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Bahraich News: माइनर में दशकों बाद भी नहीं पहुंचा पानी, किसान परेशान
Thu, 21 Nov 2024 02:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Thu, 21 Nov 2024 02:18 AM IST
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हुजूरपुर के जिगनिया जशकरन में सूखी पड़ी माइनर।
हुजूरपुर (बहराइच)। विकासखंड क्षेत्र में जिगिनिया जसकरन गांव के पास से एक माइनर का निर्माण करवाया गया। माइनर निर्माण में लाखों खर्च किए गए और इससे एक दर्जन से अधिक गांवों को सिंचित करने का दावा किया गया, लेकिन दशकों बीतने के बाद भी किसानों को पानी नसीब नहीं हुआ है। इससे किसान परेशान हैं।
जिले में सिंचाई व्यवस्था की क्या स्थिति है, इसका एक उदाहरण हुजूरपुर विकासखंड में देखने को मिलता है। जहां किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सरयू नहर खंड तरबगंज शाखा से जिगिनिया जसकरन के पास सालों पूर्व माइनर बनवाई गई थी। इससे पातूपुर, रामपुर, त्रिकोलिया बसंतपुर समेत दर्जनों गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने का दावा किया गया था।
जिले हुक्मरानों का यह दावा दशकों बाद भी कागजों में ही सिमटा हुआ है और किसानों को आज तक पानी नहीं मिला है। वहीं किसानों का आरोप है कि माइनर निर्माण के लिए उनकी जमीनों को अधिग्रहित किया गया था और उसका उचित मुआवजा भी नहीं दिया गया था। बसंतपुर के सैराठी पुरवा निवासी प्रमोद यादव ने बताया कि माइनर के निर्माण में उनकी चार बीघा जमीन के एवज में मात्र 88000 मुआवजा मिला था।
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वहीं आज तक खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पंहुचा। इसी गांव के हरिश्चंद्र यादव बताते हैं, कि उनकी भी लाखों कीमत की जमीन कौड़ियों में अधिग्रहित की गई थी। यही हाल काशीराम, घसीटे, कुन्ना, तीरथ, नानमून, शिवराज, आनंद, भगौती, बुद्धि आदि ने भी बताया और माइनर में पानी की मांग की।
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जिले में सिंचाई व्यवस्था की क्या स्थिति है, इसका एक उदाहरण हुजूरपुर विकासखंड में देखने को मिलता है। जहां किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सरयू नहर खंड तरबगंज शाखा से जिगिनिया जसकरन के पास सालों पूर्व माइनर बनवाई गई थी। इससे पातूपुर, रामपुर, त्रिकोलिया बसंतपुर समेत दर्जनों गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने का दावा किया गया था।
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जिले हुक्मरानों का यह दावा दशकों बाद भी कागजों में ही सिमटा हुआ है और किसानों को आज तक पानी नहीं मिला है। वहीं किसानों का आरोप है कि माइनर निर्माण के लिए उनकी जमीनों को अधिग्रहित किया गया था और उसका उचित मुआवजा भी नहीं दिया गया था। बसंतपुर के सैराठी पुरवा निवासी प्रमोद यादव ने बताया कि माइनर के निर्माण में उनकी चार बीघा जमीन के एवज में मात्र 88000 मुआवजा मिला था।
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वहीं आज तक खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं पंहुचा। इसी गांव के हरिश्चंद्र यादव बताते हैं, कि उनकी भी लाखों कीमत की जमीन कौड़ियों में अधिग्रहित की गई थी। यही हाल काशीराम, घसीटे, कुन्ना, तीरथ, नानमून, शिवराज, आनंद, भगौती, बुद्धि आदि ने भी बताया और माइनर में पानी की मांग की।