अमन सिंह, राम संवारे चातक और कार्यक्रम संयोजक योगेंद्र योगी ने भी अपनी कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। अध्यक्षता साहित्य भूषण रामकरण सैलानी ने और संचालन हास्य कवि सौरभ जायसवाल ने किया। कार्यक्रम में मंदिर के पीठाधीश पंडित मुकुंद राम मिश्र सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु और साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे।