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बहराइच में बाढ़ का खतरा बढ़ा, लाल निशान के करीब पहुंची घाघरा
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 30 Jun 2015 10:13 PM IST
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बारिश के कारण घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। तीन बैराज से नदी में एक लाख 65 हजार क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। इसके चलते नदी का जलस्तर 18 सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में बसे गांव के ग्रामीण दहशत में हैं।
केंद्रीय जलायोग केंद्र घाघराघाट के मापक जगदीश प्रसाद ने बताया कि सोमवार रात में नदी के जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से इजाफा हुआ है, जिसके चलते 18 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा है। इस समय नदी एल्गिन ब्रिज पर 105.936 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 106.07 है।
ऐसे में नदी सिर्फ 0.134 मीटर ही नीचे है। उन्होंने बताया कि मंगलवार दोपहर से जलस्तर स्थिर हो गया है लेकिन रात में फिर पानी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। उधर, जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते जरवलरोड के आदमपुर रेवली तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ रहा है, जिसके चलते तटबंध को तो खतरा है ही, बाढ़ की स्थिति की भी आहट मिल रही है।
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वहीं महसी के पिपरी, कपरवल, मंगरवल, मुंसारी, मुरौवा, घूरदेवी व बौंडी के ग्रामीण भी सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए हैं। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के सहायक अभियंता एसके वर्मा ने बताया कि तराई के साथ नेपाल के पहाड़ों पर भी वर्षा हो रही है। इसी के चलते जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
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केंद्रीय जलायोग केंद्र घाघराघाट के मापक जगदीश प्रसाद ने बताया कि सोमवार रात में नदी के जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से इजाफा हुआ है, जिसके चलते 18 सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा है। इस समय नदी एल्गिन ब्रिज पर 105.936 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 106.07 है।
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ऐसे में नदी सिर्फ 0.134 मीटर ही नीचे है। उन्होंने बताया कि मंगलवार दोपहर से जलस्तर स्थिर हो गया है लेकिन रात में फिर पानी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। उधर, जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते जरवलरोड के आदमपुर रेवली तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ रहा है, जिसके चलते तटबंध को तो खतरा है ही, बाढ़ की स्थिति की भी आहट मिल रही है।
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वहीं महसी के पिपरी, कपरवल, मंगरवल, मुंसारी, मुरौवा, घूरदेवी व बौंडी के ग्रामीण भी सुरक्षित स्थानों की तलाश में जुट गए हैं। चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के सहायक अभियंता एसके वर्मा ने बताया कि तराई के साथ नेपाल के पहाड़ों पर भी वर्षा हो रही है। इसी के चलते जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।