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Bahraich News: जंगल में पानी, गांवों में दहशत, टहल रहे बाघ-तेंदुए

Thu, 01 Oct 2026 12:34 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:34 AM IST
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Water in the forest, panic in the villages; tigers and leopards on the prowl.
बहराइच। बारिश से जंगल में भरा पानी ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बन गया है। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में बाघ और तेंदुओं की चहलकदमी आबादी के पास बढ़ गई है। शाम होते ही तेंदुओं की गुर्राहट और बाघों की दहाड़ से लोग सहम जा रहे हैं। कतर्नियाघाट के जंगल से सटे गांवों में दिन ढलते ही घरों में कैद होने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। धान-गन्ने की रखवाली और मवेशियों की निगरानी भी जोखिम भरी हो गई है।
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जंगल गुलरिया के संपतपुरवा में सोमवार सुबह करीब साढ़े छह बजे वन सीमा के पास पिपरमिंट की टंकी पर तेंदुआ बैठा दिखाई दिया। इससे पहले आनंदनगर में भी तेंदुए की चहलकदमी देखी गई थी। पिछले चार दिनों से संपतपुरवा, बिछिया, गिरिजापुरी, कैलाशपुरी और निशानगाड़ा के आसपास शाम होते ही तेंदुए की मौजूदगी देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर भी तेंदुए और बाघ का कुनबा दिखाई दे रहा है।
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आनंदनगर में आठ सितंबर को तेंदुए ने गांव में घुसकर राजवीर को मार डाला था। मिहींपुरवा के वार्ड छह में भी तेंदुआ सिंचाई विभाग के बंद स्टोर में लगाए गए पिंजरे में फंस चुका है। इसके बावजूद आसपास फिर तेंदुए की दस्तक से लोग दहशत में हैं। सुजौली में देर रात घर के बाहर तेंदुआ सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से उसकी मौजूदगी महसूस हो रही है।
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सुरक्षित सूखी जगह और भोजन की तलाश
सेवानिवृत्त वनाधिकारी एवं विशेषज्ञ एके गौतम के अनुसार बाढ़ और जलभराव से जंगल और गांव के बीच का फर्क कम हो गया है। जंगल के अधिकांश हिस्से में पानी भरने से वन्यजीवों के लिए सुरक्षित सूखी जगह और भोजन की तलाश चुनौती बनी है। इसी कारण आबादी और खेतों के किनारे उनकी मौजूदगी बढ़ी है। सितंबर के पहले पखवारे में भी बाढ़ के दौरान तेंदुओं के आबादी की ओर आने की घटनाएं सामने आई थीं।
खेतों की रखवाली भी बनी जोखिम
भेंड़हन पुरवा-चहलवा में सोमवार को धान के खेत की रखवाली कर रहे गुड्डू पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। कमर और हाथ में चोट लगने के बावजूद उसने संघर्ष कर जान बचाई। यहां पिंजरा लगाया गया है। धान की फसल तैयार होने के कारण खेतों की रखवाली जरूरी है, लेकिन अंधेरा होते ही वहां जाना खतरे से खाली नहीं है।

चार गांवों में हमले और मौजूदगी से चिंता
संपतपुरवा निवासी सूर्यसेन तेंदुए को भगाने के दौरान घायल हुए। गुप्तापुरवा निवासी मुन्ना और उनकी पत्नी सुनीता देवी भी सोमवार को तेंदुए के हमले में घायल हुए। आनंदनगर में तेंदुए ने पालतू कुत्ते का शिकार किया। टेपरा बाजार निवासी अतुल जायसवाल के घर के बाहर भी तेंदुआ सीसीटीवी में कैद हुआ। मिहींपुरवा के जंगल गुलरिया, संपतपुरवा, धर्मपुर रेतिया, रामपुर रेतिया, आनंदनगर, टेपरा बाजार और चहलवा में जलभराव और वन्यजीवों की आवाजाही से ग्रामीणों की दिनचर्या बदल गई है। डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों को शाम के बाद अकेले खेतों में न जाने और बच्चों को अकेला नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है। बाघ या तेंदुआ दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे भगाने की कोशिश न करें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
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