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धरने पर बैठे ग्राम विकास अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 11 Aug 2015 10:26 PM IST
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श्रावस्ती। मनरेगा योजना में ग्राम पंचायतों में 60 प्रतिशत श्रम व 40 प्रतिशत सामग्री अनुपात के विचलन में सीधे ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान व तकनीकी सहायक को जिम्मेदार मानते हुए उनसे रिकवरी की कार्रवाई प्रस्तावित है।
जिस पर डीडीओ व पीडी को पुनर्विचार के लिए 31 जुलाई को ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा मांग पत्र सौंपा गया था। मांग पूरी न होने पर मंगलवार को ग्राम विकास अधिकारी जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में धरने पर बैठ गए।
धरने में जिलाध्यक्ष नानबाबू यादव ने कहा कि कुछ ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में ग्राम पंचायतों में 60 प्रतिशत श्रम व 40 प्रतिशत सामग्री अनुपात के विचलन में सीधे ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान व तकनीकी सहायक को जिम्मेदार मानते हुए उनसे रिकवरी की कार्रवाई प्रस्तावित है।
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जिसे रोकने के लिए जिला विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक से विचार करने को कहा गया था। तीन जुलाई को सीडीओ द्वारा मौखिक रूप से रिकवरी समाप्त करने की सहमति दी गई थी।
अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक सप्ताह बैठक के बावजूद हमें शोषण के लिए मुख्यालय पर बैठक में बुलाया जाता है।
इतना ही नहीं पीडी द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों से अमर्यादित शब्दों को प्रयोग किया जाता है। जिसे कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि हमारी मांग पूरी न हुई तो हम कार्य बहिष्कार को बाध्य होंगे।
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जिस पर डीडीओ व पीडी को पुनर्विचार के लिए 31 जुलाई को ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा मांग पत्र सौंपा गया था। मांग पूरी न होने पर मंगलवार को ग्राम विकास अधिकारी जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में धरने पर बैठ गए।
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धरने में जिलाध्यक्ष नानबाबू यादव ने कहा कि कुछ ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में ग्राम पंचायतों में 60 प्रतिशत श्रम व 40 प्रतिशत सामग्री अनुपात के विचलन में सीधे ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान व तकनीकी सहायक को जिम्मेदार मानते हुए उनसे रिकवरी की कार्रवाई प्रस्तावित है।
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जिसे रोकने के लिए जिला विकास अधिकारी व परियोजना निदेशक से विचार करने को कहा गया था। तीन जुलाई को सीडीओ द्वारा मौखिक रूप से रिकवरी समाप्त करने की सहमति दी गई थी।
अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक सप्ताह बैठक के बावजूद हमें शोषण के लिए मुख्यालय पर बैठक में बुलाया जाता है।
इतना ही नहीं पीडी द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों से अमर्यादित शब्दों को प्रयोग किया जाता है। जिसे कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि हमारी मांग पूरी न हुई तो हम कार्य बहिष्कार को बाध्य होंगे।